दो सौ साल पुरानी दरगाह में आग के बाद प्रदर्शन, तनाव

इमेज स्रोत, BBC World Service
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
- प्रकाशित
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में एक 200 साल पुरानी दरगाह में आग लगने के बाद श्रीनगर के खानयार में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया है, सांप्रदायिक हिंसा की संभावना को देखते हुए पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है.
रहस्यमयी तरीके से लगी आग से 200 साल पुरानी दस्तगीर दरगाह को खासी क्षति पहुँची है और श्रीनगर में अतिरिक्त पुलिस बलों को तैनात कर दिया गया है.
श्रीनगर के एक इलाके में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की क्रोधित भीड़ पर आँसू गैस के गोले छोड़े जिससे कई युवक घायल हो गए.
सुप्रसिद्ध सूफी संत शेख अब्दुल कादिर से संबंधित यादगाव वस्तुओं को दरगाह से बचा लिया गया है और प्रशासन ने जाँच के आदेश दिए हैं.
पथराव के जवाब में आँसू गैस के गोले
इस दरगाह में 12वीं सदी के प्रमुख सूफी संत शेख अब्दुल कादिर से जुड़ी यादें संभाल कर रखी गई हैं. शेख अब्दुल कादिर को सूफी पंथ की 'कदरिया' शाखा का जनक माना जाता है.
ऐसा कहा जाता है कि सूफी संत शेख अब्दुल कादिर कभी खुद इस दरगाह में नहीं आए लेकिन 14वीं सदी में उनके अनुयायी शेख सखी शाह ने उनसे जुड़ी यादगार वस्तुओं को यहां लाकर इस दरगाह में संभाल कर रखा था.
इस घटना की खबर फैलते ही खानयार में युवक जमा होने शुरु हो गए और उन्होंने पुलिस पर पथराव किया जिसके जवाब में पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े.
प्रदर्शनकारियों ने दमकल कर्मचारियों को भी निशाना बनाया क्योंकि लोगों का आरोप था कि उन्होंने घटनास्थल पर पहुँचने में देर की थी.
घटनास्थल पर मौजूद एक ड्राइवर ने बीबीसी को बताया, "दरगाह पुरानी देवदार की लकड़ी से बनी थी और पहले कुछ लोगों ने हमें ये कहते हुए पानी डालने से रोका कि पानी से दरगाह अपवित्र हो जाएगी. इससे बड़ी समस्या पैदा हो गई और पूरी तीन मंजिला इमारत को आग लग गई."
अन्य प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग सोमवार तड़के लगी.
धार्मिक संगठनों और नेताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है. हाल में कश्मीर में वाहाबी और बरेलवी संप्रदायों के बीच प्रतिस्पर्धा और मतभेद रहे हैं और इसे देखते हुए शहर में अतिरिक्त पुलिस बलों को तैनात कर दिया गया है.

























