चीन ने विश्व बैंक को पीछे छोड़ा

चीन ने विकासशील देशों को कर्ज देने के मामले में विश्व बैंक को पीछे छोड़ दिया है.
फ़ाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार चीन के विकास बैंक और आयात-निर्यात बैंक ने पिछले दो वर्षों में 110 अरब डॉलर के ऋण विभिन्न सरकारों और निजी कंपनियों को वितरित किए.
ये विश्व बैंक के ऋण वादों से 10 फ़ीसदी ज्यादा है.
विश्व बैंक ने वित्तीय संकट के दौरान वर्ष 2008 से 2010 के बीच सौ अरब डॉलर के ऋण स्वीकृत किए हैं.
चीन ने इस दौरान वेनेज़ुएला, रूस और ब्राजील के साथ तेल सौदों में कर्ज देने का वादा किया.
अख़बार का कहना है कि उसने ये आंकड़े बैंक, ऋण लेने वालों और चीन सरकार की घोषणाओं से जुटाए हैं.
बढ़ता दबदबा
विश्लेषकों का कहना है कि ये चीन की आर्थिक ताकत का प्रतीक है. साथ ही ये चीन के विकासशील देशों से बढ़ते संबंधों को भी दर्शाता है.
इसके जरिए चीन पश्चिमी देशों को निर्यात पर भी अपनी निर्भरता कम करता नज़र आ रहा है.
कुछ ऋण युआन में दिए गए, विश्लेषक मानते हैं कि दरअसल चीन अपनी मुद्रा को दुनियाभर में प्रचलित करना चाहता है.
ग़ौरतलब है कि चीन और अमरीका में चीनी मुद्रा युआन की विनिमय दर को लेकर भारी मतभेद हैं.
अमरीका का मत रहा है कि चीन जानबूझ कर अपनी मुद्रा को कमज़ोर रखता है ताकि उसे निर्यात में फ़ायदा हो. चीन पश्चिम देशों के इस मत से सहमत नहीं है.
विश्व बैंक ने भी माना था कि मुद्रा विनिमय दर को लेकर चीन और पश्चिमी देशों में तनाव है.

























