क़ुरैशी और पीपीपी के बीच मतभेद

क़ुरैशी
इमेज कैप्शन, शाह महमूद क़ुरैशी के अपने पार्टी नेतृत्व से मतभेद उस वक़्त सामने आए जब उन्होंने नए मंत्रिमंडल में शपथ ग्रहण नहीं किया.
    • Author, ऐजाज़ महर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
  • प्रकाशित

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के अपने सत्ताधारी दल पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व से मतभेद बढ़ गए हैं.

शाह महमूद क़ुरैशी और राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के बीच मतभेद की पहली मीडिया को भनक उस वक़्त पड़ी जब पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में नए मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में देरी हुई.

कार्यक्रम के अनुसार 23 मंत्रियों को शपथ दिलाए के लिए कुर्सियाँ लगाई गई थी और शपथ ग्रहण समारोह निर्धारित समय से 25 मिनट देरी से शुरु हुआ था. दरअसल शाह महमूद क़ुरैशी ने शपथ ग्रहण करने से इंकार कर दिया था.

राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने विदेश मंत्री का पद शाह महमूद क़ुरैशी को देने के बजाए उन्हें पानी और बिजली का मंत्रालय देने का प्रस्ताव दिया जो शाह महमूद क़ुरैशी ने ठुकरा दिया.

रेमंड डेविड मामला

स्थानीय मीडिया में बाद में शाह महमूद क़ुरैशी के हलावे से यह बयान सामने आया कि उन्हें लाहौर में पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या करने वाले अमरीकी अधिकारी के मामले की वजह से राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी उन्हें विदेश मंत्री नहीं बनाना चाहते.

जिस के बाद नई सूचना एवं प्रसारण मंत्री डॉक्टर आशिक़ फ़िरदौस, क़ानून मंत्री बाबर आवाण, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ और अन्य पार्टी के नातओं ने बयान दिया कि अदालत की ओर बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के मामले में परवेज़ मुशर्रफ़ की गिरफ़्तार की वारंट जारी करने पर शाह महमूद क़ुरैशी ने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुआ.

कुछ पार्टी नातओं ने उन्हें फ़ारूक़ लिग़ारी क़रार दिया है. फ़ारुक़ लिग़ारी को बेनज़ीर भुट्टो ने राष्ट्रपति बनाया और उन्होंने बाद में अपनी ही सरकार को 1996 में भ्रष्टाचार के आरोपों में बर्ख़ास्त कर दिया था.

फ़ारुक़ लिग़ारी बाद में पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की समर्थक पार्टी मुस्लिम लीग क्यू में शामिल हो गए थे.

क़ुरैशी
इमेज कैप्शन, पीपी नेताओं के अनुसार क़ुरैशी ने कई मुद्दों पर राष्ट्रपति भवन के बजाए आईएसआई की राय को महत्व दिया.

शाह महमूद क़ुरैशी को विदेश मंत्री पद से उस समय हटाया गया है जब भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की है.

आईएसआई के क़रीब

दूसरी ओर रेमंड डेविस के मामले पर पाकिस्तान के अमरिका के साथ संबंध ख़राब हो गए हैं.

पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व ने अभी तक किसी को भी विदेश मंत्री का पद नहीं सौंपा है और फिलहाल विदेश मामलों की राज्यमंत्री हिना रब्बानी खर मंत्रालय के कामकाज को देख रही हैं.

पीपुल्स पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बहुत सारे मुद्दों पर शाह महमूद क़ुरैशी राष्ट्रपति भवन के बजाए ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई की राय को तरजीह देते थे.

पीपुल्स पार्टी के नेता मानते हैं कि शाह महमूद क़ुरैशी ने राष्ट्रपति भवन से मतभेद कर अपने आप को नुक़सान पहुँचाया है.

लेकिन कुछ जानकार मानते हैं कि शाह महमूद क़ुरैशी का पीपुल्स पार्टी से अलग होने से पार्टी के लिए बहुत बड़ा नुक़सान है क्योंकि दक्षिण पंजाब और सिंध के कुछ इलाक़ों में उनका अच्छा ख़ासा प्रभाव है.