भारतीय खिलाड़ियों का परिचय

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विश्व कप के लिए भारत की 15 सदस्यीय टीम में तीन विशेषज्ञ स्पिनर रखे गए हैं. टीम में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अलावा कोई भी अतिरिक्त विकेटकीपर नहीं है. आइए नज़र डालते हैं इन खिलाड़ियों पर....

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1. महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान)

धोनी

जन्म: 7 जुलाई, 1981 (राँची) टीम: भारत, बिहार, झारखंड, चेन्नई सुपर किंग्स, एशिया इलेवन पहला टेस्ट: दिसंबर 2005 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (चेन्नई) पहला वनडे: दिसंबर 2004 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ (चटगाँव) पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग) टेस्ट: 54, रन: 2925, सर्वश्रेष्ठ: 148, औसत: 40.06, शतक: 04, कैच: 148 वनडे: 175, रन: 5801, सर्वश्रेष्ठ: 183, औसत: 49.58, शतक: 07, कैच: 172 टी-20: 26, रन: 451, सर्वश्रेष्ठ: 46, औसत: 26.52, शतक: 00, कैच: 11

क्रिकेट की दुनिया में मिस्टर कूल के नाम से प्रसिद्ध महेंद्र सिंह धोनी भारत के कप्तान हैं और 174 वनडे मैचों में उनका औसत 50 रन के क़रीब है. वे एक ऐसे शहर से क्रिकेट की दुनिया में आए, जहाँ से पहले कोई नहीं आया था. क्योंकि छोटे शहरों के लोगों का टीम इंडिया में शामिल होना अब भी बड़ी बात है. उन्हें विकेट के पीछे के हुनर से ज़्यादा आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए टीम में शामिल किया गया और उन्होंने अपने पाँचवें ही मैच में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 148 रनों की यादगार पारी खेलकर न सिर्फ़ भारत को मैच जिताया बल्कि क्रिकेट प्रेमियों का भरोसा भी जीत लिया. उसी साल धोनी ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ 183 रन की एक और यादगार पारी खेली. समय के साथ उनकी विकेट कीपिंग भी सँवरती गई और बैटिंग में भी परिपक्वता आई. छोटे शहर से निकले इस खिलाड़ी के मैदान पर स्वभाव ने उसे भारत का कप्तान बना दिया. धोनी के नेतृत्व में भारत टेस्ट क्रिकेट में पहले स्थान पर पहुंचा है तो वनडे में शीर्ष की लड़ाई लड़ रहा है. उनके नेतृत्व में भारत ने 20-20 क्रिकेट के पहले ही संस्करण में ख़िताबी जीत हासिल की. आईपीएल में वह चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान हैं और उन्होंने न सिर्फ़ चेन्नई को ख़िताबी जीत दिलाई बल्कि 2010 में चैम्पियंस लीग में भी जीत दिलाई. मैदान में किसी भी स्थिति में वह कूल रहते हैं मैदान के बाहर उनकी शादी सादगी से हुई. वह विज्ञापनकर्ताओं की पहली पसंद हैं.

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2. वीरेंदर सहवाग (उप कप्तान)

सहवाग

जन्म: 20 अक्तूबर, 1978 (दिल्ली) टीम: भारत, दिल्ली, लेस्टरशायर, डेल्ही डेयरडेविल्स पहला टेस्ट: नवंबर 2001 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (ब्लूमफोंटिन) पहला वनडे: अप्रैल 1999 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (मोहाली) पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग) टेस्ट: 87, रन: 7694, सर्वश्रेष्ठ: 319, औसत: 53.43, शतक: 22, विकेट: 39 वनडे: 228, रन: 7380, सर्वश्रेष्ठ: 146, औसत: 34.64, शतक: 13, विकेट: 92 टी-20: 14, रन: 313, सर्वश्रेष्ठ: 68, औसत: 24.07, शतक: 00, विकेट: 00

