अहमद ग़िलानी अमरीकी दूतावास पर हमले का दोषी

ग्वांतानामो जेल से अमरीका की सिविल अदालत में पेशी के लिए लाए गए पहले संदिग्ध व्यक्ति को अमरीकी संपत्ति को उड़ाने की साज़िश रचने के एक मामले में दोषी पाया गया है.
लेकिन अहमद ग़िलानी को इसके अलावा हत्या और हत्या की साज़िश के कई अन्य मामलों में निर्दोष पाया गया है.
तंज़ानिया के रहने वाले अहमद ख़लफ़ान ग़िलानी पर आरोप था कि वो 1998 में कीनिया और तंज़ानिया स्थित अमरीकी दूतावासों पर अलक़ायदा के हमले में शामिल थे.
इन हमलों में 224 लोगों की मौत हो गई थी. इससे पहले न्यूयॉर्क स्थित संघीय न्यायालय ने उसे छोड़ दिया था. बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि वो अलक़ायदा के लिए काम करने वाला एक बहुत छोटा कार्यकर्ता था.
ग़िलानी को इस अपराध के लिए 20 साल की सज़ा हो सकती है.
अभियोग

गिलानी को चरमपंथियों की लॉरी, ऑक्सीजन और ऐसीटिलीन गैस ख़रीदने में सहायता करने का दोषी पाया गया है. इन सब चीज़ों का इस्तेमाल तंज़ानिया की राजधानी दार ए इस्लाम स्थित अमरीकी दूतावास को उड़ाने के लिए किया गया था.
गिलानी को दूतावास पर हमले से पहले विस्फोटकों से भरे बक्सों को लॉरी में रखने का भी दोषी पाया गया है.
अमरीकी जांचकर्ताओं के अनुसार ग़िलानी हमले से एक दिन पहले पाकिस्तान चला गया था.
अहमद ग़िलानी के ख़िलाफ़ अमरीका में मार्च 2001 में मुक़द्दमा शुरू हुआ था लेकिन वो उस वक़्त अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के वज़ीरिस्तान इलाक़े में छिपा हुआ था. ग़िलानी को जुलाई 2004 में गिरफ़्तार किया गया था और उसे साल 2006 में ग्वांतानामो जेल भेज दिया गया था.
वर्ष 2009 में अमरीका ने ग्वांतानामो बे स्थित 'मिलिट्री ट्राइब्यूनल' में अहमद ग़िलानी के ख़िलाफ़ कार्रवाई रोककर उसके मुक़द्दमों को न्यूयॉर्क एक अदालत में शुरू किया था.

























