'पाकिस्तानी कार्रवाई से ख़ुश नहीं भारत'

विकीलीक्स ने भारत से जुड़े जो दस्तावेज़ जारी किए हैं, उनसे यह पता चलता है कि भारत इस बात को लेकर नाराज़ था कि पाकिस्तान ने मुंबई हमलों में शामिल संदिग्ध चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की.
अमरीकी अधिकारियों को भारतीय राजनयिकों ने जो जानकारी दी, उसके मुताबिक़ पाकिस्तान को भारत की सेना के अलावा कुछ नहीं दिखता और उसने हमलों में शामिल लोगो के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है.
संदेश में अमरीका के सीनेटर जॉन केरी की भारत यात्रा का भी ज़िक्र है
जॉन केरी से मुलाक़ात से थोड़ी देर पहले भारत के केंद्रीय गृह मंत्री पी चिंदबरम ने अमरीकी जाँच एजेंसी एफबीआई के निदेशक रॉबर्ट मूलर को कहा था कि मुंबई हमलों के संदिग्धों के ख़िलाफ़ 'पाकिस्तान ने कुछ नहीं किया'.
निराशा
साथ ही भारत ने ये भी दावा किया था कि मुंबई हमले में पाकिस्तानी सेना का भी हाथ था.
जो दस्तावेज़ जारी किए गए हैं, वे दो परमाणु संपन्न देशों के बीच के रिश्तों को भी दर्शाता है.
लेकिन जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल आपसी बातचीत में किया गया है, वो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत की निराशा को दिखाता है.
भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि वर्ष 2008 के बाद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता रुकी हुई है वो तब तक दोबारा शुरू नहीं हो सकती जब तक इस्लामाबाद चरमपंथी आधारभूत ढाँचे को गिरा नहीं देता.
भारत ये आरोप लगाता रहा है की पाकिस्तान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल चरमपंथियों की मदद के लिए करता है.

दस्तावेज़ों में कहा गया है निरुपमा राव ने अमरीका को कहा था,''बातचीत नहीं शुरू हो सकती.''
इस दौरान जॉन केरी ने माना था की पाकिस्तान ने आंतकवाद के ख़िलाफ़ कुछ ठोस नहीं किया है जो इस बात का प्रमाण है कि वह आंतकवाद के प्रति गंभीर नहीं है.
रिश्ते
विकीलीक्स के इन दस्तावेज़ों को ब्रितानी अख़बार 'द गार्डियन' ने शुक्रवार को छापा है.
दस्तावेज़ों की मानें तो अमरीका ने भारत और पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के लिए कई बार अपील की थी.
वैसे तो पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के सिलसिले में सात लोगों को गिरफ़्तार किया और शीर्ष अधिकारी ये दावा भी करते हैं कि पाकिस्तान क़ानून के हिसाब से उन पर कार्रवाई करेगा लेकिन अभी तक ठीक से मुक़दमा भी शुरू नहीं हुआ है.
इस बीच अमरीका दोनों देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश करता रहता है.
भारत जो एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और सबसे बड़ा लोकतंत्र है अमरीका उसे ख़फा़ नहीं कर सकता वहीं अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता लाने के लिए उसे पाकिस्तान से भी संबंध मज़बूत रखना ज़रूरी है.

























