क्या धोनी की टीम वापसी कर पाएगी?

धोनी और इयोन मॉर्गन
    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

एकदिवसीय क्रिकेट की विश्व चैंपियन भारतीय टीम आगामी विश्व कप में अपने ख़िताब के बचाव का अभियान अगले महीने शुरू करेगी.

उससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम अपनी साख बचाने और खोया हुआ भरोसा वापस पाने के लिए शुक्रवार को पर्थ में इंग्लैंड का सामना करेगी.

यह मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया में खेली जा रही त्रिकोणीय एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम का भाग्य तय करेगा.

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रोहित शर्मा

मेज़बान ऑस्ट्रेलिया एक दिवसीय त्रिकोणी शृंखला में पहले ही फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है.

ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर अपनी पहली जीत को तरस रही भारतीय टीम जब अपनी दूसरी रैंकिंग के साथ इस सिरीज़ में उतरी तो उसने पहले मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़़ कोई बहुत बुरा खेल नहीं दिखाया.

भारत ने रोहित शर्मा के 138 रनों की मदद से 8 विकेट खोकर 267 रन बनाए. लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने जीत का लक्ष्य एक ओवर पहले 6 विकेट खोकर ही हासिल किया.

लेकिन अपने दूसरे ही मुक़ाबले में भारतीय टीम इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपनी लय खो बैठी. रोहित शर्मा चोटिल होकर बाहर हो गए और टीम 39.3 ओवर में ही 153 रनों पर ढेर हो गई.

इंग्लैंड ने भारत को 135 गेंद शेष रहते 9 विकेट से करारी मात दी.

इंग्लैंड उसके बाद हांलाकि ऑस्ट्रेलिया से हारा ज़रूर लेकिन कड़े संघर्ष के बाद. सबसे बड़ी बात ये रही कि इंग्लैंड के बल्लेबाज़ 303 रन बनाने में कामयाब रहे.

चुनौती

महेंद्र सिंह धोनी

इयान बेल ने 141 रन बनाये तो जॉ रूट 69 रन बनाकर खोई फ़ॉर्म वापस पाने में सफल रहे.

बेल का लगातार रन बनाना भारत के लिए ख़तरे की घंटी है, क्योंकि उन्हे दूसरे छोर से मोइन अली का भी बेहतरीन साथ मिल रहा है.

इन दोनों ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले विकेट के लिये 113 रनों की साझेदारी की. भारत के ख़िलाफ़ भी इयान बेल ने 88 रनों की नाबाद पारी खेली थी.

इनके अलावा जेम्स टेलर भी नाबाद 56 रन बनाकर कमज़ोर भारतीय गेंदबाज़ी की पोल खोलने में कामयाब रहे.

भारत-इंग्लैंड मुक़ाबले को लेकर भारत के पूर्व आलराउंडर मदन लाल मानते हैं कि मुश्किलें तो हैं.

कमज़ोर गेंदबाजी

धोनी और फ्लेचर

वो कहते हैं कि भारत के बल्लेबाज़ अगर 300 रन भी बना लें तो क्या भारतीय गेंदबाज़ी इसे बचा सकेगी.

मदन लाल कहते हैं कि भारतीय गेंदबाज़ तो इस समय ख़ुद रन दे रहे हैं. लाइन और लेंथ पर उनका नियंत्रण नही हैं.

ऐसे में ताज्जुब होता हैं कि टीम के कोच डंकन फ्लेचर और उनके साथ भारत अरुण और संजय बांगड़ क्या कर रहे हैं?

ईशांत शर्मा और उमेश यादव हर तरह की गेंद कर रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.

अब समय आ गया है कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ख़ुद आगे आएं. उनके पास काफ़ी अनुभव है.

इंग्लैंड की मजबूती

शिखर धवन

केवल विराट कोहली पर टीम की निर्भरता ठीक नहीं है. शिखर धवन बिलकुल रन नहीं बना पा रहे हैं, जो सबसे बड़ी समस्या है.

रोहित शर्मा अगर खेलें तो हालात सुधरेंगे. भारत को फ़ाइनल में पहुंचने का मौक़ा मिला है.

अब देखना है कि पर्थ के तेज़ और उछाल लेते विकेट पर जेम्स एंडरसन, स्टीवन फ़िन और स्टुअर्ट ब्रॉड तथा क्रिस वोक्स की तेज़-तर्रार चौकड़ी का सामना भारतीय बल्लेबाज़ कैसे करते हैं.

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