टेस्ट क्रिकेट की दुनिया में किसी भी बल्लेबाज़ से ज़्यादा तेज़ी के साथ रन बटोरने के लिए मशहूर वीरेंदर सहवाग टीम इंडिया के उप कप्तान हैं. वह अपनी शैली की बल्लेबाज़ी के माहिर हैं. चौके-छक्के लगाना उनके लिए सबसे आसान चीज़ लगती है. सचिन के जैसा बल्लेबाज़ बनने की ख़्वाहिश रखने वाले भारत के हज़ारों युवा क्रिकटों में से एक थे दिल्ली के नजफ़गढ़ के सहवाग. जब उन्होंने अपना पहला शतक लगाया उस मैच में तेंदुलकर नहीं खेल रहे थे लेकिन शैली में सहवाग ने एक-एक स्ट्रोक तेंदुलकर की तरह लगाए. लेकिन अपनी आक्रामकता के कारण वह तुरंत ही तेंदुलकर से भिन्न नज़र आने लगे. जब सहवाग ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मुल्तान में तिहरा शतक लगाया तो उन्हें मुल्तान के सुल्तान के नाम से भारत के क्रिकेट प्रेमियों ने याद किया. कम फ़ुटवर्क के साथ ऑफ़ साइड में स्क्वेयर उड़ती हुई शॉट उनसे ज़्यादा शायद कोई नहीं लगाता हो. भारत की ओर से वह टेस्ट में सबसे ज़्यादा दोहरा शतक बनाने वाले खिलाड़ी हैं. वे तीसरा तिहरा शतक लगाने से चूक गए नहीं तो इतिहास में वह अकेले ऐसे खिलाड़ी होते. सारे गेंदबाज़ों के लिए सहवाग एक परीक्षा हैं क्योंकि उन्हें आउट करके ही ख़ामोश किया जा सकता है.

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3. गौतम गंभीर

गंभीर

जन्म: 14 अक्तूबर, 1981 (दिल्ली) टीम: भारत, दिल्ली, डेल्ही डेयरडेविल्स पहला टेस्ट: नवंबर 2004 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (मुंबई) पहला वनडे: अप्रैल 2003 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ (ढाका) पहला ट्वेन्टी 20: सितंबर 2007 में स्कॉटलैंड के ख़िलाफ़ (डरबन) टेस्ट: 38, रन: 3234, सर्वश्रेष्ठ: 206, औसत: 51.33, शतक: 09, विकेट: 00 वनडे: 105, रन: 3680, सर्वश्रेष्ठ: 150, औसत: 40.43, शतक: 09, विकेट: 00 टी-20: 23, रन: 621, सर्वश्रेष्ठ: 75, औसत: 28.22, शतक: 00, विकेट: 00

गौतम गंभीर की आईपीएल की नई नीलामी में सबसे ज़्यादा बोली लगी जो इस बात को दिखाता है कि दिल्ली के गौतम गंभीर इन दिनों कितने भरोसेमंद खिलाड़ी हैं. गंभीर क्रिकेट के हर संस्करण के लिए विश्वसनीय खिलाड़ी हैं. वह सहवाग की तरह तेज़ गति से रन बटोर सकते हैं. राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की तरह उनका डिफ़ेंस मज़बूत है और तेंदुलकर की तरह सावधानी के साथ रन जोड़ने के काम में लगे हुए हैं. हालांकि गंभीर ने संतोषजनक प्रदर्शन किया है लेकिन टीम इंडिया में उनकी जगह आने के बाद से निश्चित नहीं रही हैं. उन्हें 2007 की भारतीय विश्व कप टीम में जगह नहीं मिल सकी थी. बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज़ ने घरेलू क्रिकेट में ज़बरदस्त प्रदर्शन कर वापसी की. वनडे में शतक और टी-20 में अर्धशतक के बाद गंभीर को टेस्ट में वापस बुलाया गया और अगले 13 टेस्ट में गंभीर ने आठ शतक लगा कर अपनी स्थिति मज़बूत कर ली. 2009 में गंभीर को आईसीसी क्रिकेट ऑफ़ द ईयर चुना गया. गंभीर ने आईपीएल में दिल्ली की कप्तानी की है. उनके साथ पारी की शुरूआत करने वाले सहवाग का कहना है कि सुनील गावसकर के बाद से गंभीर भारत के सबसे अच्छे सलामी बल्लेबाज़ हैं.

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4. सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर

जन्म: 24 अप्रैल, 1973 (मुंबई) टीम: भारत, मुंबई, यॉर्कशायर, मुंबई इंडियंस पहला टेस्ट: नवंबर 1989 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (कराची) पहला वनडे: दिसंबर 1989 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (गुजरांवाला) पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग) टेस्ट: 177, रन: 14692, सर्वश्रेष्ठ: 248, औसत: 56.94, शतक: 51, विकेट: 45 वनडे: 444, रन: 17629, सर्वश्रेष्ठ: 200, औसत: 44.97, शतक: 46, विकेट: 154 टी-20: 01, रन: 10, सर्वश्रेष्ठ: 10, औसत: 10.00, शतक: 00, विकेट: 01

