यूएन की श्रीलंका पर महत्वपूर्ण वार्ता

संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी लिन पास्को बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत के लिए दो दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका पहुंचने वाले हैं.
तमिल शरणार्थियों की रिहाई की धीमी गति को लेकर विश्व समुदाय अपनी चिंता ज़ाहिर करता रहा है.
युद्ध समाप्त होने के चार महीने बाद भी कई तमिल लोग सरकारी शिविरों में बंधक बने हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, यूएन के राजनीतिक मामलों के प्रमुख पास्को श्रीलंका सरकारके साथ ‘नाज़ुक मामलों’ पर बातचीत करेंगे.
श्रीलंका रवाना होने से पहले न्यूयॉर्क में पास्को ने कहा, ‘हम कार्य की धीमी गति को लेकर चिंतित हैं.’
उन्होंने श्रीलंका सरकार के उन समझौतों का भी हवाला दिया जो मई में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के श्रीलंका दौरे के दौरान मानवाधिकार क़ानूनों के उल्लंघन की ज़िम्मेदारी और शरणार्थी शिविरों से तमिलों के पुनर्वास की बातें कही गई थीं.
सरकार बहुत से लोगों को शिविरों से निकालकर उनके घर भेज चुकी है, फिर भी अभी बहुत से लोग वहां फंसे हैं.
उन्होंने मानवाधिकार संबंधी मामलों की जांच के यूरोपीय संघ के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा, ‘मानवाधिकार संबंधी मामले हमारे एजेंडे में नहीं है.’
पास्को ने कहा कि वो यूनीसेफ़ के प्रवक्ता को हटाने संबंधी श्रीलंका सरकार के फैसले पर भी बातचीत करेंगे जिन पर आरोप है कि वो तमिल विद्रोहियों की तरफ़दारी कर रहे थे.
साथ ही पास्को संयुक्त राष्ट्र के दो श्रीलंकाई कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के मुद्दे को भी उठाएंगे.
पिछले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा था कि उन्हें श्रीलंका सरकार ने जून महीने में ग़ायब कर दिया था और आरोप ये भी हैं कि इन कर्मचारियों के साथ अधिकारियों ने बुरा बर्ताव किया.

























