शो का समय बदलना सही या ग़लत ???

राखी सावंत
इमेज कैप्शन, रियेल्टी शो बिग बॉस और राखी का इंसाफ़ अपने प्रसारण समय को लेकर इन दिनों सुर्खियों में हैं.
    • Author, अनुभा रोहतगी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित

टीवी रियेल्टी शो ‘बिग बॉस’ और ‘राखी का इंसाफ़’ अपने प्रसारण के समय को लेकर इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं.

इनके प्रसारण समय के बारे में किसी भी तरह की सेंसरशिप कितनी सही है या ग़लत, इस बारे में बीबीसी ने इस क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों की राय जानी.

‘बिग बॉस’ के पहले संस्करण का हिस्सा रही अभिनेत्री कश्मीरा शाह इस तरह के आदेश को सही नहीं मानतीं.

कश्मीरा कहती हैं, “हम एक प्रजातंत्र हैं. जब हम अपना प्रधानमंत्री चुन सकते हैं तो फिर ये क्यों नहीं फ़ैसला कर सकते कि कौन सा टीवी प्रोग्राम किस समय देखें?”

प्राइमटाइम पर दिखाए जा रहे इन कार्यक्रमों की तथाकथित आपत्तिजनक सामग्री के चलते सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इनके प्रसारण का समय बदल कर देर रात रखने का आदेश दिया था. लेकिन ‘बिग बॉस’ दिखाने वाले चैनल कलर्स के मालिकों ने इस आदेश के ख़िलाफ़ मुम्बई हाई कोर्ट के दरवाज़े खटखटाया जिसके बाद कोर्ट ने आदेश को स्थगित कर दिया. मामले की अगली सुनवाई 22 नवम्बर को होगी.

कश्मीरा शाह कहती हैं, “वैसे भी दर्शक के हाथ में टीवी रिमोट है. आपके पास इतने सारे चैनल्स हैं, ये आपकी मर्ज़ी है कि आप कौन सा चैनल देखते हैं. मुझे लगता है कि समय बदलने के बावजूद लोग ऐसे कार्यक्रम देखेंगे.”

इस बारे में टीवी समीक्षक पूनम सक्सेना का कहना है, “भले ही दर्शक के हाथ में रिमोट होता है लेकिन फिर भी जिन कार्यक्रमों की सामग्री आपत्तिजनक होती है, दुनिया भर में उन्हें देर रात ही दिखाया जाता है, न कि प्राइम टाइम पर.”

पूनम समय बदलने को ग़लत नहीं मानती हैं हालांकि वो सरकारी हस्तेक्षप के पक्ष में नहीं हैं.

वो कहती हैं, “सैद्धांतिक तौर पर सरकार की मनोरंजन, टेलीविज़न इत्यादि में दखलअंदाज़ी नहीं होनी चाहिए. हालांकि इन कार्यक्रमों में अभद्र या आपत्तिजनक भाषा को बीप के ज़रिए दबा दिया जाता है, लेकिन ‘बिग बॉस’ या फिर ‘राखी का इंसाफ़’ में जिस तरह का चीखना-चिल्लाना, लड़ाई-झगड़ा दिखाया जाता है वो बहुत ही घटिया है. इसलिए मुझे लगता है कि अगर इन्हें देर रात दिखाया जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं है. जिसे ऐसे कार्यक्रम देखने हैं वो देर रात भी इन्हें देख सकते हैं. मुझे समझ नहीं आता कि समय बदलने को लेकर इतना हंगामा क्यों मच रहा है.”

पामेला एंडरसन
इमेज कैप्शन, हॉलीवुड अभिनेत्री पामेला एंडरसन हाल ही में बिग बॉस से जुड़ी हैं.

बेगम नवाज़िश अली के नाम से मशहूर और बिग बॉस सीज़न फ़ोर से बाहर हुए पाकिस्तानी टीवी कलाकार अली सलीम भी इस तरह की सेंसरशिप के ख़िलाफ़ हैं.

अली सलीम कहते हैं, “मैं कभी भी इस तरह की सेंसरशिप का समर्थन नहीं कर सकता. इन सब बातों का चैनल को ख़ुद ही फ़ैसला करना चाहिए. ‘बिग बॉस’ बहुत ही लोकप्रिय शो है और इसे बहुत तादाद में लोग देखते हैं. इसलिए ये फ़ैसला लोगों पर ही छोड़ देना चाहिए कि वो नौ बज़े वो शो देखना चाहते हैं या नहीं.”

इन कार्यक्रमों में दिखाई जाने वाली सामग्री पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

इस बारे में कश्मीरा शाह कहती हैं, “जितना लोग कह रहे हैं मुझे नहीं लगता बिग बॉस सीज़न फ़ोर में उतनी अभद्रता है. हां, हल्की-फुल्की छेड़खानी ज़रूर है जो असली ज़िंदगी में भी होती है.”

वहीं अली सलीम मानते हैं कि उनके शो से निकलने के बाद कुछ हाउज़मेट्स द्वारा ख़राब या अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है.

पूनम सक्सेना कहती हैं, “रेटिंग्स बढ़ाने के लिए चैनल्स अपने कार्यक्रमों को ज़्यादा-से-ज़्यादा अभद्र, घटिया और विवादास्पद बनाते हैं. क़ायदे से चैनल्स को खुद ही ऐसे कार्यक्रमों को देर रात के स्लॉट में दिखाना चाहिए लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है.”