'अमरीकी-मुसलमानों पर अल क़ायदा की निगाह'

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अमरीका में मुस्लिम समुदाय के लोगों में कथित तौर पर कट्टरपंथ बढ़ने के मामले पर वाशिंगटन में संसद की विवादित सुनवाई शुरु हुई है.

इस मुद्दे के लिए गठित समिति के प्रमुख और रिपब्लिकन पार्टी के नेता पीटर किंग ने आगाह किया है कि अल क़ायदा अमरीकी मुसलमानों को प्रशिक्षित कर रहा है ताकि वे अमरीका में हिंसक हमले कर सकें.

उन्होंने कहा, “इस ख़तरे से निपटना ज़रूरी है. अमरीकी मुसलमानों को कट्टरपंथ के रास्ते पर ले जाया जा रहा है और ये अल क़ायदा की रणनीति है ताकि अमरीका पर हमले जारी रखे जा सकें.”

इस सुनवाई को लेकर अमरीका में विवाद चल रहा है. कई आलोचकों का कहना है कि सुनवाई से इस्लाम विरोधी भावना बढ़ेगी.

मुसलिम समुदाय को चुनने के लिए ये आलोचक रिपब्लिकन पार्टी के सदस्य पीटर किंग की आलोचना कर रहे है.

विवाद

गुरुवार को हुई सुनवाई में पीटर किंग ने कहा, “9/11 के हमलों के बाद अमरीका के आंतक-निरोधी क़दमों के कारण अल क़ायदा अमरीका पर देश के बाहर से हमले नहीं कर पा रहा था. अल क़ायदा अब अमरीकी मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रहा है ताकि उसे प्रशिक्षित कर सके.”

वहीं इसी समिति में शामिल डेमोक्रेटिक पार्टी के बेनी थॉम्पसन ने कहा है कि अमरीका को दूसरे समुदायों के प्रति नफ़रत फैलाने वाले लोगों की भी जांच करनी चाहिए.

उनका मानना है कि इस सुनवाई का इस्तेमाल आतंकवादी प्रोपेगेंडा के लिए कर सकते हैं.

सुनवाई के दौरान दो ऐसे व्यक्तियों ने भी गवाही दी जिनका कहना था कि उनके बेटे कट्टरपंथ के रास्ते पर चले गए हैं.

मिनेसोटा के रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उनके बेटे को सोमालिया के अल शबाब में भरती कर लिया गया था (जिसे अमरीका आंतकवादी संगठन मानता है) और बाद में वो मारा गया था.

उधर व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमरीका में सुरक्षा संबंधी क़दमों के तहत तभी तरह के कट्टरपंथियों पर निगाह रखी जानी चाहिए न कि सिर्फ़ मुसलमान समुदाय पर.