अल्बर्टा ने कनाडा के साथ ही रहने का किया फ़ैसला, कौन दे रहा है अलगाव को हवा?

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- Author, लाइज़ डूसेट
- पदनाम, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संवाददाता, ओटावा, कनाडा
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पिछले सप्ताह कैलगरी में उत्साहित भीड़ के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंच से कहा था, "ऐसे वोट करें, मानो कनाडा का भविष्य इसी पर निर्भर करता हो." मंच पर चमकीले लाल और सफ़ेद रंग के 'फॉरएवर कैनेडियन' (हमेशा कनाडाई) बैनर लगे हुए थे.
ऐसा लगता है कि उनका यह संदेश मतदाताओं के दिलों तक पहुँचा. शुरुआती नतीजों के मुताबिक, अल्बर्टा के दो-तिहाई से अधिक मतदाताओं ने कहा कि वे कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहते हैं.
हालांकि, कनाडा का भविष्य अब भी उसके सबसे अमीर प्रांत पर निर्भर करता है.
अल्बर्टा में कनाडा के प्रमाणित तेल भंडार का ज़्यादातर हिस्सा मौजूद है. यहाँ प्राकृतिक गैस और खनिजों के भी प्रचुर भंडार हैं.
यही वजह है कि अमेरिका के साथ जारी भीषण व्यापार युद्ध से उबरने की ओटावा की कोशिशों में यह प्रांत अहम भूमिका निभा रहा है.
इन कोशिशों में व्यापार के विविधीकरण, अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने और दुनिया के दूसरे छोर पर नए सहयोगी बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है.
अल्बर्टा में पले-बढ़े और पूर्व केंद्रीय बैंकर रहे कार्नी अब कनाडा के पुनर्निर्माण की कमान संभाल रहे हैं, देश के भीतर भी और उसकी सीमाओं के बाहर भी.
सोमवार को कनाडा से अलग होने के मुद्दे पर हुए मतदान के नतीजों में जीत का पैमाना स्पष्ट होते ही कार्नी ने अपना पहला बयान दिया. उनके शब्दों पर गौर कीजिए, "उन्होंने एकता को चुना, साथ मिलकर निर्माण करने और एक-दूसरे की देखभाल करने का फ़ैसला किया."
कनाडा में बने रहने के पक्ष में अल्बर्टा के लोगों के भारी समर्थन ने कार्नी को राजनीतिक मज़बूती भी दी है.
इस जनमत संग्रह के नतीजों में अहम भूमिका निभाने वाले 'फॉरएवर कैनेडियन' अभियान के पूर्व लॉमेकर थॉमस लुकाशुक ने चेतावनी देते हुए कहा, "कनाडा से उलझने की कोशिश मत करो."
अलगाव को हवा कौन दे रहा है?

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत की राजधानी एडमंटन में उत्साहित समर्थकों को संबोधित करते हुए थॉमस लुकाशुक ने कहा कि जैसे-जैसे कनाडा के साथ बने रहने के पक्ष में वोटों की संख्या बढ़ रही थी, यह मतदान "दुनिया के बाक़ी देशों को एक बहुत मज़बूत संदेश देगा."
हर कोई जानता है कि उनका इशारा दक्षिण में स्थित उस परेशान करने वाले पड़ोसी की ओर है, ख़ासकर उसके राष्ट्रपति की ओर, जो बार-बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की धमकी देते रहते हैं.
जिस दिन अल्बर्टा के लोग कनाडा के साथ अपने भविष्य को लेकर मतदान कर रहे थे, उसी दिन डोनाल्ड ट्रंप ने भी अगले महीने होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले कंसास में एक रैली के दौरान उत्तर में स्थित अपने पड़ोसी देश को संदेश दिया.
उन्होंने वादा किया, "मैं आपको आइस हॉकी रखने दूंगा और आपका राष्ट्रीय गान 'ओ कनाडा' भी रखने दूंगा." इसके बाद उन्होंने कहा, "हम तो बस मज़ाक कर रहे हैं."
लेकिन कनाडा के लोगों के लिए यह हँसी-मज़ाक का मामला नहीं है.
इस जनमत संग्रह से पहले कार्नी ने बार-बार दी गई अपनी चेतावनी दोहराई थी कि "हमारी सीमाओं के बाहर कुछ लोग हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे हम पर अपना नियंत्रण कर सकें." हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किन लोगों की ओर था.
उन्हें ऐसा करने की ज़रूरत भी नहीं थी. अलगाववादियों के लिए इस निर्णायक दौर में उनके कुछ नेताओं ने अपने इरादे छिपाए भी नहीं.
अलगाववादी आंदोलन के कुछ सबसे प्रमुख नेताओं ने स्वीकार किया कि वे पिछले साल तीन बार वॉशिंगटन गए थे. वहाँ उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों से मुलाक़ात की और बताया कि स्वतंत्र अल्बर्टा अमेरिका को क्या दे सकता है. इसमें अमेरिका के रास्ते प्रशांत महासागर तक संभावित तेल पाइपलाइन बनाने का प्रस्ताव भी शामिल था.
हालांकि, दुनिया के बाकी देश कनाडा के लिए ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस मतदान पर शायद कुछ समय के लिए ही ध्यान दें. इस मतदान ने कनाडा में समुद्र तट से समुद्र तट तक, पूरे देश में चर्चाओं और चिंताओं को जन्म दिया है.
कार्नी की योजना

