आतंकवादी षड़यंत्र में अमरीकियों को सज़ा

पाकिस्तान की एक अदालत ने आतंकवाद के अभियोग में दोषी पाए गए पांच अमरीकियों को दस दस साल की जेल की सज़ा सुनाई है.
इनकी उम्र 18 से 25 साल के बीच है और इन्हे पाकिस्तान की धरती पर आतंकवादी हमलों का षड़यंत्र करने और प्रतिबंधित जिहादी संगठनों को पैसा देने का दोषी पाया गया था.
इन्हे दिसम्बर 2009 में पाकिस्तान के पूर्वोत्तर नगर सरगोदा में पकड़ा गया था.
इनमें मिस्री मूल के रामी ज़मज़म, पाकिस्तानी मूल के वक़ार ख़ान और ओमर फ़ारूक़ और इथिओपियाई मूल के अमन हसन येमेर और अहमद मिन्नी हैं.
ये सभी अमरीका के वर्जीनिया राज्य के ऐलेक्ज़ैंड्रिया शहर से पिछले नवम्बर में ग़ायब हुए थे.
मदद का मिशन
जब ये युवक अपने अपने घरों से ग़ायब हो गए तो एक परिवार को उनका एक विडियो संदेश मिला था जिसमें युद्ध के दृश्य दिखाए गए थे और मुसलमानों की रक्षा के लिए लड़ाई करने का आह्वान किया गया था. इसके बाद इन परिवारों ने अमरीकी प्रशासन से सम्पर्क किया.
बाद में जब परिवार वालों को यह जानकारी मिली कि ये युवक सरगोदा में एक रिश्तेदार के घर रह रहे हैं तो उन्होने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई को उस घर का पता बताया.
अभियोक्ता ने कहा कि ये युवक अफ़ग़ानिस्तान जाकर तालिबान के साथ मिलकर नेटो बलों से लड़ना चाहते थे और उन्होने सैफ़ुल्लाह नामके अल क़ायदा के एक सदस्य से ईमेल और यूट्यूब पर सम्पर्क भी किया था.

अभियोक्ता ने कहा कि जिस समय उन्हे गिरफ़्तार किया गया उनके पास संवेदनशील जगहों के नक्शे थे जिससे ये संकेत मिला कि ये उनपर हमले करने की योजना बना रहे थे.
इन युवकों ने अल क़ायदा से किसी तरह का संबंध होने से इंकार किया है और उनका कहना है कि वो अफ़ग़ानिस्तान केवल मदद का काम करने जाना चाहते थे.
उन्होने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई और पाकिस्तानी जांचकर्ताओं पर उन्हे फंसाने और उनका उत्पीड़न करने के आरोप लगाए.
न्यायाधीश ने उन्हे दो अभियोगों पर दोषी क़रार दिया जबकि तीन अन्य पर बरी कर दिया.
इन पांचो को आपराधिक षड़यंत्र के लिए दस दस साल और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों को पैसा देने के लिए पांच पांच साल की सज़ा दी गई है. ये दोनों सज़ाएं साथ साथ शुरु होंगी.
युवकों के एक वकील हसन कटचेला का कहना है कि वो अपील करेंगे.
ओमर फ़ारुक़ के पिता ख़ालिद फ़ारुक़ ने सरगोदा जेल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “हमें बहुत ही निराशा हुई है. हमें इसकी उम्मीद नहीं थी”.
“हम हाई कोर्ट से लेकर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट तक जाएंगे. हम सात दिनों के अंदर लाहौर हाई कोर्ट में अपील दायर करेंगे”.

























