तो फिर कांग्रेस ईमानदारी से कहे कि यहां गांधी ही अध्यक्ष बनेंगे: शहज़ाद पूनावाला

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गुजरात विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
महाराष्ट्र कांग्रेस के सचिव शहज़ाद पूनावाला ने पार्टी के शीर्ष पद की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एक व्यक्ति के 'चयन' के लिए 'चुनाव' का दिखावा किया जा रहा है.
दरअसल शहज़ाद के बयान के निशाने पर राहुल गांधी को माना जा रहा है क्योंकि चर्चा है कि जल्द ही वह पार्टी के अध्यक्ष पद का ज़िम्मा संभाल सकते हैं. अभी वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं.
वहीं कांग्रेस का कहना है कि शहज़ाद सिर्फ़ पब्लिसिटी के लिए ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं.
इस सब के बीच चर्चा इस बात की हो रही है कि कल तक टीवी चैनलों पर कांग्रेस का पक्ष रखते नज़र आने वाले शहज़ाद आज अचानक पार्टी के ख़िलाफ़ क्यों बोल रहे हैं.

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कौन हैं शहज़ाद पूनावाला?
टीवी चैनलों की चर्चाओं में कांग्रेस का पक्ष रखने वाले शहज़ाद पूनावाला मूलत: पुणे से हैं, जहां उनका होटल और रेस्तरां का कारोबार है.
शहज़ाद और उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला को पुणे से कांग्रेस के सांसद रहे सुरेश कलमाड़ी का करीबी माना जाता है.
जिस वक़्त कलमाडी 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन समिति के चेयरमैन थे, शहज़ाद और तहसीन मिलकर उनकी तरफ़ से मीडिया से संपर्क करते थे.
ख़ास बात यह है कि जब कलमाडी को कॉमनवेल्थ खेलों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जेल जाना पड़ा, तब शहज़ाद और तहसीन ख़ुद को विवाद से दूर रखने में सफल रहे थे.
शहज़ाद ने कानून की पढ़ाई की है और वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील मनीष तिवारी के साथ काम कर चुके हैं.

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वह अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों को उठाते रहे हैं. उन्होंने गोरक्षा के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसी साल जून में मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ 'मानव सुरक्षा कानून' नाम का बिल ड्राफ़्ट करने में भी वह शामिल थे.
ट्विटर हैंडल पर अपना नाम 'शहज़ाद जय हिंद' लिखते हुए ख़ुद को उन्होंने नेहरूवादी, गांधीवादी और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता बताया है. उन्होंने लिखा है, "मेरा धर्म इस्लाम है, संस्कृति हिंदू है और विचारधारा भारतीय है."
क्या है कांग्रेस से नाराज़गी की वजह?
शहज़ाद बुधवार को यह कहकर सुर्ख़ियों में आ गए कि अगर राहुल गांधी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं तो पहले उन्हें उपाध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए.
बीबीसी से बातचीत में शहज़ाद ने कहा, "कांग्रेस के संविधान के मुताबिक अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ता प्रतिनिधि चुनते हैं और वे प्रतिनिधि वोट देते हैं. मगर अभी जो हो रहा है, वह 'इलेक्शन' नहीं, 'सेलेक्शन' है."

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उन्होंने कहा, "मेरे पास इसके पुख़्ता सबूत हैं कि कम से कम एक राज्य में चयन के माध्यम से प्रतिनिधि नियुक्त किए गए हैं. इस आधार पर कि वे वफ़ादार और चाटुकार हैं. उन्हें कार्यकर्ताओं ने नहीं चुना."
'एक व्यक्ति का हो रहा है चयन'
शहज़ाद कहते हैं, "प्रदेश अध्यक्ष एआईसीसी की अध्यक्ष सोनिया गांधी जी द्वारा बनाए गए हैं, जो राहुल गांधी जी की माता हैं. उन्होंने ही राहुल को उपाध्यक्ष बनाया है, वह चुने नहीं गए हैं. तो पूरे सिस्टम में 'चुनाव' की कोई जगह नहीं है, 'चयन' हो रहा है. और इस सिस्टम में कोई लड़ ही नहीं सकता और न ही किसी के लड़ने की अहमियत होगी. क्योंकि सिर्फ़ एक व्यक्ति का चयन हो रहा है."
आगे उन्होंने कहा, "कांग्रेस के अधिकृत प्रवक्ता ने दस दिन पहले ही बयान दिया है कि अगले 100 सालों तक कांग्रेस के अध्यक्ष गांधी ही रहेंगे. जबकि अभी तक उन्होंने नामांकन भी नहीं भरा है. इससे भी साबित होता है कि यह सिस्टम फिक्स्ड है."
"मैंने ये शंकाएं पार्टी के नेतृत्व तक पहुंचाईं, काफ़ी सालों से समय मांग रहा था और वंशवाद पर रूबरू होने की कोशिश कर रहा था. मगर कभी जवाब नहीं मिला. अब इन दो मुद्दों पर मैंने लीडरशिप से बात की तो चिट्ठियां लीक की गईं."

