राष्ट्रमंडल खेलों की जाँच के आदेश

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) वीके शुंगलू की अध्यक्षता में राष्ट्रमंडल खेलों की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है.
ये समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपेगी.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बीबीसी को इस बात की पुष्टि की है.
समिति को खेल के आयोजन और संचालन से संबंधित सभी कथित गड़बड़ियों की जांच के अधिकार दिए गए हैं. ये समिति खेल से जुड़े पैसों के लेन देन की जांच कर सकती है.
मसलन प्रसारण अधिकार के वितरण से लेकर विभिन्न कार्यों के जो ठेके दिए गए और जिन पर पहले से ही बहुत सवाल उठ रहे हैं, समिति उनकी जाँच कर सकती है.
जाँच शुरू
दूसरी ओर समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार खेलों के समापन के साथ ही मौजूदा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की जांच शुरू हो चुकी है.

इसके पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने इससे पहले भी अपनी अंतरिम रिपोर्ट में अनेक तरह की ख़ामियों पर सवाल उठाए थे और अगस्त में प्रधानमंत्री कार्यालय और खेल मंत्रालय को मूल्यांकन रिपोर्ट सौंपी थी.
इसमें खेलों से जुड़ी सभी परियोजनाओं की धीमी रफ़्तार से काम करने की बात उठाई गई थी.
हालांकि वर्ष 2003 में खेलों की मेजबानी भारत को दी गई लेकिन 2006 तक इस संबंध में कोई काम नहीं हुआ.
राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में ठेकों में भाई-भतीजावाद, उपकरणों को किराए पर लेने के लिए ऊँचा मूल्य देने जैसे भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी पिछली निरीक्षण रिपोर्ट में प्रसारण अधिकार और प्रायोजन समझौतों को लेकर राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति की आलोचना की थी.

























