IPL 2020: धोनी का 'मास्टर प्लान', 'सर' जडेजा का जादू और चेन्नई का 'बाउंसबैक'

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- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
खिलाड़ी के जलवे को सलाम तभी होता है जब उनके प्रदर्शन का 'जादू' टीम को जीत दिलाए.
चेन्नई सुपर किंग्स के स्टार ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा भी शायद यही सोच रहे होंगे.
सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ 25 रन की नाबाद पारी और गेंदबाज़ी में एक विकेट लेने वाले जडेजा मैन ऑफ़ द मैच चुने गए.
मंगलवार रात चेन्नई की हैदराबाद पर 20 रन की जीत के वो सबसे बड़े हीरो माने गए. मैदान पर भी और सोशल मीडिया पर भी. जहां फैन्स हर उम्दा प्रदर्शन को उनके नाम के आगे 'सर' का ख़िताब लगाकर सराहते हैं.
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तब, जडेजा को इसी टीम के खिलाफ़ करीब 11 दिन पहले का अपना प्रदर्शन जरूर याद आया होगा.

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तारीख थी 2 अक्टूबर
मैदान दुबई का था. मुक़ाबला सनराइज़र्स हैदराबाद से ही था और रविंद्र जडेजा के बल्ले से 50 रन निकले थे. वो जी-जान लगाकर लड़े थे लेकिन टीम सात रन से मैच हार गई थी.
याद कोलकाता के ख़िलाफ मिली हार की कसक भी हो आई होगी.

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तारीख थी 7 अक्टूबर
मैदान अबु धाबी का था. आखिरी ओवर में तब भी जडेजा का बल्ला गरजा था. सिर्फ़ आठ गेंदों में उन्होंने नाबाद 21 रन बना दिए थे. उस रात भी उन्होंने तीन चौके और एक छक्का जड़ा था लेकिन टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के ख़िलाफ़ भी 10 रन से हार गई थी. उस रात भी उन्होंने एक गज़ब कैच पकड़ा था, लेकिन बात आई गई हो गई.
और फिर आई वो तारीख जब सबकुछ सही हुआ

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13 अक्टूबर
चेन्नई के आठवें मैच में छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी के लिए आए जडेजा ने तीन चौके और एक छक्का जड़ा. 10 गेंद में नाबाद 25 रन बनाए. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने गेंद थमाई तो जॉनी बेयरस्टो का मिडिल स्टंप उड़ा दिया. दो उम्दा कैच पकड़े.
और सबसे बढ़कर टीम को जीत मिली और वो मैन ऑफ़ मैच चुने गए.
हैदराबाद के ख़िलाफ दो अक्टूबर को खेले गए मैच और केकेआर के ख़िलाफ़ हुए मैच में भी जडेजा ने जीत के लिए पूरा ज़ोर लगाया था. अगर हाथ में दिखते उन दो मैचों में जीत न फिसली होती तो आईपीएल-13 में चेन्नई की टीम छठे पायदान नहीं बल्कि टॉप की टीमों में होती.
और लगातार टीम के लिए योगदान देने वाले जडेजा को खुशी का लम्हा हासिल करने के लिए लंबा इंतज़ार न करना होता.
जब ये लम्हा नसीब हुआ तो जडेजा बोले, "मैं बहुत खुश हूं. जब टीम पर दबाव हो और आप बैट और बॉल से प्रदर्शन कर पाएं तो आप खुश होते हैं. मुझे फ़ील्डिंग करने में बहुत मज़ा आता है और मैच हमेशा टीम के लिए कैच पकड़ने की कोशिश में रहता हूं."

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चल गया 'मास्टर प्लान'
कमाल करने की कोशिश में चेन्नई के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी लगे दिखते हैं. लेकिन आईपीएल-13 में उनके प्लान कम ही कामयाब हुए हैं.
चेन्नई की टीम आठ मैच खेल चुकी है. इनमें से पहला और आठवां मैच उसके नाम रहा. बीच के छह मैचों में से सिर्फ़ एक में जीत मिली.
और जब-जब टीम मैदान में पिटी, सबसे ज़्यादा हमले कप्तान धोनी ने ही झेले. उम्र का सवाल उठा. बैटिंग ऑर्डर पर सवाल उठा. फॉर्म पर सवाल उठा. फिटनेस पर सवाल उठा. टीम चयन पर सवाल उठा. रणनीति पर सवाल उठा.
धोनी ने हैदराबाद के ख़िलाफ़ मंगलवार को दिखाया कि वो हर सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश में है. विकेट कीपर के तौर पर तो वो हर मैच में ख़ुद को साबित कर ही रहे हैं.

