क़ैदियों को मताधिकार पर विचार

खबरों के अनुसार यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन रॉईट्स के फ़ैसले के पाँच साल बाद ब्रितानी सरकार सज़ायाफ़्ता कैदियों को मताधिकार देने के बारे में विचार कर रही है.
पाँच साल पहले 2005 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन रॉईटस ने ब्रिटेन में कै़दियों को वोट देने पर लगे प्रतिबंध को गै़रक़ानूनी ठहराया था.
टेलिग्राफ अख़बार के अनुसार ब्रितानी सरकार को सलाह दी गई है कि इस फ़ैसले का विरोध बरकरार रखना सरकार को काफ़ी मंहगा पड़ सकता है.
हालांकि मंत्रिमंडल कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा है कि इस मुद्दे पर अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.
मंत्रिमंडल कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा "सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है और इस पर अभी काम चल रहा है. इस मुद्दे पर कई अद़ालती मुकदमें चल रहे हैं, सरकार उन मामलों पर भी ग़ौर कर रही है."
हत्या के आरोप में सज़ा काट रहे जॉन हर्सट का कहना है कि कैदियों के लिए अपनी समस्याएँ उठाने के लिए एक क़ानूनी रास्ता होना चाहिए.
यूरोपियन कोर्ट में इस मामले को ले जाने वाले जॉन हर्सट ने कहा " लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोग अपनी माँग के लिए दबाव डाल सकते है, संसद में क़ानून बदलने और सुधार के लिए लॉबिंग कर सकते है. लेकिन ये सब आप नहीं कर सकते जब तक आपके पास वोट का अधिकार हा न हो "
बीबीसी की राजनैतिक संवादाता रीता चक्रबर्ती के अनुसार ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन आम चुनाव में कैदियों को मत देने का अधिकार देने के लिए बड़े बेमन से 140 साल पुराने इस क़ानून को बदलने के लिए राज़ी हुए.
हालांकि वो गंभीर अपराध के लिए सज़ा पाए लोगों को वोट का अधिकार दिए जाने का विरोध करेंगे .
कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसदों के बीच ये कदम काफ़ी अलोकप्रिय हो सकता है. लेकिन लेबर पार्टी के जस्टिस सेक्रेटरी लॉर्ड फॉकनर ने कहा कि यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन रॉईटस की बात न मानना ब्रिटेन के लिए बड़ा असंगत और ग़लत कदम होगा.
ब्रिटेन में फ़िलहाल कानूनी मामला झेल रहे लोगों, अदालत की अवमानना के आरोप में जेल में बंद लोगों को वोट देने का अधिकार है. लेकिन ब्रिटेन की जेलों में बंद 70,000 सज़ायाफ़्ता कै़दियों को मत देने का अधिकार नहीं है.
डेली टेलिग्राफ अख़बार के अनुसार एक विकल्प ये है कि कैदियों को अपने-अपने पते पर वोट डालने का अधिकार दिया जाए ताकि एक जेल एक संसदीय क्षेत्र न बन पाए.
'प्रिज़न रिफॉर्म ट्रस्ट' के जुलियट लेयॉन ने बीबीसी को बताया " जो लोग जेल जाते हैं वो अपनी स्वतंत्रता खो देते हैं, लेकिन वो कोई और सज़ा भुगतने के अधिकारी नहीं हैं. काफ़ी जेल अधिक्षक भी मानते है कि वोट का अधिकार कैदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का अहम हिस्सा है."

























