'ओलिंपिक जाना मेरा हक़'

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- Author, राखी शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
- प्रकाशित
हाल ही में लास वेगास में हुई विश्व चैम्पियनशिप में नरसिंग यादव ने फ्रांस के खिलाड़ी को चित कर कांस्य पदक जीता.
इसके साथ ही 74 किलोग्राम वर्ग में ओलिंपिक कोटा भी हासिल कर लिया.
लेकिन इस जीत ने भारत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

लेकिन सवाल उठ रहा है कि ओलंपिक के लिए 74 किलो वर्ग में कोटा हासिल करने वाले खिलाड़ी नरसिंग जाएंगे या उसी कैटेगरी में हिस्सा लेने वाले दो बार ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार.
नियमों के मुताबिक़ ये कोटा खिलाड़ी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं बल्कि देश को दिया जाता है.
नरसिंह कहते हैं, "जो खिलाड़ी चैम्पियनशिप में लड़ता है, अपने देश के लिए क्वॉलीफाई करता है तो उसका ह़क बनता है. ओलिंपिक के लिए उसी को जाना चाहिए. मेरे खयाल से सही भी यही है."
सुशील का दावा मज़बूत

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नरसिंह का ओलिंपिक कोटा जीतना जितना बड़ा सच है, ठीक उसी तरह इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि सुशील भारत की गोल्ड मेडल की सबसे बड़ी उम्मीद हैं.
2008 बीजिंग ओलंपिक में जीते कांस्य को सुशील ने 2012 लंदन ओलिंपिक्स में रजत में तब्दील किया.
2016 ओलिंपिक के लिए हर कोई सुशील से उम्मीदें लगाए बैठा है कि वो रजत को गोल्ड में बदलेंगे. सुशील के कोच महाबलि सतपाल की राय भी अलग नहीं है.
'सुशील का दावा ज़्यादा मज़बूत है. उनका प्रदर्शन इस बात का सबूत है. वो एक बार नरसिंह को हरा भी चुके हैं. नरसिंह भी अच्छा पहलवान है, लेकिन दोनों में पलड़ा सुशील का भारी है.'
धर्मसंकट में फ़ेडरेशन

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रियो के लिए भेजा किसे जाएगा, इसे लेकर सबसे बड़ा धर्मसंकट तो भारतीय कुश्ती संघ के सामने है. दोनों खिलाड़ियों के बीच चयन उन्हें ही करना है.
भारतीय कुश्ती संघ के संयुक्त सचिव कुलदीप सिंह राणा कहते हैं,
'किसी भी पहलवान के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा. सुशील ने भारतीय कुश्ती में नया इतिहास रचा है.

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वहीं नरसिंह की कामयाबी भी सामने है, "इस पर काफी सोच विचार किया जाएगा. ये देश का सवाल है. इस बार हमें कुश्ती में कम से कम चार मेडल चाहिए."
पिछले साल 74 किलो वर्ग में ग्लासोगो राष्ट्रमंडल खेलो में गोल्ड जीतने से पहले तक सुशील 66 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लेते थे.
बदले गए नियमों की वजह से ओलिंपिक से 66 किलोग्राम वर्ग हटा दिया गया है.
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