मुश्किल में हैं चीन के ग्रामीण

बेहतर जीवन और सुविधाओं की तलाश में चीन के देहाती इलाक़ों से शहरों में आकर बसे लोगों की दशा दूसरे दर्जे के नागरिकों से बेहतर नहीं है.
शहर वासियों को सरकार जिस तरह की सुविधाएं और फ़ायदे मुहैया करवाती है वैसी सुविधाएं ग्रामीण इलाक़ों से आने वाले लोगों को हासिल नहीं होती.
एक आकलन के अनुसार देहात से शहरों में आ बसे ऐसे लोगों की संख्या बीस करोड़ के आसपास है.
पिछले छह साल से राजधानी बेजिंग में रहने वाले गुइयून गुओ और उनकी पत्नी ली ज़ान को न तो शहरी लोगों की तरह इलाज की सुविधा प्राप्त है, न उनके बच्चों को पब्लिक स्कूलों में दाख़िला मिलता है और न ही बेरोज़गारी भत्ता.
‘भेदभाव’

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जब उनका बच्चा स्कूल जाने की उम्र में पहुँचा तो उसे पढ़ाई के लिए उसके दादा-दादी के पास हेबेई प्रांत भेजना पड़ा.
ली ज़ान ने बीबीसी को बताया, “मैं दिन भर रोती रही क्योंकि मुझे अपने बेटे की याद आ रही थी.”
पिछले छह साल में वो अपने बेटे से साल में सिर्फ़ एक बार मिल पाती हैं.
एक साल पहले उनके घर एक बेटी का जन्म हुआ जिसे उन्होंने अपने साथ रखने का फ़ैसला किया.
ली ने कहा, “अब हमारे पास कुछ रुपया है इसलिए हम उस दारुण स्थिति से नहीं गुज़रना चाहते.”
पति-पत्नी ने अब एक वैन ख़रीद ली है जिसमें वो बीयर बेचने का धंधा करते हैं.
बढ़ता पलायन
पिछले तीस वर्षों में लाखों लाख देहाती कामगार पलायन करके शहरों में पहुँचे हैं.
यथार्थ ये है कि वो अब शहरों में रहते हैं लेकिन सरकारी रजिस्टरों में उन्हें अब भी ग्रामीण नागरिक माना जाता है.
चीनी रिकॉर्ड प्रणाली हुकोऊ के मुताबिक़ ग्रामीण इलाक़ों में पैदा हुए लोगों को सभी सुविधाएं उनके गांव या क़स्बे से ही मिल सकती हैं.
सरकार ये स्वीकार करती है कि शहरी नागरिकों और बाहर से आए लोगों के बीच इस असमानता को पाटना एक बड़ी चुनौती है.
लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस स्थिति को धीरे धीरे ही सुधारा जा सकता है.

चीन के शहरों की जनसंख्या 63 करोड़ है. पिछले एक दशक में देहाती इलाक़ों से आए लोगों के कारण इसमें 37 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.
सरकारी नीतियाँ
तियानजिन में 52 साल की ज़ेंग पिंग को हाल ही में नौकरी मिली है.
उन्होंने बीबीसी को बताया, “मैंने प्रवासी कामगार बनने का फ़ैसला इसलिए किया क्योंकि हमारे इलाक़े में मज़दूरी काफ़ी कम है.”
ज़ेंग पिंग दो बच्चों की माँ हैं और पहली बार उन्होंने अपने प्रांत से बाहर क़दम रखा है.
हाल ही में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने इस समस्या का ज़िक्र किया था.
उन्होंने कहा था, “जिन ग्रामीण खेतिहर मज़दूरों को शहरों में स्थाई नौकरी मिल चुकी है उन्हें धीरे धीरे शहरी नागरिकों का दर्जा दिया जाएगा.”

