सचिन तेंदुलकर अपने समय के हर तरह से सबसे पूर्ण क्रिकेटर हैं और क्रिकेट इतिहास के सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. बल्लेबाज़ी का शायद ही कोई ऐसा रिकॉर्ड हो जो उनकी क्षमता से बाहर हो. तेंदुलकर निसंदेह दुनिया के सबसे लोकप्रिय क्रिकेटर हैं. उनकी बल्लेबाज़ी का हर आयाम अपने आप में एक मिसाल है. धैर्य, संयम, आक्रमण, सही गेंद का चुनाव, गेंद का प्लेसमेंट, गैप निकालना और सबसे बढ़कर क्रिकेट के प्रति समर्पण उनको बेमिसाल खिलाड़ी बनाता है. तेंदुलकर हर प्रकार के क्रिकेट के लिए किसी भी टीम की पहली पसंद हो सकते हैं. लंबा अनुभव, किसी भी परिस्थिति से निपटने की क्षमता भारत के लिए एक वरदान है. उनके पास वनडे और टेस्ट दोनों में सबसे ज़्यादा शतक है, सबसे ज़्यादा रन है. दुनिया का कोई भी गेंदबाज़ उनका विकेट लेने की ख़्वाहिश रखता है. दो विश्व कप में वे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे. वर्ष 2000 में वह पहले खिलाड़ी बने जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 50 शतक लगाए हों और इस विश्व-कप में उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वह अपना 100वां अंतरराष्ट्रीय शतक लगाएंगे. तेंदुलकर आईपीएल में मुंबई इंडियंस के कप्तान हैं लेकिन उन्होंने भारत की ओर से टी-20 न खेलने का फ़ैसला किया है.

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5. सुरेश कुमार रैना

सुरेश रैना

जन्म: 27 नवंबर, 1986 (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) टीम: भारत, उत्तर प्रदेश, चेन्नई सुपर किंग्स पहला टेस्ट: जुलाई 2010 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (कोलंबो) पहला वनडे: जुलाई 2005 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (दम्बुला) पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग) टेस्ट: 08, रन: 373, सर्वश्रेष्ठ: 120, औसत: 33.90, शतक: 01, विकेट: 06 वनडे: 109, रन: 2608, सर्वश्रेष्ठ: 116, औसत: 35.72, शतक: 03, विकेट: 07 टी-20: 19, रन: 509, सर्वश्रेष्ठ: 101, औसत: 33.93, शतक: 01, विकेट: 01

सुरेश रैना बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ हैं और वह भारत की नई पीढ़ी के बल्लेबाज़ों का नेतृत्व करते हैं जिनमें तेज़ी से रन बनाने की भी योग्यता है और क्रीज़ पर देर तक टिके रहने की भी. रैना की गिनती बेहतरीन क्षेत्र-रक्षक के तौर पर भी होती है. रैना को घायल युवराज सिंह की जगह टेस्ट टीम में शामिल किया गया और उन्होंने अपने पहले ही मैच में शतक लगाकर अपनी क्षमता का परिचय दे दिया. 100 से ज़्यादा वनडे मैच खेलने वाले रैना को 2007 की विश्व-कप टीम में शामिल नहीं किया गया था क्योंकि उन्होंने लगातार 15 मैचों में कोई बड़ा स्कोर यहां तक की अर्ध शतक भी नहीं लगया था. बहरहाल, घरेलू क्रिकेट में बेहतर प्रदर्शन के बाद उन्हें फिर से टीम में शामिल किया गया और रैना ने एशिया कप में दो शतक लगाकर अपनी स्थिति मज़बूत कर ली. वह आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं. वह चेन्नई के उन चार खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें टीम ने रोक लिया था. रैना की शैली और उनके खेलने के प्रति लगन को देखकर ये कहा जा सकता है कि अभी उनकी अच्छी पारियां बाक़ी है. विश्व-कप में मध्यक्रम बल्लेबाज़ों में उनसे काफ़ी उम्मीदें हैं. वह दाहिने हाथ के ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ भी हैं और धोनी ने उनसे पार्ट-टाइम गेंदबाज़ का काम भी लिया है.

