जनसंख्या और खपत पर काबू पाने का आग्रह

दुनिया के सौ से ज्यादा विज्ञान संस्थाओं ने विश्व नेताओं से अपील की है कि वो रियो में होने वाले पर्यावरण सम्मेलन में जनसंख्या और खपत कम करने के लिए कदम उठाए.
एक साझा बयान में कहा गया कि इन मुद्दों पर पहले की असफलता की वजह से प्रकृति और आनेवाले वंशों को ख़तरा हो सकता है.
इन विज्ञान संस्थाओं में ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी भी शामिल है.
विज्ञान अकादमियों का इस तरह साथ आना ये भी दर्शाता है कि विकसित और विकासशील देश एक ऐसे मुद्दे पर साथ आ रहे हैं जो पहले दोनों को बांटता रहा है.
इन अकादमियों का कहना है कि समय कठिन से कठिन होता जा रहा है.
मुश्किल
बयान में कहा गया है, "विश्व की जनसंख्या अभी सात अरब के आसपास है और ज्यादातर अनुमानों के मुताबिक 2050 तक ये आठ अरब से 11 अरब के बीची होगी."
अकादमियों ने कहा कि वैश्विक खपत का स्तर सबसे उपर आ गया है और इसकी बड़ी वजह है विकसित देशों में प्रति व्यक्ति खपत का बड़ा स्तर. अगर दुनिया के सबसे गरीब एक अरब लोगों को जरूरी खाना-पीना और उर्जा की सुविधा देनी है तो विकसित देशों को अपनी खपत कम करनी होगी.
उनका कहना है कि ऐसा बिना संपन्नता कम किए हुए करना संभव है अगर अलग आर्थिक मॉडल का प्रयोग किया जाए.
लेकिन इस तरह का बदलाव नहीं करने से मानव जाति के लिए ख़तरनाक हालात पैदा हो जाएंगे.
ये वक्तव्य रॉयल सोसाइटी की एक रिपोर्ट पर आधारित है जिसमें बढ़ती जनसंख्या पर चिंता जताई गई है.
अगले हफ्ते रियो में होने वाली बैठक की तैयारियों के लिए देंशो में बातचीत हो रही है जो शुक्रवार तक चलेगी.

























