पर्यावरण मंज़ूरी कंपनियों के ठेंगे पर

छत्तीसगढ़ उद्योग
    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

अगर आपको लगता है कि किसी उद्योग को शुरू करने के लिए ढेर सारे क़ानूनों का पालन करना पड़ता है, तो आपको ये जानकर हैरानी होगी कि छत्तीसगढ़ में दर्जन भर से अधिक कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने केंद्र या राज्य के ज़रूरी सरकारी विभागों से मंजूरी लिए बिना ही निर्माण कर लिया है.

उद्योग लगाने के लिए सबसे पहली महत्वपूर्ण क़ानूनी ज़रूरत होती है केंद्रीय पर्यावरण, वन मंत्रालय और राज्य के पर्यावरण विभाग से उसकी सहमति लेना.

इसके बाद ही उद्योग के लिए पानी, बिजली, कच्चा माल की अनुमति मिलती है. दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अनुमति के बाद ही आप कोई उद्योग लगा सकते हैं.

सरकारी उदासीनता

छत्तीसगढ़ उद्योग

लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसे क़ानून को किनारे करके कंपनियां डंके की चोट पर अपना कारोबार चला रही हैं.

दूसरी ओर सरकार ने निचली अदालतों में इन कंपनियों के ख़िलाफ़ मामला दायर कर चुप्पी साध ली है.

जिन कंपनियों के ख़िलाफ़ बिना उचित अनुमति के उद्योग शुरू करने या उसका विस्तार करने का आरोप है, उनमें जिंदल पॉवर लिमिटेड, कोरबा वेस्ट पॉवर कंपनी लिमिटेड (अब अडानी पॉवर का हिस्सा), जीएमआर छत्तीसगढ़ एनर्जी लिमिटेड, वीसा पॉवर लिमिटेड, गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड जैसी कंपनियाँ शामिल हैं.

जिंदल के प्रवक्ता मामले के अदालत में होने का हवाला देते हुए कहते हैं, “जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड अपना हर एक काम भारतीय क़ानून के दायरे में रह कर करती है.”

अंधेर-नगरी-चौपट-राजा

रमन सिंह
इमेज कैप्शन, विपक्षी दल मुख्यमंत्री रमन सिंह पर उद्योगों को खुली छूट देने का आरोप लगा रहे हैं.

लेकिन विधायक और छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का आरोप है कि यह सब कुछ सरकार की मिलीभगत से चल रहा है.

बघेल कहते हैं, “रमन सिंह के राज में कुछ भी संभव है. उद्योगों के लिए सारे क़ानून ठेंगे पर रख दिए गए हैं और राज्य अंधेर-नगरी-चौपट-राजा वाली स्थिति में है.”

हालांकि राज्य के आवास एवं पर्यावरण सचिव एन. बैजेंद्र कुमार कहते हैं कि वन एवं पर्यावरण विभाग की सहमति के बिना किसी उद्योग की एक ईंट भी नहीं रखी जा सकती.

छत्तीसगढ़ उद्योग

उनका कहना है कि पर्यावरण विभाग की सहमति के बाद ही उद्योग लग सकते हैं या लगे हुए उद्योगों का विस्तार किया जा सकता है.

सरकार के पास है अधिकार

लेकिन राज्य के उद्योग मंत्री राजेश मूणत का कहना है कि राज्य में ऐसे उद्योगों की पहचान की गई है और इनके ख़िलाफ़ स्थानीय अदालतों में पहले ही पर्यावरण नियमों के तहत मामला भी दायर किया गया है.

लेकिन इन्हें जिस समय दायर किया गया था, उस समय उद्योगों ने निर्माण कार्य शुरू किया था.

अब तो इन उद्योगों में उत्पादन का काम शुरू हुए भी कई साल हो चुके हैं.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वकील अमृतो दास सरकारी कार्रवाई को हास्यास्पद बताते हुए कहते हैं कि कार्रवाई सरकार को करनी है, अदालत को नहीं.

छत्तीसगढ़ उद्योग

दास कहते हैं, “इन उद्योगों का काम तो पहले ही दिन रोक दिया जाना चाहिए था और इसका अधिकार सरकार के पास है. इसके लिए अदालत जाने की ज़रूरत नहीं है.”

अमृतो दास का कहना है कि अगर सरकार अदालत जाना ही चाहती है तो सबसे पहले इन उद्योगों के ख़िलाफ़ उसे आपराधिक मामला दर्ज करना चाहिए और इनके मालिकों-अधिकारियों को नियमानुसार गिरफ़्तार करना चाहिए.

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