प्रदर्शनकारियों के समर्थक जनरल को 'गोली' लगी

प्रदर्शनकारी मानते है कि वर्तमान सरकार अवैध है और संसद भंग करे दोबारा चुनाव कराए जाएँ
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बैकाक में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को हटने के लिए दी गई समय सीमा ख़त्म होने के साथ ही फिर हिंसा शुरु हो गई है.

प्रदर्शनकारियों के समर्थक और सैन्य प्रमुख माने जाने वाले मेजर जनरल खट्टिया सावाडिस्पोल गोली लगी है और ख़बरों के अनुसार वो बुरी तरह घायल हैं.

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बैंकाक के मुख्य चौराहे पर विस्फोट और गोलीबारी की भी ख़बर है. इन इलाक़ों में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बख्तरबंद गाड़ियां और सैनिक पहुंच गए हैं.

थाइलैंड के विवादित हस्तियों में रहे जनरल खट्टिया जिन्हें सेह दायंग के नाम से भी जाना जाता है.सेना से विद्रोह कर बाहर निकले खट्टिया को थाईलैंड सरकार ने आतंकवादी घोषित कर रखा है.

लाल कमीज़ धारी प्रदर्शनकारियों में वामपंथी, लोकतंत्र समर्थक और अपदस्थ प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावाट के समर्थक शामिल हैं.

उनका कहना है कि वर्तमान सरकार अवैध है क्योंकि वो चुनाव जीतकर सत्ता में नहीं आई. लाल कमीज़ धारी प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि संसद भंग की जाए और नए चुनाव कराए जाएं.

सामान्य कामकाज ठप्प

सेना के प्रवक्ता ने कहा कि प्रदर्शनकारी इस घेरे से निकल तो पाएंगे लेकिन उसमें वापस घुस नहीं सकेंगे. उस इलाक़े की दूकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से बंद रहने का आग्रह किया गया है और सार्वजनिक यातायात बंद कर दिया गया है.

प्रधानमंत्री अभिसित विज्जजीवा पर भारी दबाव है कि इस प्रदर्शन का अंत करें जिसने 14 मार्च से बैंकॉक में कामकाज ठप्प कर रखा है.

प्रधानमंत्री विज्जजीवा ने 14 नवंबर को चुनाव कराने की पेशकश की थी लेकिन दोनों पक्षों के बीच इस बात को लेकर समझौता नहीं हो पाया कि पिछले महीने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा के लिए किसे ज़िम्मेदारी ठहराया जाए.

मोर्चाबंदी

बुधवार को सरकार ने प्रदर्शनकारियों को दी जा रही बिजली-पानी की सप्लाई को काटने की घोषणा की थी लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया.

सेना के प्रवक्ता करनल संसर्न काएकुमनर्ड ने कहा, "स्थानीय समय के अनुसार शाम छह बजे इस इलाक़े को सील कर दिया जाएगा. किसी को अंदर जाने की इजाज़त नहीं होगी".

उन्होने बताया कि सशस्त्र निशानेबाज़ इस इलाक़े में तैनात रहेंगे.

सार्वजनिक यातायात के अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के इलाक़े के आस पास के स्टेशन भी बंद कर दिये जाएंगे.

प्रदर्शनकारियों ने बैंकॉक के मुख्य बाज़ार से लेकर व्यापारिक इलाक़े तक डेरा जमा रखा है. उन्होने टायरों और बांसों की मदद से ऊंची ऊंची रुकावटें खड़ी कर रखी हैं जिनके पीछे बिजली पैदा करने के लिए जैनरेटर और खाद्य सामग्री जमा कर रखी है.

सेना की ये घोषणा तब आई है जब समस्या के राजनीतिक हल की आशा क्षीण हो गई.

प्रधानमंत्री अभिसित विज्जजीवा ने पत्रकारों को बताया कि नवम्बर में चुनाव की पेशकश भी उन्होने वापस ले ली है.

उन्होने कहा, "मैंने चुनाव की तारीख़ रद्द कर दी है क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने हटने से इंकार कर दिया. मैंने सुरक्षा अधिकारियों से कहा है कि जल्दी से जल्दी स्थिति सामान्य की जाए".

समझौते की आशा

कुछ दिन पहले ऐसा लग रहा था कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाएगा. लेकिन फिर प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि 10 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ जो कार्रवाई की गई उसके लिए उप प्रधानमंत्री सुथप थाउगसुबान पर अभियोग लगाए जाएं.

उप प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए एक सैन्य अभियान का निरीक्षण किया था जिसमें 19 प्रदर्शनकारी, एक पत्रकार और पांच सैनिक मारे गए थे.

लेकिन लाल कमीज़ धारी प्रदर्शनकारी सेना की घोषणा से घबराए नहीं हैं. उनके नेता नत्तवुत साइकुआ ने कहा, "हम जबरन हटाए जाने की हर कोशिश के लिए तैयार हैं. हमारे गार्ड इस इलाक़े की रक्षा को तैयार हैं".

उन्होने कहा, "मैं अपने समर्थकों से आग्रह करता हूं कि वो यहां आकर हमारी मदद करें क्योंकि जितने अधिक लोग होंगे उतना ही सरकार के लिए हमें आहत करना मुश्किल होगा".