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क्या कहती है कांग्रेस?
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोच चव्हाण ने तो यहां तक कह दिया है कि शहज़ाद पूनावाला कांग्रेसी हैं ही नहीं.
महाराष्ट्र कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर मीडिया से बात कर रहे चव्हाण का वीडियो पोस्ट किया गया है.
इसमें वह कह रहे हैं, "हम देख रहे हैं कि कुछ लोग राहुल जी की आलोचना कर रहे हैं. मगर मुझे नहीं लगता इसमें कोई सच्चाई है. सच्चे कांग्रेसी ऐसे विषयों पर बात नहीं करते."
शहज़ाद के संबंध में चव्हाण कहते हैं, "वह कांग्रेसी नहीं है. ढाई साल में शायद ही वो पार्टी के किसी मामले में शामिल हुए हों. वह राहुल जी का नाम इस्तेमाल करके पब्लिसिटी हासिल करना चाह रहे हैं. इसे महत्व नहीं देना चाहिए."
मेरे पास पार्टी पदाधिकारी होने के सबूत: पूनावाला
मगर शहज़ाद का कहना है कि वह कांग्रेस से सदस्य हैं और उनके पास इसके सबूत भी हैं.
बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जिन लोगों का राजनीतिक गॉडफादर नहीं है, वे मेरे साथ हैं. मगर पार्टी में किसी के अंदर साहस नहीं है. मैंने परिवारवाद और चुनाव पर सवाल उठाए तो पार्टी ने कहा कि मैं पार्टी का मेंबर ही नहीं हूं. जबकि मेरे पास मेरे अपॉइंटमेंट लेटर है कि मैं सेक्रेटरी के तौर पर नियुक्त हुआ हूं."
"मेरे पास जनार्दन द्विवेदी की तरफ़ से जारी 12 अप्रैल 2016 की प्रेस रिलीज़ है, जिसमें मेरी नियुक्ति का ज़िक्र है. 5 दिसंबर 2014 का अजय माकन जी के हस्ताक्षर वाला पत्र है वह लेटर भी है जिसमें मुझे राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की ट्रेनिंग में शामिल किया गया. जब मेरी पार्टी परिवारवाद के ख़िलाफ़ बोलने वालों के साथ इस तरह का बर्ताव करती है, तो लोग बोलने से डरते हैं."
भाई तहसीन भी हुए नाराज़
शहज़ाद के रुख़ से उनके बड़े भाई तहसीन पूनावाला भी नाराज़ हैं. तहसीन ने मीडिया से बात करते हुए और ट्वीट करके कहा है कि शहज़ाद को उचित मंच पर शिकायत करनी चाहिए थी.
उन्होंने ट्वीट किया है, "शहज़ाद पूनावाला को मैंने हमेशा अपने बच्चे की तरह समझा है. उन्हें ऐसा करते देख मुझे दुख पहुंचा है. इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. जीतने के लिए हमें कांग्रेस और इसके सहयोगियों को मज़बूत करना चाहिए. किसी भी शिकायत को उचित मंच पर उठाया जाना चाहिए था. मैं और मेरी पत्नी ख़ुद को उनसे अलग करते हैं."
भाई की नाराज़गी की वजह क्या है? इस बारे में पूछे जाने पर शहज़ाद ने कहा, "मेरे भाई चाहते थे कि मैं पहले उनसे बोलता. अगर मैं ऐसा करता तो वो मुझे बोलने नहीं देते क्योंकि ये मेरी अंतरात्मा की आवाज़ थी."
उन्होंने कहा, "उनकी वफ़ादारी परिवार से है, मेरी वफ़ादारी गांधी जी के उसूलों और मुल्क से है. गांधी जी हमारी पार्टी के सबसे बड़े नेता थे, मगर उन्होंने अपने बच्चों को राजनीति में नहीं धकेला. राजनीति, और ख़ासकर कांग्रेस में जिस तरह का परिवारवाद आ गया है, उसके ख़िलाफ़ बोलना भी ज़रूरी थी."
ग़ौरतलब है कि तहसीन पूनावाला की पत्नी मोनिका वाड्रा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कज़न हैं.
'मुझे अध्यक्ष नहीं बनना'
शहज़ाद से जब यह पूछा गया कि क्या वह अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो उनका जवाब था, "न मैं चुनाव लड़ने के लिए यह कर रहा हूं और न ही मुझे अध्यक्ष बनना है. मैं बस यह कह रहा हूं कि परिवारवाद से लड़ने के लिए नियम बन जाना चाहिए कि एक परिवार में एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाना चाहिए. फिर मेरा परिवार हो या राहुल जी का परिवार हो."

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उनका कहना है, "इस नियम के आने से परिवारवाद खत्म होगा और हमारी पार्टी जो इतना खराब प्रदर्शन कर रही है, उसमें सुधार होगा. मैं कांग्रेस के लिए काम करता हूं और मेरा पूरा एक्टिविज़्म कांग्रेस की तरफ रहा है. संघ परिवार के खिलाफ भी लड़ता हूं और परिवारवाद के खिलाफ भी लड़ता हूं और इस लड़ाई को जारी रखूंगा."
शहज़ाद कहते हैं, "अगर कांग्रेस सिस्टम में सुधार नहीं कर सकती तो उसे ईमानदारी से कह देना चाहिए कि हम ऐसी पार्टी हैं, जहां गांधी ही अध्यक्ष बनेंगे, वंशवाद विरोधियों के लिए यहां जगह नहीं है और हमारी पार्टी इसी तरह से चलेगी. राहुल जी की तरह यह नहीं कहना चाहिए कि हम बदलाव कर रहे हैं."
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