टोरंटो विश्वविद्यालय के मंक स्कूल ऑफ ग्लोबल अफेयर्स एंड पब्लिक पॉलिसी की संस्थापक निदेशक प्रोफ़ेसर टेनिस स्टीन कहती हैं, "कनाडा से अलग होने के लिए मतदान होने की स्थिति को छोड़ दें, तो अमेरिका को छोड़कर ज़्यादातर विदेशी सरकारों की कनाडा की घरेलू राजनीति में बहुत कम दिलचस्पी है."
उन्होंने बताया, "विदेशी निवेशकों का ध्यान इस बात पर है कि बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा होने में कितना समय लगेगा, निवेश पर कितना रिटर्न मिलेगा. नियम कितने स्थिर और अनुमानित होंगे."
उनका यह बयान कार्नी की उन बड़ी परियोजनाओं की लंबी सूची के संदर्भ में है, जिनके ज़रिए वह भविष्य में आर्थिक विकास को तेज़ करना चाहते हैं. इन सभी परियोजनाओं पर भारी ख़र्च आएगा और कई को पूरा होने में वर्षों लगेंगे.
इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रशांत तट तक एक प्रस्तावित तेल पाइपलाइन भी शामिल है. इससे अल्बर्टा के तेल के लिए एशियाई बाज़ारों तक पहुँचने के नए अवसर खुलेंगे. इस क़दम से अल्बर्टा की लंबे समय से चली आ रही उस शिकायत का भी समाधान हो सकता है कि पर्यावरण संबंधी नियमों समेत फेडरल सरकार की नीतियों ने उसकी अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को सीमित कर दिया है.
पिछले सप्ताह अल्बर्टा में एक रैली के दौरान कार्नी की इस टिप्पणी पर सबसे ज़ोरदार और सबसे देर तक तालियां बजीं कि यह पाइपलाइन "अमेरिका पर हमारी निर्भरता कम करेगी."
सोमवार को हुए मतदान के बाद जलवायु एक्शन और वित्त मामलों के पूर्व संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत कार्नी ने कहा कि अल्बर्टा को केंद्र में रखकर "वैश्विक ऊर्जा महाशक्ति के रूप में अपनी पूरी क्षमता को साकार करना" होगा.
अब ऐसा लगता है कि राजनीतिक और आर्थिक दबाव उनके पर्यावरण संरक्षण से जुड़े रिकॉर्ड पर भारी पड़ रहे हैं.
कार्नी को लोकप्रियता

