सभी को चाहिए बुलेट प्रूफ कार

नशीली दवाओं की तस्करी की वजह से हिंसा से जुझ रहे मैक्सिको में बुलेट प्रूफ कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है.
हालांकि ऐसे कारों की मांग मैक्सिको में पहले भी रही है लेकिन तस्करों के खिलाफ सरकार के अभियान में आई तेजी के बाद राजनीतिज्ञों से लेकर सरकारी महकमों के अधिकारी और आम नागिरक भी अपने सुरक्षा इंतजाम को बेहतर बनाने के गर्ज से अपने वाहनों को बुलेट प्रूफ सिस्टम से लैस कर रहे हैं.
जाहिर है बुलेट प्रूफ कार तैयार करने वाली कंपनियों के मुनाफे में तेजी से इजाफा हो रहा है. इस समय देश में कम से कम पचास ऐसी कंपनियां हैं जो वाहनों को बुलेट प्रूफ सिस्टम से लैस करने के काम में व्यस्त हैं.
मैक्सिको सिटी में स्थित ग्लोबल आर्मर नाम की कंपनी ने हाल के कुछ दिनों में देश के जाने-माने नेताओं से लेकर उद्योगपतियों तक को बुलेट प्रूफ कार सप्लाई किए हैं.
नई कंपनियों का प्रवेश
कंपनी के मालिक जोस एडवार्डो लानोस कहते हैं, "मुझे याद है कि 1986 में ऐसी पांच कंपनियां थीं. अब इनकी तादाद 48 है. बुलेट प्रूफ कार तैयार करने वाली 48 कंपनियां."
हालांकि लानोस कहते हैं कि इनमें से सभी कंपनियों को भरोसे के काबिल नहीं समझा जा सकता है लेकिन उनका मानना है कि ऐसा हर उस व्यापार के साथ होता है, जहां धंधा बढ़िया होता हुआ दिखता है, तो नए लोग उसका फायदा उठाने के लिए उसमें शामिल होना चाहते हैं.
मैक्सिको सिटी के बाहर स्थित ग्लोबल आर्मर के वर्कशाप में कारों की लंबी कतार लगी है, जहां मैकनिकों की टीम पहले मंहगी कारों के हिस्सों को खोलकर अलग-अलग रखने का काम करते हैं, जिसके बाद उसमें बुलेट प्रूफ सिस्टम लगाने का काम शुरू किया जाता है.
लानोस कहते हैं कि साल 2006 - जबसे सरकार ने तस्करों के खिलाफ अभियान छेड़ा है, तबसे नए किस्म के खरीदार उनसे संपर्क करने लगे हैं.
वो कहते हैं, "साल 1996 से 2004 के दौरान बुलेट प्रूफ कार के मुख्य खरीददार निजी क्षेत्र से थे. लेकिन जबसे सरकार ने नशीली दवाओं के तस्करों के खिलाफ अभियान छेड़ा है, मेरे ख्याल से आधे खरीददार सरकारी विभागो से तालुक्क रखते हैं. साल 2004 के पहले जब हम सरकारी महकमों को ऐसी कारें बेचने की कोशिश करते थे तो वो कहते थे कि हमें उनकी जरूरत नहीं है. लेकिन जबसे लड़ाई शुरू हुई है, उन्हें सुरक्षा की जरूरत पड़ने लगी है."
सरकारी अभियान
मैक्सिको में नशीली दवाओं की तस्करी से संबंधित हिंसा में हर साल सैकड़ो लोगों की मौत हो जाती है.
तस्करी के क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए तस्कर गुटों में अक्सर खूनी संघर्ष होते रहते हैं. जिसमें कई बार वैसे लोगों की मौत भी हो जाती है जिनका इससे सीधे-सीधे कोई लेना देना नहीं होता है.
लेकिन ग्लोबल आर्मर जैसी कंपनियों की सारी कमाई बुलेट प्रूफ कार की बिक्री से ही नहीं हो रही बल्कि उनमें से कई के पास पुलिस को हथियार सप्लाई करने का लाइसेंस भी है.
देश के कई राज्यों में, जो तस्करी के गढ़ माने जाते हैं, वहां बड़े पैमाने पर पुलिस को हथियारो की जरूरत पड़ रही है.
ऐसी कई कंपनियां 'टाईगर' नाम की बख्तरबंद गाड़ियां भी सप्लाई करती हैं. ये वाहन अमरीका में तैयार की जाने वाली हमवी के साईज की होती है और उनमें इसराइली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है.
अमरीका सेना टाईगर का इस्तेमाल अफगानिस्तान जैसे स्थानों पर करती रही हैं.
ऐसे वर्कशाप में प्रयोगशालाएं भी होती हैं जहां सिस्टम लगाए जाने के बाद बलिस्टिक टेस्ट किया जाता है.

























