मेडल के लिए टोपी नहीं उतारेंगे रोंजन

रोंजन सोढी
इमेज कैप्शन, अपने पहले ओलंपिक को लेकर काफी आशावान हैं शूटर रोंजन सोढ़ी
    • Author, कल्पना शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

रोंजन सोढ़ी पंजाब के शहर फिरोजपुर से हैं. वहां कोई शूटिंग रेंज नहीं है. पिता शौकिया शूटिंग करते थे.

पिता का शौक रोंजन का जुनून बन गया. डबल ट्रैप शूटर रोंजन से लंदन में किसी पदक पर निशाना लगाने की उम्मीद की जा रही है.

रोंजन भी तैयार हैं लंदन में उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए, अपनी लकी कैप के साथ.

रोंजन ओलंपिक पूरा होने तक इस कैप को नहीं उतारेंगे

लकी कैप

बीबीसी के साथ बातचीत में अपने पहले ओलंपिक की तैयारी कर रहे रोंजन ने कहा, “मैं काफी टाइम से एक टोपी पहन कर शूटिंग कर रहा हूं. मुझसे कई लोगों ने पूछा कि मैं हमेशा यही कैप क्यों पहनता हूं. एकाएक मुझे लगा कि यह मेरा लकी चार्म है. इसे पहन कर मैंने कई मेडल भी जीते हैं. ओलंपिक तक मैं इस कैप को नहीं उतारूंगा.”

रोंजन लंदन ओलंपिक में क्वालिफाई करने के बाद से इटली में ट्रेनिंग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग काफी अच्छी चल रही है. लेकिन वह किसी दबाव के साथ लंदन नहीं जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, “शूटिंग ऐसा खेल है जिसमें एकाग्रता सबसे अहम है. रेंज पर किसी से मुकाबला नहीं बल्कि अपने आप से होता है. यह मेरा पहला ओलंपिक है. इसलिए मैं किसी दबाव के साथ नहीं जाउंगा.”

बाकी खिलाड़ियों की तरह रोंजन भी ओलंपिक को अपने लिए एक बड़ा मौका मान रहे हैं.

पहला ओलंपिक

रोंजन ने कहा, “किसी भी खिलाड़ी के लिए ओलंपिक पदक अहम होता है. मेरा भी सपना ओलंपिक में पदक जीतने का है. मैं वादा करता हूं कि लंदन में अपना सौ फीसदी प्रदर्शन दूंगा. मैं इसके लिए काफी लंबे समय से तैयारी कर रहा हूं.”

रोंजन बताते हैं कि वह अपने पिता के कारण शूटर बने. उन्होंने हमेशा ही उन्हें प्रेरित किया है. बचपन में रोंजन के खिलौनों में पिस्तौल की हमेशा अहमियत रही है.

उन्होंने बताया, “मैने बचपन में ही पिस्तौल चलानी शुरू कर दी थी. मेरी मम्मी और पिताजी बताते हैं कि मैं बंदूकों से काफी खेलता था. 1999 में पहली बार रेंज में गया था. तबसे मैं शूटिंग कर रहा हूं.”

रोंजन के शरीर की बनावट को देख कर खाने को लेकर उनके प्रेम का अंदाजा लगाया जा सकता है. लेकिन हाल के सालों में उन्होंने अपनी फिटनेस पर काफी काम किया है.

रोंजन ने बताया, “ शूटरों का खाना साधारण होता है. मैं भी सब कुछ खा लेता हूं. इटली में होता हूं तो पास्ता खा लेता हूं. चीन में नूडल्स खा लेते हैं. इंडिया में बटर चिकन मिल जाता है. वैसे मेरी पत्नी काली मिर्च में काफी अच्छा चिकन बनाती है. ”

अपनी फिटनेस को लेकर रोंजन अपने आलोचकों के निशाने पर भी रहे हैं. हालांकि उन्होंने इसे सुधारने में काफी मेहनत भी की है.

इस बारे में पूछे जाने पर रोंजन ने कहा, “एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान मेरा वजन काफी बढ़ गया था. उस समय कई लोगों ने मुझ से कहा कि मेरा वजन काफी बढ़ रहा है. उस दौरान मेरा प्रदर्शन भी अच्छा हो रहा था. इसलिए मैंने अधिक ध्यान नहीं दिया. कॉमनवेल्थ गेम्स के एक महीने के बाद एशियन गेम्स थे. अगर मैं उस दौरान वजन कम करने लग जाता तो शायद मेरा मेडल नहीं आता.”

खुद को संभालने के लिए

रोंजन ने पिछले कुछ सालों के दौरान खुद को एक बेहतरीन शूटर के रूप में पेश किया है. इसके लिए उन्होंने काफी तरीके अपनाए हैं. इनमें से एक दबाव और संकट के समय में खुद से बात करना भी शामिल है.

इस बारे में रोंजन बताते हैं, “मैं कई बार खुद को समझाता हूं कि मुझे ज्यादा एक्साइटेड नहीं होना चाहिए. उस समय दिमाग चल रहा होता है, लेकिन खुद को समझाना पड़ता है कि पिक्चर अभी बाकी है दोस्त. यानी अभी मुकाबला बाकी है.”

रोंजन ने कहा, “राज्यवर्धन राठौर ने मुझे काफी प्रेरित किया है. 2004 में उनके रजत पदक ने हम सभी शूटरों को रास्ता दिखाया था. हालांकि 2008 में अभिनव बिंद्रा का गोल्ड मेडल सबसे बड़ी प्रेरणा साबित हुआ.”