हॉकी: सिंथेटिक टर्फ पर तेज गति का खेल

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हॉकी का बुनियादी नियम बड़ा सरल है. स्टिक के इस्तेमाल से गेंद को आगे बढ़ाओ, विरोधियों को छकाओ और गेंद को उनके गोल में दाग दो.
लेकिन गेंद में हाथ या पैर में नहीं लगनी चाहिए. ओलंपिक में महिलाओं और पुरुषों 12-12 की टीमें होती हैं.
छह-छह टीमों को दो ग्रुपों में बाँटा जाता है. हर ग्रुप से दो टीम सेमी फाइनल के लिए क्वालिफाई करती हैं.
1930 के दशक के दौरान ब्रितानी अधिकारियों के जरिए ये खेल भारत पहुंचा.
इसके बाद 1960 के दशक में भारत ने हॉकी में अपना परचम लहराते हुए ओलंपिक में छह स्वर्ण पदक जीते.
हॉकी में हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स और जर्मनी का दबदबा रहा है.
भारतीय प्रदर्शन
ब्रिटेन ने वर्ष 1988 में जर्मनी को 3-1 से हराकर ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल किया था.
हॉकी के मैदान में गोल के सामने डी-आकार का क्षेत्र होता है. इसी क्षेत्र से गोल में गेंद पहुंचाने पर गोल दर्ज होता है.
कोई खिलाड़ी इस क्षेत्र में रहते हुए यदि गोल दागने की कोशिश करता है और विरोधी टीम गलत तरीके से उसे रोकती है तो पहली टीम को पेनल्टी के जरिए गोल करने का मौका दिया जाता है.
भारत के सबसे मशहूर हॉकी खिलाड़ी संभवत: ध्यानचंद थे जिन्होंने सेंटर-फॉरवर्ड के तौर पर खेलते हुए वर्ष 1928, 1932, और वर्ष 1936 में भारतीय टीम को तीन स्वर्ण पदक दिलाए.
वर्ष 1936 के ओलंपिक में भारत ने नाजी अधिकारियों के सामने ही जर्मनी को 8-1 से करारी शिकस्त दी थी.
हॉकी के सभी प्रमुख मुकाबले अब सिंथेटिक टर्फ पर खेले जाते हैं और बीते वर्षों में ये खेल पहले से कहीं ज्यादा तेज गति वाला और ज्यादा निपुणता वाला हो गया है.

























