'भारतीयों की देश की दिशा पर निराशा बढ़ी, सरकार को दोषी ठहराया'

भारतीय अर्थव्यवस्था
इमेज कैप्शन, भारत में आर्थिक विकास दर घट रही है और महँगाई के चलते सरकार की मुश्किलें बढ़ी हैं
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अमरीकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर ने 21 देशों में हुए अपने सर्वेक्षण में पाया है कि भारत में जहाँ 2011 में 51 प्रतिशत लोग देश की दिशा से संतुष्ट थे वहीं 2012 में ऐसे लोगों की गिनती घटकर 38 प्रतिशत रह गई है.

प्यू रिसर्च सेंटर ने ग्लोबल एटिट्यूड्स प्रॉजेक्ट यानी दुनिया के लोगों का रवैया जानने की परियोजना के तहत 21 देशों में 26,210 लोगों के बीच 17 मार्च 17 से 20 अप्रैल के बीच सर्वेक्षण कराया.

इस अध्ययन में पाया गया कि केवल चीन (82 प्रतिशत), जर्मनी (53 प्रतिशत), मिस्र (53 प्रतिशत) में आधी से अधिक जनसंख्या का मानना है कि उनका देश सही दिशा में जा रहा है.

उधर ग्रीस (दो प्रतिशत), इटली (11 प्रतिशत) और पाकिस्तान (12 प्रतिशत) के लोग देश की दिशा और अपनी दशा से खासे असंतुष्ट हैं. अमरीका में केवल 29 प्रतिशत लोग मानते हैं कि कुल मिलाकर देश सही स्थिति की ओर बढ़ रहा है.

पूँजीवाद और अगले साल पर भी राय

इस सर्वेक्षण से ये भी सामने आया है कि अब कुछ सालों से चल रहे वित्तीय मंदी के दौर में सर्वेक्षण में लिए गए 21 में से मात्र चार देश ऐसे हैं जहाँ जनसंख्या का बहुमत मानता है कि अर्थव्यवस्था अच्छी चल रही है.

ये देश हैं चीन, जर्मनी, ब्राजील और तुर्की. जबकि ग्रीस, इटली, स्पेन, जापान और पाकिस्तान में 10 प्रतिशत से कम लोग मानते हैं कि अर्थव्यवस्था की स्थिति सही है.

अमरीका में ऐसा मानने वाले लोगों की संख्या में 2011 के 18 प्रतिशत के मुकाबले में वृद्धि हुई है और 2012 में 31 प्रतिशत अर्थव्यस्था की स्थिति को अच्छा मानते हैं.

वैश्विक आर्थिक संकट के कारण पूँजीवाद के लिए समर्थन में भी कमी आई है.

सर्वेक्षण वाले 21 में से केवल 11 देशों में आधे या कम लोग मानते हैं कि मुक्त बाजार व्यवस्था लोगों के लिए बेहतर है चाहे कुछ लोग अमीर है और कुछ अत्यंत गरीब हैं.

भारत में 61 प्रतिशत लोग मुक्त बाजार व्यवस्था को बेहतर मानते हैं जबकि 25 प्रतिशत इससे सहमत नहीं हैं.

गौरतलब है कि 21 देशों में से केवल छह में आधे से अधिक लोग मानते हैं कि अगले 12 महीनों में उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. ये देश हैं चीन, ब्राजील, ट्यूनिशिया, अमरीका, मेक्सिको और मिस्र.

भारत में 45 प्रतिशत लोग ही मानते हैं कि आर्थिक स्थितियाँ अगले एक साल में बेहतर हो जाएँगी.

महत्वपूर्ण है कि भारत में 92 प्रतिशत लोग बद्तर आर्थिक स्थिति के लिए सरकार को दोषी मानते हैं जबकि 17 प्रतिशत बैंकों, छह प्रतिशत अमरीका और दो प्रतिशत यूरोप के हालात को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं.

लेकिन भारतीय खुद की आलोचना भी करते हैं और 64 प्रतिशत स्थितियों के लिए अपने आप को जिम्मेदार मानते हैं.