बेटी पैदा करने पर बहू की हत्या

- Author, बिलाल सरवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काबुल
- प्रकाशित
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उत्तर-पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में एक महिला, वली हज़राता को, अपनी बहू की गला दबाकर हत्या करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है.
22 वर्षीय बहू, सतोरी ने तीसरी बार बेटी को जन्म दिया था. हत्या दो दिन पहले कुंडूज़ प्रांत में हुई. हालांकि दो महीने की बच्ची सही सलामत है.
इस हत्या में बच्ची के पिता की भूमिका होने की भी आशंका है. वो स्थानीय क़बायली लड़ाकों का सहयोगी है और घटना के बाद से फ़रार है.
अफ़ग़ानिस्तान में बेटे के पैदा होने पर जश्न मनाया जाता है लेकिन बेटियों को बोझ की तरह देखा जाता है.
बेटा ना पैदा कर पाने पर कई महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है. ये घटना भी पिछले कुछ समय में अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा का नमूना है.
पिछले वर्ष बुरी तरह से घायल एक 15 वर्षीय बाल वधू का वीडियो सामने आया था. उसके पति ने उसे कमरे में बंद कर बहुत यातनाएं दी थीं.
‘घर नहीं जहन्नुम’
ये हत्या माहफ़ाले गांव में हुई जो कुंडुज़ के ख़ानाबाद ज़िले में पड़ता है.
ख़ानाबाद के पुलिस प्रमुख ने बीबीसी को बताया, “दो महीने पहले महिला ने तीसरी बार बेटी को जन्म दिया, इसी वजह से उसके पति और सास ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी.”
वरिष्ठ अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि सास ने पहले अपनी बहू के पैर बांध दिए और फिर उनके बेटे ने अपनी पत्नी का गला दबा दिया.
सतोरी के पति को क़बायली लड़ाका बताया जाता है जिसको राजनीतिक समर्थन भी हासिल है. स्थानीय गांववालों के मुताबिक सतोरी अक्सर अपने पति को हथियार छोड़ने को कहती थी.
अपनी पहचान गुप्त रखे जाने की शर्त पर एक पड़ोसी ने बीबीसी को बताया, “वो घर में नहीं जहन्नुम में रहती थी, इसके बावजूद वो अपने पति से कहती थी कि घर में रहे और उन ठगों के साथ ना जाए.”
राजनीतिक समर्थन वाले इन क़बायली लड़ाकों पर अक़्सर महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा, चोरी, डकैती और जबरन वसूली के आरोप लगते रहे हैं.
हत्या की निंदा
अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रहीं कई नारीवादी आंदोलनकारियों ने ही इस मामले को मीडिया के सामने उजागर किया.
कुंडूज़ में महिला मामलों की निदेशक, नादिरा ग्या ने घटना की निंदा करते हुए कहा, “ये एक मासूम महिला के ख़िलाफ़ किया गया नृशंस अपराध है.”
स्थानीय धार्मिक और क़बायली नेताओं ने भी हत्या की निंदा किया और कहा कि ये लापरवाही है. उन्होंने इसे इस्लाम, मानवता और महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध भी बताया.
उन्होंने क़सूरवारों को फ़ौरन सज़ा दिए जाने की मांग की है. वली हज़राता ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं दी है.

























