'नक्सल नीति पर पुनर्विचार'

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, छत्तीसगढ़
- प्रकाशित
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में मंगलवार शाम सीआरपीएफ़ की टुकड़ी पर हुए नक्सली हमले के बाद रणनीति की समीक्षा के लिए बुधवार को बुलाई गई आपात बैठक में रणनीति पर पुनर्विचार करने का फ़ैसला किया गया.
क़रीब चार घंटे तक चली बैठक ख़त्म होने के बाद राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रामनिवास ने पत्रकारों को यह जानकारी दी.
घातक हमला
सीआरपीएफ़ की टुकड़ी पर घात लगाकर किए गए नक्सली हमले में 26 जवान मारे गए थे और आठ गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
बैठक में मुख्यमंत्री रमन सिंह, गृहमंत्री, राज्य के पुलिस माहानिदेशक, प्रमुख सचिव, गृह सचिव और अन्य बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक से पत्रकारों को पूरी तरह से दूर रखा गया.
इस हमले के बाद 25 जवानों का कोई अता पता नहीं था और अंधेरा घिर जाने के बाद उनकी तलाश बंद कर दी गई थी.लेकिन बुधवार सुबह राज्य के पुलिस प्रमुख विश्वरंजन ने बताया कि सभी लापता जवान कैंप में वापस लौट आए हैं.
पिछले तीन महीनों में माओवादियों की ओर से सुरक्षाबलों पर ये तीसरा बड़ा हमला है और एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति पूरी तरह से नाकाम दिखी है.
सुरक्षा बलों के जवान माओवादियों के लिए बिल्कुल आसान निशाना साबित हो रहे हैं.
मुश्किल इलाक़ा
जहाँ ये हमला हुआ वहाँ से लगभग चार किलोमीटर की ही दूरी पर सीआरपीएफ़ का कैंप है लेकिन वहाँ भी अंधेरा घिरने के बाद मदद पहुँचाना असंभव सा है.
घायलों को लाने के लिए जो हेलीकॉप्टर भेजा गया था वह भी वहाँ उतर नहीं पा रहा था. उसे गाड़ियों की रोशनी में बड़ी मशक्कत के बाद उतारा गया.
घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई गई है और आशंका जताई गई है कि मरने वालों की संख्या और अधिक हो सकती है.
घायलों को नारायणपुर और जगदलपुर के अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की कार्रवाई के विरोध में पाँच राज्यों में मंगलवार की रात 12 बजे से दो दिनों के बंद का आह्वान किया है और बंद शुरू होने से पहले यह हमला हुआ है.
सीआरपीएफ़ के अधिकारियों के अनुसार सीआरपीएफ़ की 39वीं बटालियन के 70 जवानों का एक दल बंद को ध्यान में रखते हुए नारायणपुर से ओरछा मार्ग पर बारूदी सुरंग आदि का पता लगाने के लिए जा रहा था.

अधिकारियों का कहना है कि यह 'रोड ओपनिंग दल' था.
अधिकारियों के अनुसार नारायणपुर से 32 किलोमीटर दूर धोड़ई गाँव के पास बड़ी संख्या में हथियारबंद नक्सलियों ने सीआरपीएफ़ के इस दल पर घात लगाकर हमला किया.
अधिकारियों का कहना है कि यह बस्तर का अबूझमाड़ का इलाक़ा है जिसे नक्सली 'लिबरेटेड ज़ोन' कहते हैं यानी यह नक्सली दबदबे वाला इलाक़ा है.
अभी यह साफ़ नहीं हुआ है कि इस मुठभेड़ में नक्सलियों को कितना नुक़सान हुआ है.
तीसरा बड़ा हमला
छत्तीसगगढ़ में पिछले तीन महीनों में यह नक्सलियों का तीसरा बड़ा हमला है.
छह अप्रैल को दंतेवाड़ा में गश्त पर निकले सीआरपीएफ़ के जवानों के एक दल पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था जिसमें सीआरपीएफ़ के 76 जवान मारे गए थे.
इस हमले को केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने रणनीतिक चूक बताया था.
इसके बाद 17 मई को नक्सलियों ने बस्तर इलाक़े में ही एक यात्री बस को बारूदी सुरंग लगाकर उड़ा दिया था.
इस बस में पुलिस और विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) सवार थे. इस हमले में कुछ आम नागरिकों सहित 35 लोगों की मौत हो गई थी.
इन हमलों के बाद से छत्तीसगढ़ सहित सभी नक्सल प्रभावित इलाक़ों में सेना के उपयोग या सहायता लेने पर विचार चल रहा है.
नक्सलियों ने इन हमलों को उनके ख़िलाफ़ चल रहे 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' के खिलाफ बदले की कार्रवाई बताया है.

























