पाक सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी की याचिका खारिज़ की

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट
इमेज कैप्शन, गिलानी पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे
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पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की अवमानना के मामले में अग्रिम याचिका खारिज़ कर दी है.

गिलानी पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति आसफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए स्विस अधिकारियों से आग्रह न करके अदालत की अवमानना की है.

प्रधानमंत्री गिलानी 13 फ़रवरी को अदालत में पेश होंगे. आरोप साबित होने पर उन्हें अपना पद छो़ड़ना पड़ सकता है और उन्हें जेल भी हो सकती है.

प्रधानमंत्री गिलानी 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे और अदालत को बताया था कि पाकिस्तान के संविधान के तहत राष्ट्रपति ज़रदारी पर कोई मामला नहीं चलाया जा सकता.

जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील ख़ारिज़ होने से सरकार और न्यायपालिका के बीच गतिरोध और गहरा जाएगा.

टिप्पणी

इससे पहले पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के लिए स्विस अधिकारियों को लिखें तो उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला ख़त्म हो जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामले में उनकी अग्रिम याचिका की सुनवाई के दौरान दी.

गिलानी
इमेज कैप्शन, अपील ख़ारिज़ होने से सरकार और न्यायपालिका के बीच गतिरोध गहरा सकता है

अदालत ने कहा कि अगर गिलानी राष्ट्रपति आसिफ़ ज़रदारी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के लिए स्विस अधिकारियों को लिखें तो उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला भी वापस ले लिया जाएगा.

जस्टिस साक़िब निसार ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री का यही रैवया बरक़रार रहा तो पूरा सिस्टम ख़तरे में पड़ सकता है.

अदालत ने प्रधानमंत्री के वीकल ऐतेज़ाज़ एहसन से कहा कि वह शुक्रिवार 11 बजे तक अपने दलील पूरे करें और उस के बाद फ़ैसला सुनाया जाएगा. बाद में अदालत ने सुनाई शुक्रवार तक के लिए स्थागित कर दी.

याचिका

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना के मामले में अग्रिम याचिका दायर की थी. बताया जा रहा था कि उन्होंने ये याचिका इसलिए दायर की थी क्योंकि उन्हें आशंका थी कि अदालत उनके ख़िलाफ़ अभियोग तय कर सकती है.

उस अर्ज़ी में अदालत से अनुरोध किया गया था कि याचिका पर फ़ैसला होने तक दो फ़रवरी के अदालती फ़ैसले पर अमल न किया जाए. ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय खंडपीठ ने दो फ़रवरी को अदालत की अवमानना करने के आरोप में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी पर अभियोग शुरू करने का फ़ैसला लिया था.

अदालत ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को 13 फ़रवरी को पेश होने का आदेश भी दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को कई नेताओं को मिली आम माफ़ी के मामले में प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया था.