कौन हैं झलनाथ खनाल?

झलनाथ खनाल
इमेज कैप्शन, झलनाथ खनाल के लिए समर्थक दलों के बीच समन्वय स्थापित करना आसान काम नहीं होगा
    • Author, जोआना जॉली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काठमांडू
  • प्रकाशित

सात माह के लंबे अंतराल के बाद नेपाल की संविधान सभा के सदस्यों ने गुरूवार को झलनाथ खनाल को देश का नया प्रधानमंत्री चुन लिया है.

कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनीफ़ाईड मार्कसिस्ट लेनिनिस्ट (सीपीएन-यूएनएल) के अध्यक्ष झलनाथ खनाल को नेपाल के सबसे बड़े राजनीतिक दल माओवादियों का भी सर्मथन हासिल है.

नेपाल के इलाम ज़िले में 1950 में जन्में 60 वर्षीय खनाल देश के 34वें प्रधानमंत्री हैं. खनाल क़रीब तीन दशकों से राजनीति में सक्रिय रहे हैं.

साल 2008 में राजतंत्र के ख़ात्मे के बाद देश में हुए चुनावों में वो अपने गृह ज़िले से ही संविधान सभा के सदस्य चुने गए थे.

पिछली माधव नेपाल सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रहे झलनाथ खनाल ने बाद में पार्टी के अध्यक्ष बन गए थे.

प्रधानमंत्री पद के चुनाव के लिए हुई पिछली कई कोशिशों में उनका नाम कई बार उम्मीदवार के तौर पर आया था.

चुनाव से पहले संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल के राजनितिज्ञों को साथ मिलकर आगे बढ़ने की ज़रूरत है नहीं तो देश एक बार फिर संकट में पड़ सकता है.

उनका कहना था कि उनकी सरकार संविधान निर्माण का काम वक्त रहते पूरा करेगी.

संविधान तैयार किए जाने की अंतिम तारीख़ 28 मई है.

लेकिन खनाल को इसे पूरा करने से पहले 19,000 माओवादी लड़ाको के मामले से भी निपटना होगा.

सीपीएन-यूएनएल मुख्यालय
इमेज कैप्शन, सीपीएन-यूएनएल के भीतर माओवादियों से सर्मथन लेने के मुद्दे पर मतभेद हैं

दिक्कतें

वर्ष 2006 के एक समझौते के तहत माओवादी लड़ाकों को या तो सेना में शामिल किया जाना है या वो सामान्य नागिरकों की तरह जीवन बसर करेंगें.

मगर इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों में भारी मतभेद है.

जहाँ माओवादी इन लड़ाकों को सेना में भर्ती करवाने की मांग पर अड़े हैं वहीं दूसरे दलों का कहना है कि ऐसा करने से सेना की निष्पक्षता पर कई तरह के नए सवाल उठ खड़े होंगें.

टीकाकारों का ये भी कहना है कि खनाल की अपनी पार्टी के भीतर ही एक धड़ा माओवादियों से किसी तरह की सुलह के ख़िलाफ़ है.

साथ ही ये भी साफ़ नहीं है कि देश का एक प्रमुख दल नेपाली कांग्रेस पार्टी खनाल सरकार में शामिल होगा या नहीं.