रेडियोधर्मी पानी को लेकर चिंताएँ

जापान का फूकूशीमा परमाणु संयंत्र
इमेज कैप्शन, फूकूशीमा परमाणु संयंत्र के पास एक पाइप में रिसाव हो गया था
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जापान के फूकूशीमा परमाणु संयंत्र से रेडियोधर्मी विकिरण के समुद्री पानी में दाख़िल होने पर चीन की चिंताओं से इस समस्या की गंभीरता सामने आई है.

साथ ही रेडियोधर्मी विकिरण के समुद्री वातारण और इंसानों के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव की गंभीरता का भी कुछ अंदाज़ा हुआ है.

सामान्य हालात में परमाणु संयंत्र में समुद्री जल का इस्तेमाल इसे ठंडा करने के लिए प्रमुख साधन के तौर पर किया जाता है.

समुद्री जल रेडियोधर्मी पदार्थ में नहीं घुलता है लेकिन परमाणु संयंत्र के भीतर चलता है जिसके ज़रिए वो रिएक्टरों की गर्मी दूर करता है.

इस प्रक्रिया के बाद वो पानी वापिस समुद्र में फेंक दिया जाता है.

परीक्षणों से पता चला है कि जापान में मार्च में आए भूकंप और सूनामी में बुरी तरह प्रभावित हुए परमाणु संयंत्रों के बाद रेडियोधर्मी पदार्थ समुद्र में पहुँच गया है.

संभावना जताई गई है कि ऐसा उन पाइपों में रिसाव के ज़रिए हुआ होगा जो समुद्र के नज़दीक हैं. हालाँकि इन पाइपों की पिछले सप्ताह मरम्मत कर दी गई थी.

लेकिन अब रेडियोधर्मी पानी के जानबूझकर समुद्र में बहाव पर चिंता जताई जा रही है.

परमाणु संयंत्र चलाने वालों ने फ़ैसला किया है कि ये क़दम संयंत्रों को ठंडा रखने और उनकी रफ़्तार धीमी करने के लिए ज़रूरी है. कम से कम तीन रिएक्टर फिलहाल बहुत गर्म हो चुके हैं.

कितनी चिंता?

इस चिंता पर ब्रिटेन के ब्राइटन विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफ़ेसर एलिसन ब्रूस का कहना है कि चूँकि ईंधन छड़ें प्रभावित हुई हैं इसलिए रिएक्टरों को ठंडा करने वाला पानी भी अंदरूनी उपकरणों के संपर्क में आ गया है जिससे वो और रेडियोधर्मी हो रहा है.

जापान का फूकूशीमा परमाणु संयंत्र
इमेज कैप्शन, फूकूशीमा परमाणु संयंत्र सूनामी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है

प्रोफ़ेसर एलिसन ब्रूस का कहना था, "परमाणु संयंत्र परिसर में ही हालाँकि ठंडी करने की प्रक्रिया के बाद निकले पानी को फिर से प्रयोग योग्य बनाने के लिए उनके पास अलग संयंत्र हैं लेकिन वो उस संयंत्र से ऐसा पानी बाहर निकालकर समुद्र में डाल रहे हैं जिसमें निम्न स्तर का विकिरण हो चुका है. ये प्रक्रिया इसलिए की जा रही है ताकि संयंत्र में मौजूद ज़्यादा विकिरण वाले पानी की समस्या से निपटा जा सके.

बीबीसी संवाददाता जूलियन सिडल का कहना है कि जो पानी समुद्र में भेजा जा रहा है उसमें विकिरण का स्तर बहुत कम होना चाहिए और उससे कोई नुक़सान नहीं होना चाहिए लेकिन इसके दीर्घकालीन प्रभावों और नुक़सानों के लिए लेकर अनेक सवाल और चिंताएं फिर भी बरक़रार हैं.