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6. युवराज सिंह

युवराज सिंह

जन्म: 12 दिसंबर, 1981 (चंडीगढ़) टीम: भारत, पंजाब, यॉर्कशायर, किंग्स इलेवन पंजाब पहला टेस्ट: अक्तूबर 2003 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (मोहाली) पहला वनडे: अक्तूबर 2000 में कीनिया के ख़िलाफ़ (नैरोबी) पहला ट्वेन्टी 20: सितंबर 2007 में स्कॉटलैंड के ख़िलाफ़ (डरबन) टेस्ट: 34, रन: 1639, सर्वश्रेष्ठ: 169, औसत: 35.63, शतक: 03, विकेट: 08 वनडे: 263, रन: 7669, सर्वश्रेष्ठ: 139, औसत: 36.87, शतक: 12, विकेट: 89 टी-20: 23, रन: 567, सर्वश्रेष्ठ: 70, औसत: 31.50, शतक: 00, विकेट: 08

गेंद को सफ़ाई के साथ मारने में युवराज सिंह का जवाब नहीं लेकिन उसी हालत में जब वो लय में हों. युवराज सीमित ओवरों के ज़्यादा उपयोगी खिलाड़ी हैं. अच्छे क्षेत्ररक्षक के साथ पार्ट-टाइम स्पिनर हैं. उनके पिता ने भी भारत के लिए एक टेस्ट मैच खेल रखा है और उन्होंने ही युवराज को क्रिकेटर बनाने का फ़ैसला किया था. युवराज ने अपने दूसरे ही वनडे इंटरनेशनल में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक अच्छी पारी खेल कर टीम में अपनी जगह पुख़्ता कर ली. हालाँकि उसके बाद उनकी अच्छी पारी बहुत दिनों तक नहीं आई. लेकिन वह टीम में बने रहे. टी-20 के विश्व कप में 2007 में उन्होंने उस वक़्त एक यादगार पारी खेली जब इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड की छह गेंदों पर छह छक्के जड़े. पहले द्रविड फिर महेंद्र सिंह धोनी के साथ युवराज ने भारतीय मध्यक्रम को मज़बूती दी है. युवराज ने अभी तक कुल 12 शतक और 45 अर्धशतक लगाए हैं. टेस्ट में युवराज कोई ख़ास खेल नहीं दिखा सके और अच्छी तेज़ गति की स्विंग गेंदबाज़ी और अच्छी स्पिन के सामने उन्हें परेशानी होती है. अभी तक सिर्फ़ तीन शतक ही उनके खाते में है. इस विश्व-कप में मध्यक्रम को मज़बूती देने में उनसे बड़ी भूमिका की उम्मीद की जा रही है.

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7. यूसुफ़ पठान

यूसुफ़ पठान

जन्म: 17 नवंबर, 1982 (बड़ौदा, गुजरात) टीम: भारत, बड़ौदा, राजस्थान रॉयल्स पहला वनडे: जून 2008 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (ढाका) पहला ट्वेन्टी 20: सितंबर 2007 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग) वनडे: 43, रन: 587, सर्वश्रेष्ठ: 123, औसत: 30.89, शतक: 01, विकेट: 30 टी-20: 19, रन: 211, सर्वश्रेष्ठ: 37, औसत: 17.58, शतक: 00, विकेट: 12

यूसुफ़ पठान की ख्याति तेज़ गति से रन बनाने की है और वह टी-20 के सफल बल्लेबाज़ माने जाते हैं. यूसुफ़ के छोटे भाई इरफ़ान पठान को हालांकि भारत की टीम में पहले जगह मिली लेकिन धीरे-धीरे यूसुफ़ ने अपने खेल से पहले टी-20 और फिर वनडे टीम में जगह बनाई. यूसुफ़ पठान को भारत की विश्व-कप टीम में एक ऑल राउंडर की हैसियत से शामिल किया गया है. वह ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ हैं लेकिन उनसे तेज़ गति से रन बनाने की ज़्यादा उम्मीद की जाती है. आईपीएल के 2008 के पहले संस्करण में यूसुफ़ ने 435 रन बनाए जिसमें चार अर्धशतक शामिल थे. राजस्थान रॉयल्स की ख़िताबी जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. दिलीप ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में यूसुफ़ ने 190 गेंदों पर दोहरा शतक जड़ कर फ़र्स्ट क्लास के इतिहास की सबसे बड़ी जीत हासिल की थी. हाल ही में समाप्त हुई न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ में यूसुफ़ ने 123 रनों की पारी खेल भारत को मैच जिताया. पठान को इस बार कोलकाता नाइट राइडर्स ने 21 लाख अमरीकी डॉलर में ख़रीदा है. पठान ने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ अंतिम मैच में यादगार पारी खेली. वह भारत को मैच तो जिता नहीं पाए लेकिन क्रिकेट प्रेमियों का दिल ज़रूर जीत लिया. विश्व कप में उनसे काफ़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं.

