अफ़ग़ानिस्तान की जेल पर आईएस ने किया हमला का दावा, 29 की मौत

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अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी हिस्से के शहर जलालाबाद के सेंट्रल जेल पर हुए हाई प्रोफाइल हमले में कम से कम 29 लोग मारे गए हैं.
ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन ने हमले की ज़िम्मेदारी ली.
ये हमला रविवार की शाम को हुआ. बंदूक़धारी चरमपंथियों ने जेल के प्रवेश द्वार के पास कार में रखे बम से धमाके किए.
ज़िले के एक प्रवक्ता के अनुसार ये लड़ाई क़रीब 20 घंटे तक चली जिनमें आठ हमलावर मारे गए. हमले के बाद क़रीब 300 क़ैदी फ़रार हो गए हैं.
सुरक्षाकर्मियों में से एक सोर्स ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि जेल में कुल 1793 क़ैदी थे, ज़्यादातर तालिबान और आईएस लड़ाके थे. इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है कि हमले का मक़सद कुछ ख़ास क़ैदियों को छुड़ाना था.
जेल में ऐसे क़ैदी भी थे जिन पर आम अपराध के आरोप थे. प्रांत के प्रवक्ता के अनुसार भाग गए 1025 क़ैदियों को पकड़ कर दोबारा जेल के अंदर लाया जा चुका है और 430 लोगों को बचाया जा चुका है.
इस हमले में 50 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. अफ़ग़ान सरकार और तालिबान के बीच युद्ध विराम के दूसरे और तीसरे दिन ये हमला हुआ है. युद्ध विराम के दौरान सैकड़ों तालिबान लड़ाकों को सरकार ने रिहा कर दिया है ताकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ सके.
तालिबान ख़ुद को आईएस का कट्टर विरोधी मानता है और उसने साफ़ कहा है कि इस हमले के पीछे उसका कोई हाथ नहीं है.
शनिवार को अफ़ग़ानिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने कहा था कि उसने जलालाबाद के नज़दीक आईएस के एक वरिष्ठ कमांडर असद उल्लाह ओरकज़ई को मार दिया है.

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अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के ख़िलाफ़ कई घातक हमलों के पीछे कमांडर असद उल्लाह ओरकज़ई का हाथ बताया जाता है.
नानगरहर ज़िला अफ़ग़ानिस्तान का वो प्रांत है जहां आईएस ने सबसे पहले अपना गढ़ बनाया था. पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने दावा किया था कि उसने आईएस के स्थानीय गुट इस्लामिक स्टेट ख़ोरासान को पूरी तरह ख़त्म कर दिया है लेकिन सच्चाई ये है कि आईएस अभी भी ज़िले में मौजूद है.
नानगरहर में इस साल कई हमले हुए हैं. मई के महीने में एक पुलिस अधिकारी के जनाज़े में मौजूद लोगों के बीच एक आत्मघाती हमला हुआ था जिनमें 32 लोग मारे गए थे.
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