अप्रवासियों की संख्या में भारी कटौती

डेविड कैमरन
इमेज कैप्शन, कैमरन की अप्रवासन नीति पर कई देशों ने चिंता जताई है
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ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अप्रवासन को 1980 के स्तर तक लाने के वादा करने जा रहे हैं.

साथ ही वे आश्वासन देने जा रहे हैं कि उनका देश दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ लोगों का हमेशा स्वागत करेगा.

गुरुवार को अपने एक भाषण में कैमरन कहने जा रहे हैं कि वर्ष 1997 से 2009 के बीच दूसरे देशों से 20 लाख से अधिक लोग ब्रिटेन आए जिसने कुछ समुदायों पर दबाव पैदा किया.

वे कहने जा रहे हैं कि इसकी वजह से इन समुदायों को असुविधा हुई है और उनकी सामूहिकता पर असर पड़ा है.

वे तर्क देने जा रहे हैं कि विदेशी कामगारों को रोज़गार इसलिए मिला क्योंकि पिछली सरकार ने राज्य की कल्याणकारी नीतियों में सुधार नहीं किए और एक ऐसी व्यवस्था क़ामय की जिसमें ब्रितानी लोगों को काम न करने पर भत्ता मिला.

योजना

उनका कहना है कि अप्रवासन में कटौती के लिए उनकी सरकार के पास एक व्यापक और प्रभावशाली नीति है.

विपक्षी लेबर पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री ऐसी नीति बनाने में विफल रहे हैं जो उनके वादों को पूरा कर सके.

यूरोपीय संघ के बाहर के देशों से आने वाले अप्रवासियों के लिए मंत्रालयों ने कड़े नियम लागू किए हैं.

उनका कहना है कि उनकी सरकार वर्ष 2015 तक अप्रासन में दो लाख से कई लाख तक की कमी करना चाहती है.

इसके लिए सरकार ने अप्रैल में 4,200 लोगों को और इसके बाद हर महीने 1,500 लोगों को आने देने की अनुमति देने का फ़ैसला किया है.

अप्रवासन में कमी कैमरन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है
इमेज कैप्शन, अप्रवासन में कमी कैमरन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है

इस सीमा से ग़ैर यूरोपीय देशों से आ रहे ऐसे लोगों को मुक्त रखा जाएगा जिनकी आय डेढ़ लाख पाउंड सालाना से अधिक है.

इसके अलावा ब्रिटेन आने वाले वैज्ञानिकों को भी विशेष छूट दी जाएगी.

अपनी सरकार की नीति की रुपरेखा बताते हुए कैमरन कहने जा रहे हैं कि ऐसे लोगों के लिए कोई आकर्षण बचा रहे जो सिर्फ़ ब्रिटेन में रहना चाहते हैं.

व्यवस्था के दुरुपयोग पर रोक लगाने का वादा करते हुए कैमरन कहने जा रहे हैं, "फ़र्ज़ी वीज़ा के लिए फ़र्ज़ी शिक्षा देने वाले फ़र्ज़ी कॉलेजों से भी निपटा जाएगा."

वे एक ऐसी बहस का आह्वान भी करने जा रहे हैं जिसमें न सिर्फ़ अप्रवासन पर चर्चा हो बल्कि सार्वजनिक सेवाओं, समुदायों और समाज पर पड़ने वाले असर पर भी चर्चा हो.