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102 मीटर लंबा छक्का
हैदराबाद के ख़िलाफ़ 13 गेंद की पारी में उन्होंने फॉर्म में लौटने की बेताबी दिखाई. उनके बल्ले से रन तो सिर्फ़ 21 निकले लेकिन इस दौरान 19वें ओवर में टी नटराजन की गेंद पर लॉन्ग आन के ऊपर से उन्होंने जो छक्का जड़ा, उसने देखने वालों का दिल जीत लिया. 102 मीटर लंबा छक्का. गेंद के बल्ले से टकराने के बाद जो आवाज़ निकली, वो वैसी ही थी, जैसी धोनी की टॉप फॉर्म के दिनों में सुनाई देती थी.
कप्तानी में उन्होंने हमेशा की तरह कई ऐसे प्रयोग किए जो तमाम लोगों को अटपटे लगे. मसलन सैम करन से ओपनिंग करना. पीयूष चावला से 16वें ओवर तक गेंदबाज़ी न कराना. शार्दुल ठाकुर से सिर्फ़ दो ओवर गेंदबाज़ी करना. आखिरी ओवर में ड्वेन ब्रावो को गेंद थमाना.

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लेकिन उनके ज़्यादातर फ़ैसले सही नतीजे देने वाले रहे यानी माही का मास्टर प्लान हिट रहा.
ओपनिंग में आए सैम करन बड़ी पारी तो नहीं खेल सके लेकिन चौथे ओवर में उन्होंने 22 रन बनाकर पावरप्ले में एक हद तक चेन्नई को बढ़त दिला दी. पीयूष चावला को किनारे रखने से टीम को कोई घाटा नहीं हुआ और शार्दुल और ब्रावो उम्मीदों पर खरे उतरे. ब्रावो ने अहम मौके पर दो विकेट लिए. आखिरी ओवर में सिर्फ़ एक रन दिया.
इस प्रदर्शन से धोनी भी खुश दिखे. उन्होंने कहा, "ये गेम परफ़ेक्ट के करीब था. एक दो ओवर बेहतर हो सकते थे लेकिन ये बहुत अच्छा गेम था."
धोनी की टीम अब छठे पायदान पर है. चौथे नंबर पर मौजूद कोलकाता और पांचवें नंबर की टीम हैदराबाद से उसका फ़ासला ज़्यादा नहीं है और इस स्थिति ने प्लेऑफ़ की रेस को बहुत दिलचस्प बना दिया है.
हालांकि, धोनी के मुताबिक फिलहाल उनका ध्यान नंबरों पर नहीं है. "तालिका की तरफ देखने का कोई मतलब नहीं है. हमारी नज़र इस पर होगी कि हम क्या बेहतर कर सकते हैं."

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वार्नर- फेल- हैदराबाद फेल?
क्या कप्तान डेविड वार्नर को सस्ते में रोककर हैदराबाद को हराना आसान हो जाता है?
आठ में से जिन पांच मैचों में हैदराबाद को हार मिली है, उनमें से दो में यही पैटर्न दिखा है. राजस्थान के ख़िलाफ़ मैच में हैदराबाद की हार की वजह राहुल तेवतिया और रियान पराग के बेमिसाल प्रदर्शन था. ऐसे में कहा जा सकता था कि टीम ने जो चार मैच गंवाए, उनमें से पचास फीसदी यानी दो मैचों में हार की वजह कप्तानी की बल्ले से नाकामी थी.
कप्तान बैंगलोर के ख़िलाफ़ फेल हुए टीम पिट गई और चेन्नई के ख़िलाफ़ भी यही कहानी दिखी. केन विलियमसन ने चेन्नई के ख़िलाफ़ 57 रन जरूर बनाए लेकिन वो कभी टीम को जीत दिलाने के लिए खेलते नहीं दिखे.
हैदराबाद के लिए फ़िक्र की वजह ये भी हो सकती है कि चेन्नई और राजस्थान के बल्लेबाज़ों ने उनके नंबर एक गेंदबाज़ राशिद ख़ान को निशाने पर लेने में हिचक नहीं की. बाकी विरोधी भी इससे संकेत ले सकते हैं.
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