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8. हरभजन सिंह

हरभजन सिंह

जन्म: 3 जुलाई, 1980 (जालंधर, पंजाब) टीम: भारत, लंकाशायर, सरे, मुंबई इंडियंस पहला टेस्ट: मार्च 1998 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (बंगलौर) पहला वनडे: अप्रैल 1998 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (शारजाह) पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग) टेस्ट: 93, रन: 2008, सर्वश्रेष्ठ: 115, औसत: 18.59, शतक: 02, विकेट: 393 वनडे: 215, रन: 1109, सर्वश्रेष्ठ: 49, औसत: 13.20, शतक: 00, विकेट: 246 टी-20: 22, रन: 84, सर्वश्रेष्ठ: 21, औसत: 12.00, शतक: 00, विकेट: 16

हरभजन सिंह अभी तक के भारत के सबसे सफल ऑफ़ स्पिनर हैं. वह अपने आक्रामक रुख़ और बल्लेबाज़ी दोनों के लिए जाने जाते हैं. शुरू में हरभजन की गेंदबाज़ी के ऐक्शन को लेकर विवाद उठा था लेकिन उन्होंने अपने ऐक्शन में सुधार किया. उनकी अचानक उठ जाने वाली गेंद ही उनका सबसे बड़ा हथियार है. वह दूसरा भी फेंकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हरभजन सिंह ने 2001 में तीन टेस्ट मैच में 32 विकेट लेकर अपनी धौंस जमाई लेकिन ऑस्ट्रेलिया के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा अब भी जारी है. हरभजन विवादों में रहते हैं. ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू साइमंड्स के साथ उनका विवाद काफ़ी ख़राब रहा फिर आईपीएल में श्रीसंत को थप्पड़ जड़ने के लिए प्रतिबंध से भी गुज़रना पड़ा. हरभजन सिंह ने टेस्ट में भारत की ओर से पहली हट्रिक भी ली है. इस साल न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ हरभजन सिंह ने टेस्ट में दो शतक लगा कर भारत का टेस्ट क्रिकेट में पहला स्थान बरक़रार रखा. अनिल कुंबले के संन्यास के बाद से हरभजन सिंह तीनों तरह की क्रिकेट में स्पिनर के रूप में भारत की पहली पसंद हैं.

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9. ज़हीर ख़ान

ज़हीर ख़ान

जन्म: 7 अक्तूबर, 1978 (श्रीरामपुर, महाराष्ट्र) टीम: भारत, बड़ौदा, सरे, वॉरसेस्टरशायर, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर, मुंबई इंडियंस पहला टेस्ट: नवंबर 2000 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ (ढाका) पहला वनडे: अक्तूबर 2000 में कीनिया के ख़िलाफ़ (नैरोबी) पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2006 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग) टेस्ट: 78, रन: 1045, सर्वश्रेष्ठ: 75, औसत: 12.90, शतक: 00, विकेट: 271 वनडे: 180, रन: 739, सर्वश्रेष्ठ: 34, औसत: 12.52, शतक: 00, विकेट: 250 टी-20: 12, रन: 13, सर्वश्रेष्ठ: 09, औसत: 06.50, शतक: 00, विकेट: 13

ज़हीर ख़ान बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हैं और उनमें वो सारी ख़ूबियां हैं जो एक तेज़ गेंदबाज़ की पहचान मानी जाती हैं. वह गेंद को दोनों ओर मूव करा सकते हैं और पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ों की तरह रिवर्स स्विंग कराने की क्षमता रखते हैं. ज़हीर ख़ान अपनी रहस्यमय चोट के कारण कई बार टीम से बाहर रहे हैं. अब उन्होंने अपना रन-अप कम किया है. वो वेस्ट इंडीज़ में अपनी अच्छी गेंदबाज़ी के कारण मैन ऑफ़ द सिरीज़ रहे थे. उसके बाद फिर दक्षिण अफ़्रीका में मैन ऑफ़ द सिरीज़ बने. ज़हीर की तुलना हमेशा वसीम अकरम से की जाती है हालांकि ज़हीर में अकरम जैसी कुशलता नहीं है लेकिन मानसिक तौर पर वह उतने ही दमदार हैं जितने अकरम. उनमे विकेट लेने की योग्यता है और जबसे वह भारतीय टीम में हैं उन्होंने भारतीय आक्रमण की अगुवाई की है. शुरुआती झटके देने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने 2006 में वॉरसेस्टरशायर की ओर से खेलते हुए 78 विकेट लिए थे. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ज़हीर ख़ुद को चोट से बचा पाएँ तो वह भारत के अब तक के सबसे परिपूर्ण तेज़ गेंदबाज़ हो सकते हैं. उनमें क्षमता है, अनुभव है और वह अपने शिकार को पहचानते हैं.

