किर्गिस्तान दंगों में भारतीय भी फंसे

किर्गिस्तान में नस्ली हिंसा से जान बचाकर हज़ारों उज़बेक शरणार्थी उज़बेकिस्तान की ओर भाग रहे हैं. कम से कम 116 भारतीय भी इन दंगों में फंसे हुए हैं.
दक्षिणी किर्गिस्तान के ओश और जलालाबाद शहर में हुई नस्ली हिंसा में कम से कम 113 लोग मारे जा चुके हैं.
दोनों शहरों में अभी भी छिटपुट गोलीबारी हो रही है.
चार दिनों से चल रहे ये नस्ली दंगे सोवियत रूस के विघटन के बाद के सबसे भीषण दंगे हैं.
भारतीय फंसे
अस्त-व्यस्त क़ानून व्यवस्था की वजह से 115 भारतीय भी दक्षिणी किर्गिस्तान में फंसे हुए हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है जलालाबाद शहर में 15 छात्र फंसे हुए हैं वहीं ओश में 99 छात्र, एक प्रोफ़ेसर और एक बिजनसमैन फंसे हुए हैं.
विदेश मंत्रालय का कहना है, “हमारा दूतावास इन में से कुछ लोगों के साथ संपर्क में है और साथ ही किर्गिज़ सरकार के विभागों के साथ भी संपर्क बना हुआ है.”
मंत्रालय का कहना है कि विकट परिस्थिति के बावजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और जैसे ही हालात सुधरेंगे अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे.
निशाने पर उज़बेक

दंगों में मुख्य तौर से किर्गिस्तान के उज़बेक बहुल इलाकों को निशाना बनाया गया है.
ओश शहर से शुरू हुआ दंगा रविवार को जलालाबाद में फैल गया.
जलालाबाद में रहनेवाले उज़बेक लोग पड़ोसी देश उज़बेकिस्तान की ओर भाग रहे हैं. वहां पहले से ही ओश से आए हुए हज़ारों शरणार्थी पहुंचे हुए हैं.
समाचार एजेंसियों का कहना है कि अब तक 80,000 शरणार्थी वहां पहुंच गए हैं जिनमें ज़्यादातर महिलाएं, बूढ़े और बच्चे हैं.
किर्गिस्तान की अंतरिम सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है और 24 घंटों का कर्फ़्यू भी लगा दिया है.
लेकिन अभी भी दंगों पर काबू नहीं पाया जा सका है.
जलालाबाद और ओश में कई निजी संपत्तियों में आग लगा दी गई है.
किर्गिज़-उज़बेक सीमा पर जुटे शरणार्थियों ने सेना पर भी आरोप लगाया है कि वो हथियारबंद किर्गिज़ गुटों का साथ दे रहे थे.
बीबीसी के पास कुछ कैमरा फ़ुटेज हैं जिनमें दिखाया गया है कि किस तरह स्थानीय किर्गिज़ लोग तालियां बजा रहे थे जब सेना की बख्तरबंद गाड़ियां उज़बेक लोगों पर निशाना साध रही थीं.

























