पृथ्वी पर था विशाल कीड़ों का साम्राज्य

जीवाश्मों और पुराने अवशेषों का अध्ययन कर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं की डायनासोर के पृथ्वी पर सफाए के बाद पृथ्वी पर मौजूद अन्य छोटे जीव अपने आकार में विशाल होते गए और उनकी जगह ली.
वैज्ञानिकों के अनुसार करीब साढ़े छह करोड़ साल पहले डायनासोर का अंत हुआ. इसके बाद लगभग ढाई करोड़ साल तक पृथ्वी पर उन स्तनधारी कीड़ों और जीवों का साम्राज्य रहा जो एक किलो से बढ़कर टनों के वज़नी दैत्य में परिवर्तित हो गए.
विशालकाय घोड़ों और हाथियों के से आकार वाले ये जीव मूल रुप से कीड़े-मकोड़े थे लेकिन अपने बढ़ते आकार की बदौलत इस ग्रह पर राज करने लगे.
इन जीवों को ‘इंडीकोथीरियम’ और ‘डायनोथीरियम’ का नाम दिया गया है.
भोजन की किल्लत
हालांकि कुछ समय बाद कीड़ों का ये विकास यहीं रुक गया. इसकी कई वजह थीं.
वैज्ञानिकों के अनुसार कि स्तनधारियों के लिए ज़रूरी है कि वो अपने शरीर का तापमान स्थिर रखें और ये जीव बहुत ज़्यादा गर्म हो जाते थे.
दूसरी वजह यह रही कि इनके बढ़ते आकार और बढ़ती भूख की वजह से धरती पर भोजन की किल्लत हो गयी.
मनुष्य का विकास
इन कारणों से कीड़ों का आकार छोटा होना शुरू हुआ.
अध्यन दल की नेता प्रोफ़ेसर फ़ेलिसा स्मिथ मेकिसको यूनीवर्सिटी में अध्यापिका हैं. उनका कहना है कि कीड़ों के इतना बढ़ जाने के पीछे कारण यही था कि वो सही समय पर सही जगह मौजूद थे.
इन कीड़ों के छोटे होने के बाद बड़े बालों वाले हाथीनुमा मैमथ ने धरती पर जगह बनाई.
इस तरह विकास की श्रंखला में डायनासोर के बाद आए विशाल कीड़े, जिनके बाद आए मैमथ और उनकी जगह आखिरकार मनुष्यों ने ली.

