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10. प्रवीण कुमार

प्रवीण कुमार

जन्म: 2 अक्तूबर, 1986 (मेरठ, उत्तर प्रदेश) टीम: भारत, उत्तर प्रदेश, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर पहला वनडे: नवंबर 2007 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (जयपुर) पहला ट्वेन्टी 20: फरवरी 2008 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (मेलबोर्न) वनडे: 48, रन: 225, सर्वश्रेष्ठ: 54, औसत: 13.23, शतक: 00, विकेट: 57 टी-20: 04, रन: 06, सर्वश्रेष्ठ: 06, औसत: 6.00, शतक: 00, विकेट: 04

प्रवीण कुमार परंपरागत भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों की श्रेणी में आते हैं. उनमें गति ज़्यादा नहीं लेकिन उनकी गेंद में स्विंग ज़रूर है. वह मेहनती हैं और लंबे समय तक गेंदबाज़ी करने की क्षमता रखते हैं. उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में पैदा हुए प्रवीण कुमार भारतीय पिचों पर विकेट लेने का हुनर जानते हैं. हालांकि उन्हें अभी तक टेस्ट कैप नहीं मिली है लेकिन उन्होंने वनडे क्रिकेट में अपनी पहली ही सिरीज़ में 10 विकेट लेकर अपनी क्षमता साबित कर दी. सीबी सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच जिताने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में ख़ास तौर से अच्छा प्रदर्शन किया है और चयनकर्ताओं की नज़र से वह ज़्यादा दूर नहीं हैं. प्रवीण कुमार ने आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर की ओर से अच्छा प्रदर्शन किया है. वह ज़रूरत पड़ने पर बल्ले का अच्छा इस्तेमाल भी कर लेते हैं. प्रवीण कुमार ने अपनी क्षमता का कुशलता के साथ प्रयोग किया है और अंतिम ओवरों में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने उन पर भरोसा भी दिखाया है.

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11. आशीष नेहरा

आशीष नेहरा

जन्म: 29 अप्रैल, 1979 (दिल्ली) टीम: भारत, दिल्ली, डेल्ही डेयरडेविल्स, मुंबई इंडियंस पहला टेस्ट: फऱवरी 1999 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (कोलंबो) पहला वनडे: जून 2001 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (हरारे) पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2009 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (नागपुर) टेस्ट: 17, रन: 77, सर्वश्रेष्ठ: 19, औसत: 05.50, शतक: 00, विकेट: 44 वनडे: 116, रन: 140, सर्वश्रेष्ठ: 24, औसत: 06.08, शतक: 00, विकेट: 153 टी-20: 08, रन: 22, सर्वश्रेष्ठ: 22, औसत: 07.33, शतक: 00, विकेट: 13

आशीष नेहरा ने अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में 2000-01 में क़दम रखा और ये बता दिया कि उनमें बाएं हाथ के क्लासिक तेज़ गेंदबाज़ की सारी विशेषताएं मौजूद हैं. उनमें गति है, लाइन और लेंग्थ पर कंट्रोल है. वह अपनी गति और दिशा में समय-समय पर परिवर्तन करने की क्षमता रखते हैं. गेंद को जब अंदर लाते हैं तो बल्लेबाज़ों के लिए परेशानियां खड़ी कर देते हैं. नेहरा ने 1999 में अपना पहला टेस्ट खेला था. आशीष नेहरा को उनकी चोट ने काफ़ी परेशान किया और जब वह अपने चरम पर थे तभी परेशानियों ने आ घेरा और फिर गति और दिशा पर उनका कंट्रोल जाता रहा. नेहरा ने ज़िम्बॉब्वे के ख़िलाफ़ ही अपनी पहली पूरी सिरीज़ खेली थी और 2005 में उन्हें ज़िम्बॉब्वे के दौरे को बीच ही छोड़ना पड़ा था. टेस्ट में उन्हें दोबारा तो नहीं बुलाया जा सका लेकिन आईपीएल के दूसरे संस्करण में अच्छा प्रदर्शन करने के नतीजे में उन्हें वेस्ट इंडीज़ के विरुद्ध 2009 में वनडे टीम में वापस बुलाया गया. नेहरा ने पाकिस्तान और इंग्लैंड के विरुद्ध ख़ास तौर से अच्छा प्रदर्शन किया है. उन्होंने वनडे में इंग्लैंड के विरुद्ध अपना बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया है जब उन्होंने 23 रन देकर छह विकेट झटके थे.

