सीरिया में आपातकाल ख़त्म करने की घोषणा

बशर अल असद
इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ने बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था पर भी विचार करने का आश्वासन दिया है
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कई हफ़्तों के प्रदर्शन के बाद सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने अगले हफ़्ते से देश में आपातकाल ख़त्म करने की घोषणा की है.

अपने नव गठित मंत्रिमंडल को टेलीविज़न पर संबोधित करते हुए उन्होंने यह घोषणा की है.

देश में पिछले 48 वर्षों से लागू आपातकाल को हटाना, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में से एक थी.

इससे पहले शुक्रवार को राजधानी दमिश्क सहित सीरिया के कई शहरों में दसियों हज़ार लोग प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे.

जब से प्रदर्शन शुरु हुए हैं, ये प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी संख्या थी.

घोषणा

आपातकाल हटाने की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति असद ने दोहराया कि देश के ख़िलाफ़ षडयंत्र किया जा रहा है.

लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आपातकाल ख़त्म करने से सीरिया की में कोई राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो जाएगी.

सीरियाई नेता ने अपने मंत्रिमंडल को बताया कि एक विधि आयोग को आपातकाल हटाने को लेकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था और वह निर्णय पर पहुँच गया है.

उन्होंने कहा, "मैं समझता हूँ कि आयोग ने पिछले गुरुवार को अपना काम ख़त्म कर लिया है. अब वह अपनी सिफ़ारिशें सरकार को देगा और उसे तुरंत क़ानून बना दिया जाएगा. मैं नहीं जानता कि इसमें आपको कितना वक़्त लगेगा लेकिन आपातकाल हटाने के लिए अधिकतम समय सीमा अगले हफ़्ते तक की है."

आपातकाल के मौजूदा क़ानून के तहत किसी भी स्थान पर पाँच लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध है.

सीरिया में लगभग एक महीने पहले सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु हुए थे.

दमिश्क में प्रदर्शनकारी
इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारी आपातकाल हटाने के अलावा राजनीतिक सुधारों की भी मांग कर रहे हैं

तब से अब तक वहाँ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम दो सौ लोग मारे जा चुके हैं.

अधिकारियों का कहना है कि मारे गए लोगों में 30 से अधिक सुरक्षाकर्मी हैं.

राष्ट्रपति बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में अपने पिता से ये सत्ता संभाली थी. सरकार के ख़िलाफ़ हो रहे इस प्रदर्शन को उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती कहा जा रहा है.

बीबीसी के संवाददाता ओवेन बेनेट जोन्स का कहना है कि हालांकि राष्ट्रपति ने साफ़ साफ़ कहा है कि वे आपातकाल ख़त्म करने नया सुरक्षा क़ानून लागू करेंगे और कहा है कि वे बहुदलीय राजनीतिक प्रणाली पर विचार करेंगे.

उनके अनुसार यह कहना मुश्किल है कि इससे प्रदर्शनकारी संतुष्ट होकर अपने घरों को लौट जाएंगे.