अंतरिक्ष में इंसान का पहला क़दम

यूरी गागारिन
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पचास वर्ष पहले सोवियत संघ के यूरी गागारिन ने पृथ्वी का एक चक्कर लगाकर अंतरिक्ष में मानव उड़ान के युग की शुरुआत की थी.

अंतरिक्ष में उन्होंने 108 मिनट की उड़ान भरी और ये उड़ान सोवियत संघ के लिए प्रचार का एक ज़बरदस्त औज़ार साबित हुई.

इससे पहले 1957 में सोवियत संघ अंतरिक्ष में पहला उपग्रह स्पूतनिक छोड़ चुका था.

अमरीका के लिए ये तगड़ा झटका था जिसके साथ सोवियत संघ हर क्षेत्र में टक्कर ले रहा था.

अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के चार्ल्स ड्यूक आज भी उस दौर को याद करते हैं. ड्यूक 1972 में अपोलो 16 यान पर सवार होकर चंद्रमा पर पहुँचे थे.

उन्होंने कहा, "मैं तब जर्मनी में युवा पायलट था और एफ़-102 विमान उड़ाया करता था. लेकिन उस साल हमारा पूरा ध्यान बर्लिन की दीवार बनाने पर केंद्रित था. हम अंतरिक्ष के बारे में उतना नहीं सोचते थे."

उपलब्धि

सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव के बेटे सेर्गेई ख्रुश्चेव ने बीबीसी को बताया, "हमें अपनी इस सफलता पर काफ़ी गर्व था लेकिन हम तब ये समझ नहीं पाए थे कि ये कितनी बड़ी उपलब्धि है. हमारे लिए ये सिलसिले की एक और उड़ान थी -- एक और उपलब्धि."

लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पिता इसके महत्व से अच्छी तरह वाक़िफ़ थे.

सेर्गेई ने कहा कि गागारिन के मॉस्को लौटने पर शहरवासियों ने उनका ज़बरदस्त स्वागत किया. लोग सड़कों पर थे, इमारतों की छतों पर इकट्ठा थे और खिड़कियों से झाँक रहे थे.

वो उस दृश्य की तुलना 9 मई के समारोहों से करते हैं जब दूसरे विश्वयुद्ध में सोवियत संघ की जीत हुई थी.

उस दौर में सोवियत संघ और अमरीका हर क्षेत्र में एक दूसरे को पछाड़ने की फ़िराक़ में रहते थे.

दोनों देशों के वैज्ञानिक पूरे सौर मंडल को माप डालना चाहते थे और इंसानों को उड़ान पर भेजने से पहले उन्होंने जानवरों को अंतरिक्ष में भेजा.

अदभुत दृश्य

सोयूज़
इमेज कैप्शन, सोवियत संघ के अंतरिक्ष अभियान से अमरीका को झटका लगा.

यूरी गागारिन को 19 कॉस्मोनॉटों या अंतरिक्ष यात्रियों में से छाँटा गया था. उनसे साथ दूसरे अंतरिक्ष यात्री गेरमन तितोव थे.

गागारिन के माता पिता मज़दूर वर्ग के थे और ये कहा जाता था कि कम्युनिज़्म के उस दौर में उन्हें अपनी इस पृष्ठभूमि का फ़ायदा मिला.

बारह अप्रैल 1961 की सुबह यूरी गागारिन त्यूरातम टेस्ट रेंज में तीस मीटर ऊँचे बूस्टर के ऊपर अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए जाने का इंतज़ार कर रहे थे.

जैसे ही रॉकेट छोड़ा गया गागारिन ने कहा, "पोयेख़ाली", जिसका अर्थ होता है -- अब हम चले.

कुल पाँच फ़ुट दो इंच के गागारिन अंतरिक्ष यान के कैपसूल में आसानी से फ़िट हो सकते थे.

जब वो अंतरिक्ष में पहुँचे तो पृथ्वी का प्रभामंडल देखकर हतप्रभ थे. उन्होंने आश्चर्यचकित होते हुए कहा कि पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाली बादलों की छाँव अदभुत दृश्य का निर्माण कर रही है.

ख़तरा

यूरी गागारिन
इमेज कैप्शन, सोवियत अंतरिक्ष यान बरबादी के कगार पर पहुँच चुका था.

अंतरिक्ष की इस पहली उड़ान के दौरान यूरी गागारिन का अपने यान पर कोई नियंत्रण नहीं था.

बीबीसी में 19758 और 1975 के बीच अंतरिक्ष विज्ञान संवाददाता रह चुके रेगिनॉल्ड टर्निल का कहना है, "किसी को ये नहीं मालूम था कि शून्य गुरुत्व का अंतरिक्ष यात्री पर क्या असर होगा. इस बात को लेकर काफ़ी चिंता थी कि भारहीनता की स्थिति में अंतरिक्षयात्री अपना विवेक खो सकता है."

लेकिन इस बात को लेकर भी चिंता थी कि अगर धरती से अंतरिक्ष यान का नियंत्रण नहीं सध पाया तो क्या होगा.

इसके लिए यूरी गागारिन को एक मुहरबंद लिफ़ाफ़े में कुछ कोड दिए गए थे जिनके ज़रिए वो आपात स्थिति में यान को नियंत्रित कर सकते थे.

लौटते वक़्त उनका यान लगभग बरबादी के कगार पर पहुँच गया था. लेकिन इसका पता बाद में लगा.

गागारिन के कैप्सूल को दूसरे मॉड्यूल से जोड़ने वाले तार लौटते वक़्त ख़ुद से अलग नहीं हुए और पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही उनका कैपसूल आग की लपटों में घिर गया.

गागारिन ने बाद में उस घटना को याद करते हुए कहा, "मैं धरती की ओर बढ़ते हुए एक आग के गोले के भीतर था."

पूरे दस मिनट तक आग में घिरे रहने के बाद किसी तरह तार जले और उनका कैप्सूल अलग हुआ.

धरती पर लौटने से पहले ही यूरी गागारिन एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय शख़्सियत बन चुके थे.