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"कनाडा को मज़बूत बनाओ" कार्नी का मूलमंत्र रहा है. पिछले साल की शुरुआत में जब उन्होंने राजनीति में क़दम रखा था, तब उन्हें राजनीति का बिल्कुल नया खिलाड़ी माना जाता था.
देश के भीतर, जनमत संग्रह में शामिल नौ अन्य सवालों के अंतिम नतीजों के दूरगामी असर हो सकते हैं. इन सवालों में प्रांतों को अधिक अधिकार देने, प्रवासियों को लेकर लागत और संविधान में संभावित बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे.
इन नतीजों से कनाडा के बाक़ी नौ प्रांतों और तीन क्षेत्रों के बीच बहस तय है. इनसे जुड़े समझौते बन भी सकते हैं और बिगड़ भी सकते हैं. इन सभी प्रांतों और क्षेत्रों की अपनी-अपनी शिकायतें हैं.
प्रधानमंत्री को उस समय अपना बचाव करना पड़ा है, जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह नए राजनीतिक गठबंधन और व्यापारिक साझेदारियां बनाने के लिए विदेश यात्राओं और अपने आकर्षक कूटनीतिक प्रयासों पर बहुत अधिक समय खर्च कर रहे हैं. इनमें यूरोपीय संघ की सहयोगी सदस्यता का एक अभूतपूर्व प्रस्ताव भी शामिल है, जिसका भविष्य अब भी अनिश्चित है.
हाल ही में उन्होंने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज़ में जवाब दिया, "मैं दोनों काम कर सकता हूं और मुझे दोनों करने की ज़रूरत है." इसके बाद उन्होंने संसद के पिछले सत्र में पारित 16 से अधिक बिलों का ज़िक्र किया. इनमें बड़े कर सुधारों, सार्वजनिक सुरक्षा और ईंधन की क़ीमतों से जुड़े बिल शामिल थे.
फ़िलहाल, कनाडा में कार्नी की लोकप्रियता बढ़ी हुई है और वह जनमत सर्वे में आगे चल रहे हैं. यह स्थिति अल्बर्टा में भी दिखाई दे रही है, जहाँ परंपरागत रूप से उनकी लिबरल पार्टी को समर्थन नहीं मिलता. कार्नी का यह लंबा "राजनीतिक हनीमून" ऐसा दौर है, जिससे कई संकटों से घिरे नेता ईर्ष्या कर सकते हैं.
ट्रंप की धमकियों के जवाब में कार्नी के बेबाक और दृढ़ रुख़ ने भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी छवि को मज़बूत किया है. इसमें जवाबी टैरिफ़ लगाने जैसे क़दम भी शामिल हैं. यह उस देश के लिए एक अप्रत्याशित बदलाव है, जिसे अक्सर दुनिया के बड़े फ़ैसले लेने वाले मंचों पर जगह नहीं मिली और कभी-कभी तो उसे "उबाऊ" तक कहकर ख़ारिज कर दिया गया.
अमेरिका से टकराव के ख़िलाफ़ राष्ट्रवाद

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कनाडा के लिए इस बेहद अहम सप्ताह में द इकोनॉमिस्ट पत्रिका ने अपने कवर पर कार्नी को जगह दी. कवर पर उनके दांतों के बीच लाल रंग का मेपल लीफ (कनाडा का राष्ट्रीय प्रतीक) दिखाया गया है.
पत्रिका की एक हेडलाइन में लिखा है, "मार्क कार्नी बताते हैं कि मिडिल पावर वाले देश ख़तरनाक दुनिया से कैसे निपट सकते हैं." लेख में कनाडा की कमज़ोरियों पर भी ध्यान दिया गया है, जिनमें अल्बर्टा में हुआ मतदान भी शामिल है.
राजनीति विज्ञानी और जल्द प्रकाशित होने वाली किताब ऑन नेशनलिज़्म के लेखक डेविड मॉस्क्रॉप कहते हैं, "इस मतदान से व्यापक रूप से यह निष्कर्ष निकल सकता है कि कनाडा की एकता मज़बूत स्थिति में है."
लेकिन वह सवाल भी उठाते हैं, "डोनाल्ड ट्रंप के जाने के बाद क्या होगा, जब कनाडा के पास ऐसा कोई एक मुखर और विवादास्पद निशाना नहीं रहेगा, जिसके ख़िलाफ़ कनाडाई लोग राष्ट्रीय ध्वज के इर्द-गिर्द एकजुट हो सकें?"
हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता से पीछे हटने के कार्नी के फ़ैसले ने कनाडा में राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की एक नई लहर पैदा की थी. लेकिन अगर उस देश के साथ व्यापार युद्ध लंबा खिंचता है, जहां परंपरागत रूप से कनाडा का 70 प्रतिशत निर्यात जाता है, तो कनाडाई लोगों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में और अधिक आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.
लेकिन आज का दिन मेपल लीफ वाले कनाडाई झंडे को पूरे जोश से लहराने का है.
कनाडा के सार्वजनिक प्रसारक सीबीसी की पत्रकार जेनिस मैकग्रेगर ने देशभर में जारी घटनाक्रम की लगातार कवरेज के दौरान कहा, "यह टीम कनाडा की जीत है और उसके लचीलेपन का प्रमाण है."
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