होस्नी मुबारक के मुकदमे की सुनवाई पूरी

होस्नी मुबारक
इमेज कैप्शन, होस्नी मुबारक इस पूरे मुकदमे के दौरान ज्यादातर अस्वस्थ ही रहे हैं
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मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने कहा है कि वे दो जून को अपना फैसला और सजा सुनाएंगे.

अगस्त से चल रहे इस मुकदमे में बुधवार को आखिर सुनवाई हुई.

होस्नी मुबारक पर आरोप है कि पिछले साल उनकी सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान वे सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मौत के लिए दोषी हैं.

<link type="page"><caption> होस्नी मुबारक अर्श से फर्श तक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/02/110210_profile_hosni_mb.shtml" platform="highweb"/></link>

इन प्रदर्शनों के बाद आखिर होस्नी मुबारक को अपने पद से हटना पड़ा था और इस मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है.

पूर्व राष्ट्रपति के अलावा पूर्व गृहमंत्री हबीब अल अदली और सुरक्षा बलों के छह प्रमुखों पर भी यही आरोप है.

होस्नी मुबारक के दो बेटों गमाल और आला और उनके एक नजदीकी सहयोगी पर भ्रष्टाचार के मामले में अलग से मुकदमा चल रहा है.

ठोस सबूत नहीं

सुनवाई के आखिरी दिन अदालत के बाहर कई प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे और होस्नी मुबारक को मौत की सजा दिए जाने की मांग कर रहे थे.

हालांकि प्रदर्शनकारियों से ज्यादा संख्या में वहाँ पुलिस तैनात थी.

व्हील चेयर पर होस्नी मुबारक के अदालत में पेश होने के साथ इस मुकदमे की नाटकीय शुरुआत हुई थी लेकिन आखिरी दिन तक ये नाटकीयता काफी मद्धिम पड़ गई थी.

मुकदमे के दौरान होस्नी मुबारक ने ज्यादातर चुप ही रहे और आखिरी दिन जब बचाव पक्ष अपनी दलीलें दे रहा था वे खामोश ही रहे.

वे अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से इनकार कर चुके हैं.

सुनवाई के दौरान ठोस रुप से ऐसा कुछ भी नहीं उभर पाया कि तहरीर चौक की 18 दिनों की उस क्रांति के दौरान आखिर हुआ क्या था.

अभियोजन पक्ष का कहना है कि उस विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई सैकड़ों लोगों की मौत के लिए होस्नी मुबारक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं.

जबकि बचाव पक्ष का कहना है कि प्रदर्शनकारी अज्ञात बंदूकधारियों की गोलियों के शिकार हुए जो विदेशी भी हो सकते हैं.

बीबीसी संवाददाता जॉन लीन का कहना है कि मुकदमे के दौरान ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका जिससे ये साबित हो सके कि किसी ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश दिए थे.

हालांकि इस बीच गृहमंत्रालय के कई दस्तावेज रहस्यमय ढंग से गायब हो गए.

इसकी वजह से उन लोगों में बहुत नाराजगी है, जो उस हिंसा का शिकार हुए.

हमर अल हलावी ने तहरीर चौक में हुई हिंसा में अपनी एक आँख गँवा दी थी. वे कहते हैं कि जिन लोगों ने ये किया उसके खिलाफ अब भी उनके मन में बेहद गुस्सा है.

वे कहते हैं, "मुझे उन पर बहुत गुस्सा आता है. मै एक सामान्य आदमी हूँ और जब मुझे गोली मारी गई तो मैं सिर्फ अपना अधिकार मांग रहा था. मैं नहीं समझता की मुकदमा इतना निष्पक्ष था कि वह मुझे खुश कर सके या ये महसूस करवा सके कि मुझे मेरा अधिकार मिल गया है. ऐसा कुछ भी नहीं हुआ."

अब न्यायाधीशों के पास हजारों पृष्ठों के सबूतों का अध्ययन करने और उसके आधार पर फैसला देने के लिए तीन महीने का समय है.