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12. मुनाफ़ पटेल

मुनाफ़ पटेल

जन्म: 12 जुलाई, 1983 (गुजरात) टीम: भारत, गुजरात, राजस्थान रॉयल्स पहला टेस्ट: मार्च 2006 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (मोहाली) पहला वनडे: अप्रैल 2006 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (गोवा) पहला ट्वेन्टी 20: जनवरी 2011 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (डरबन) टेस्ट: 12, रन: 56, सर्वश्रेष्ठ: 15, औसत: 07.00, शतक: 00, विकेट: 34 वनडे: 52, रन: 69, सर्वश्रेष्ठ: 15, औसत: 07.66, शतक: 00, विकेट: 62 टी-20: 01, रन: 00, सर्वश्रेष्ठ: 00, औसत: 00, शतक: 00, विकेट: 01

भारत में किसी खिलाड़ी ने भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होने से पहले उतना नाम नहीं कमाया जितना कि मुनाफ़ पटेल ने. उनकी तेज़ गति की चर्चा टीम में शामिल होने से पहले उस वक़्त शुरू हुई जब किरण मोरे ने उन्हें गेंदबाज़ी करते देखा और उन्हें बिना किसी देरी के एमआरएफ़ पेस फ़ाउंडेशन में प्रशिक्षण के लिए भेज दिया. तेज़ गति के साथ गेंद करने की क्षमता के कारण उन्हें गुजरात और बड़ौदा ने अपनी टीम में शामिल करने की कोशिश की लेकिन मुनाफ़ में तेंदुलकर ने दिलचस्पी ली और मुनाफ़ ने मुंबई की तरफ़ से फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट खेली. अपने पहले ही मैच में इंग्लैंड के विरुद्ध मोहाली में मुनाफ़ ने 97 रन देकर सात विकेट लिए जो किसी भी भारतीय तेज़ गेंदबाज़ का अपने पहले मैच में सबसे अच्छा प्रदर्शन था. अपने ज़माने के दूसरे तेज़ गेंदबाज़ों की तरह मुनाफ़ भी चोट का शिकार हो गए और अचानक उनकी गति में काफ़ी कमी आ गई यहां तक कि टीम में वह अपनी जगह खो बैठे. फिर ज़हीर ख़ान और श्रीसंत की चोट के कारण वर्ष 2010 में मुनाफ़ की श्रीलंका के ख़िलाफ़ वापसी हुई और हालिया दक्षिण अफ़्रीका सिरीज़ में मुनाफ़ ने धारदार गेंदबाज़ी कर भारत को रोमांचक जीत दिलाई.

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13. विराट कोहली

विराट कोहली

जन्म: 05 जुलाई, 1988 (दिल्ली) टीम: भारत, दिल्ली, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर पहला वनडे: अगस्त 2008 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (दम्बुला) पहला ट्वेन्टी 20: जून 2010 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (हरारे) वनडे: 43, रन: 1583, सर्वश्रेष्ठ: 118, औसत: 45.22, शतक: 04, विकेट: 00 टी-20: 03, रन: 54, सर्वश्रेष्ठ: 28, औसत: 54.00, शतक: 00, विकेट: 00

विराट कोहली ने अपने फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट की शुरूआत दिल्ली से वर्ष 2006-07 में की और अपनी पुख़्ता बल्लेबाज़ी के कारण उन्हें 2008 में अंडर-19 विश्व कप के लिए कप्तान बनया गया और उन्होंने भारत को ख़िताबी जीत दिलाई. अभी उन्हें टेस्ट कैप नहीं मिली है लेकिन उन्होंने एक ठंडे दिमाग़ वाले परिपक्व बल्लेबाज़ की ख्याति प्राप्त कर ली है. मध्यक्रम में उन्हें खेलना पसंद है. कोहली को 2008 में वीरेंदर सहवाग के चोटिल होने के कारण उनकी जगह श्रीलंका के ख़िलाफ़ भारत की वनडे टीम में शामिल किया गया उसके साथ ही वह चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के लिए भी चुने गए. उन्होंने अभी तक खेले गए वनडे मैचों में चार शतक और 12 अर्धशतक लगाए हैं. टी-20 में भारत की ओर से खेलते हुए उन्होंने अभी तक कोई महत्वपूर्ण पारी नहीं खेली है लेकिन उनकी बल्लेबाज़ी का लोहा मानते हुए आईपीएल में उन्हें एक मज़बूत खिलाड़ी माना जाता है. आईपीएल की नई नीलामी में रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर ने जिस एकमात्र खिलाड़ी को अपने पास रखा वह विराट ही थे. विराट कोहली ने दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध हालिया वनडे सिरीज़ में कई महत्वपूर्ण पारियाँ खेली हैं.

