ड्रग्स के खिलाफ़ लड़ाई फैला रही है हेपेटाइटिस सी

सूई से नशीली दवाएं लेने वाले 90 फ़ीसदी लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं
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एक अंतरराष्ट्रीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि <link type="page"><caption> नशीले पदार्थों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130411_drug_capital_ra.shtml" platform="highweb"/></link> के खिलाफ दुनियाभर में जारी लड़ाई <link type="page"><caption> हेपेटाइटिस-सी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/06/120620_hepatitis_e_aa.shtml" platform="highweb"/></link> की महामारी को बढ़ावा दे रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ लाखों लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नशीले दवाओं के खिलाफ कड़े क़ानूनों की वजह से सुई से नशीली दवाएं लेने वालों में संक्रमण की दर तेज़ी से बढ़ रही है.

<link type="page"><caption> आयोग ने संसाधनों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/06/120614_bihar_child_decease_aa.shtml" platform="highweb"/></link> को इसके उपचार और रोकथाम पर लगाने की जरूरत बताई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया भर में सुई के जरिए नशीली दवाएं लेने वाले एक करोड़ 60 लाख लोगों में से एक करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं.

इस वजह से संक्रमित लोगों पर लीवर संबंधी घातक बीमारियों को ख़तरा मंडरा रहा है.

नशा अपराध न हो

आयोग ने इसे और बढ़ने से रोकने के लिए सरकारों से नशीले दवाओं के उपयोग को अपराध के दायरे से बाहर रखने और योजनाएं शुरू करने की सिफारिश की है.

उसका कहना है कि इसे और फैलने से रोकने के लिए नशीली दवाओं का इस्तेमाल करने वालों को रोगाणुमुक्त सुइयां मुहैया कराई जाएं.

सात पूर्व राष्ट्रपतियों, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व प्रमुख कोफी अन्नान और अन्य नेताओं वाले एक समूह ने इसके पहले एचआईवी बढ़ने की वजह से नशीले पदार्थों के खिलाफ़ जारी लड़ाई को असफल बताया था.

आयोग की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ़ कड़े क़ानूनों वाले कुछ देशों में सूई के जरिए नशीली दवाएं लेने वाले 90 फ़ीसदी लोग हेपटाइटिस-सी से पीड़ित हैं.

पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया में तेज़ी से इसका संक्रमण फैला है. वहीं अमरीका, रूस और चीन में इससे संक्रमित लोगों की संख्या सबसे अधिक है.

क्या है हेपेटाइटिस-सी

हेपेटाइटिस-सी तेजी से फैलने वाली बीमारी है, इससे पीड़ित एक चौथाई लोगों में लीवर संबंधी घातक बीमारियां हो जाती हैं.

इसके संक्रमण बहुत दिनों तक पता भी नहीं चलता है, क्योंकि कई बार इसके लक्षण नजर ही नहीं आते और अगर आते भी हैं तो केवल बुखार, मितली और थकान जैसे लक्षण.इससे पीड़ित लोग इस बात से अनजान रहते हैं कि उन्हें कोई संक्रमण है.

हेपेटाइटिस-सी खून के जरिए होने वाला संक्रमण है.सूई से नशीली दवाएं लेने वाले बीमारियों में यह <link type="page"><caption> एचआईवी से</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/03/130316_hiv_drugs_dp.shtml" platform="highweb"/></link> तीन गुनी अधिक है.

इससे संक्रमित 80 फ़ीसदी लोगों में यह संक्रमण क्रानिक या दीर्घकालिक हो जाता है. इसके विषाणु शरीर में लंबे समय तक बने रहते हैं. एसे लोग लीवरी संबंधी घातक बीमारियां की चपेट में आ जाते हैं.

सचेत हों सरकारें

हेपेटाइटिस-सी के संक्रमण के लक्षण बहुत कम नज़र आते हैं
इमेज कैप्शन, हेपेटाइटिस-सी के संक्रमण के लक्षण बहुत कम नज़र आते हैं

आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि सरकारों को नशीले पदार्थों के खिलाफ़ जारी लड़ाई में लगे संसाधनों को जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगाना चाहिए जिससे हेपेटाइटिस-सी को और फैलने से रोका जा सके.

आयोग के आयुक्त मिशेल काज़ाचकीने कहते हैं,''हेपेटाइटिस-सी पृथ्वी पर ऐसी बीमारी बन गई है जिसका सरकारों ने पूरी तरह से ग़लत अनुमान लगाया है.''

काज़ाचकीने एचआईवी/ एड्स विषय पर पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत भी है.

वे कहते हैं,‘‘यह शर्म की बात है कि केवल कुछ देशों में ही सुई से नशीली दवाएं लेने वाले लोगों में हेपेटाइटिस-सी के नए संक्रमण में कमी आई है.’’

आयोग ने हेपेटाइटिस-सी से लड़ाई में स्कॉटलैंड के नेशलन हेपेटाइटिस-सी एक्सन प्लान को बेहतरीन योजना बताया है.

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