इतिहास के पन्नों से: मार्टिन लूथर किंग की गिरफ़्तारी और मृत्यु का अधिकार

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यदि इतिहास के पन्नों में झांके तो 22 मार्च के दिन की कुछ प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार हैं:
1956: बस बॉयकॉट और मार्टिन लूथर किंग की गिरफ़्तारी
अमरीका में काले यानी अफ़्रीकी मूल के नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे 27 वर्षीय मार्टिन लूथर किंग को काले अफ़्रीकियों की ओर से एलबामा में बसों का बॉयकॉट आयोजित करने का दोषी पाया गया. उन्हें 500 डॉलर का जुर्माना हुआ.
ये बॉयकॉट तब आयोजित हुआ था जब एक काली महिला रोज़ा पार्क्स ने मॉंटगुमरी में एक बस से यात्रा करते समय अपनी सीट एक श्वेत यात्री के लिए खाली करने से इनकार कर दिया. उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

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उस शहर के नियमों के अनुसार काले और श्वेत यात्रियों के लिए अलग-अलग सीटें होती थी. यदि ज़रूरी हो तो काले यात्रियों को श्वेत यात्रियों के लिए सीट खाली करनी होती थी.
बहरहाल बस बॉयकॉट 382 दिन चला और दिसंबर 1956 में तब ख़त्म हुआ जब अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद इस भेदभाव को एलाबामा में ख़त्म कर दिया गया.
1979: हॉलैंड में ब्रितानी राजदूत की हत्या
हॉलैंड में ब्रितानी राजदूत सर रिचर्ड साइक्स और उनके अर्दली की गोली मारकर हत्या कर दी गई. हेग में वे अपनी कार से अपने घर से दूतावास जा रहे थे जब दो बंदूकधारियों ने उन पर गोलियाँ चलाईं.
इन हत्याओं से दोनों देशों की पुलिस बौखला गई और उन्हें शक था कि ये संयुक्त और स्वतंत्र आयरलैंड की पक्षधर आईआरए का काम है. बाद में ये शक सही निकला.
2002: मृत्यु का अधिकार
गर्दन से नीचे लकवे से प्रभावित एक महिला को वर्ष 2002 में एक ब्रितानी अदालत ने मृत्यु का अधिकार दे दिया. इस महिला की उम्र 43 वर्षीय की थी और उसकी पहचान गुप्त रखी गई.
ये महिला जमैका में जन्मी थी और आठ साल की उम्र में ब्रिटेन आ गई थी.
लेकिन जज ने इस आदेश के साथ-साथ उनसे अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया. एक महीने बाद इस महिला ने अदालत की ओर से दिए गए इस अधिकार का इस्तेमाल किया और शांतिपूर्ण तरीके से नींद में ही उनकी मृत्यु हो गई.

