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14. रविचंद्रन अश्विन

आर अश्विन

जन्म: 17 सितंबर, 1986 (चेन्नई) टीम: भारत, तमिलनाडु, चेन्नई सुपर किंग्स पहला वनडे: जून 2010 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (हरारे) पहला ट्वेन्टी 20: जून 2010 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (हरारे) वनडे: 07, रन: 38, सर्वश्रेष्ठ: 38, औसत: 19.00, शतक: 00, विकेट: 14 टी-20: 03, रन: 00, सर्वश्रेष्ठ: 00, औसत: 00, शतक: 00, विकेट: 03

आर अश्विन के नाम से प्रसिद्ध रविचंद्रन अश्विन नए खिलाड़ी हैं और दाएँ हाथ के ऑफ़ ब्रेक स्पिनर हैं. पिछले साल ही उन्होंने वनडे मैचों में एंट्री ली है. उन्होंने अपनी प्रतिभा रण्जी ट्रॉफ़ी में उस वक़्त दिखाई जब उन्होंने 2006-07 में तमिलनाडु की तरफ़ से खेलते हुए 31 विकेट लिए. आईपीएल में वह चेन्नई की ओर से खेल चुके हैं और उन्होंने अपनी सधी हुई गेंदबाज़ी परिचय भी दिया है. आईपीएल में चेन्नई की जीत में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और चैम्पियंस लीग में तो वह अपनी किफ़ायती गेंदबाज़ी की वजह से मैन ऑफ़ द सिरीज़ भी हुए. उनकी गेंद करने की शैली कुछ हद तक भारत के मशहूर फ़िरकी गेंदबाज़ वेंकटराघवन से मिलती है. 24 वर्षीय अश्विन इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं. उन्हें टीम इंडिया में 2010 के शुरू में दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध उस वक़्त मौक़ा मिला था जब हरभजन सिंह ने निजी कारणों से छुट्टी ली थी. अश्विन ने रण्जी ट्रॉफ़ी में अच्छी बल्लेबाज़ी के संकेत भी दिए हैं. वह सीमित ओवर मैच के कारगर खिलाड़ी हैं लेकिन अभी टेस्ट क्रिकेट में उनकी जगह नज़र नहीं आ रही है.

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15. पीयूष चावला

पीयूष चावला

जन्म: 24 दिसंबर, 1988 (उत्तर प्रदेश) टीम: भारत, उत्तर प्रदेश, किंग्स इलेवन पंजाब पहला टेस्ट: मार्च 2006 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (मोहाली) पहला वनडे: मई 2007 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ (ढाका) पहला ट्वेन्टी 20: मई 2010 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (ग्रॉस आइलेट) टेस्ट: 02, रन: 05, सर्वश्रेष्ठ: 04, औसत: 02.50, शतक: 00, विकेट: 03 वनडे: 21, रन: 28, सर्वश्रेष्ठ: 13, औसत: 05.60, शतक: 00, विकेट: 28 टी-20: 03, रन: 00, सर्वश्रेष्ठ: 00, औसत: 00, शतक: 00, विकेट: 02

पीयूष चावला भारत की ओर से वनडे और टेस्ट दोनों खेल चुके हैं लेकिन अभी तक टीम में उनकी स्थिति पूरी तरह मज़बूत नहीं हैं. वो लेग ब्रेक गेंदबाज़ हैं लेकिन टीम इंडिया में ऑल राउंडर के रूप में शामिल हुए हैं हालांकि अभी तक उन्होंने अपने बल्ले का जौहर नहीं दिखाया है. उत्तर प्रदेश के शहर अलीगढ़ से आने वाले चावला भारत की अंडर-19 और यूपी की अंडर-22 टीम की ओर से खेल चुके हैं. उन्होंने 2007 में बांग्लादेश में अपने पहले वनडे मैच में तीन विकेट लिए थे और उसी साल इंग्लैंड और आयरलैंड के दौरे में 14 विकेट लिए थे. चावला ने इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ दो टेस्ट मैच भी खेले हैं लेकिन वह कुंबले के बाद टेस्ट क्रिकेट में अपना स्थान बनाने में विफल रहे क्योंकि अमित मिश्रा और प्रज्ञान ओझा की ओर से कड़ा मुक़ाबला था. आईपीएल के पहले संस्करण में चावला ने गेंद और बल्ले दोनों से सराहनीय प्रदर्शन किया था. वर्ष 2008 में एशिया कप में अच्छा प्रदर्शन न करने पर उन्हें घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन बेहतर करने के लिए भेज दिया गया था. विश्व कप के लिए उनके चुनाव पर कुछ लोगों को हैरत ज़रूर हो सकती है.

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