हमलों की बरसी पर संवेदना

अमरीका ने कहा है कि वो 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमलों के दौरान प्रभावित हुए लोगों की पीड़ा में भारत के साथ खड़ा है.
मुंबई हमलों की दूसरी बरसी पर अमरीका की विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने कहा है कि लोगों का संकल्प और संयम आतंकवादियों के बमों और बंदूकों से ज़्यादा शक्तिशाली है.
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए हमलों में 166 लोग मारे गए थे, जिनमें छह अमरीकी भी थे.
अपने बयान में हिलरी क्लिंटन ने कहा, "उस समय की तरह आज भी अमरीकी भारत के लोगों के साथ खड़े हैं और उन लोगों के प्रति हमारे मन में काफ़ी सम्मान है, जिन्होंने मुंबई हमलों के दौरान अपनी जान गँवाई."
गंभीरता
इस बीच अमरीका के दक्षिण और एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक ने कहा है कि ये पाकिस्तान का कर्तव्य और दायित्व है कि वो मुंबई हमलों के दोषियों को जल्द से जल्द सज़ा दिलाए.
उन्होंने कहा कि अमरीका हमेशा से ही '26 नवंबर के हमलों में शामिल' चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा को गंभीरता से लेता है.
रॉबर्ट ब्लेक ने कहा, "हमने लश्कर को काफ़ी गंभीरता से लिया है. अब तो आंतकवाद निरोधक अमरीकी विशेषज्ञों ने लश्कर को संभवत: अल क़ायदा के बाद सबसे बड़ा ख़तरा माना है."
दूसरी ओर भारत में अमरीका के राजदूत टिमोथी रोमर ने भी मुंबई हमलों में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है और कहा है कि वो अब भी हमलों की तस्वीरें भूले नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि आज अमरीका और भारत पहले से ज़्यादा मिलकर काम कर रहे हैं और आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष में कंधे के कंधा मिलाकर काम करते रहेंगे.

























