लीबिया को लेकर सुरक्षा परिषद में मतभेद

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लीबिया को उड़ान निषिद्ध क्षेत्र (नो फ़्लाई ज़ोन) घोषित करने के मसौदे पर मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं.
कर्नल गद्दाफ़ी के विरोधियों पर वायु हमलों को रोकने के लिए ये मसौदा पेश किया गया था.
ब्रिटेन और फ्रांस ने गुरुवार इस पर मतदान के जोर दे रहे थे जबकि रूस और चीन किसी भी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं हैं.
ब्रिटेन और फ्रांस का कहना है कि अरब लीग ने इस तरह के उपायों का आग्रह किया था जिसके बाद उन्होंने यह प्रस्ताव पेश किया है.
अमरीकी की संयुक्त राष्ट्र में राजदूत सूसन राइस का कहना था कि सुरक्षा परिषद को उड़ान निषिद्ध क्षेत्र से कहीं आगे की कार्रवाई पर विचार करना चाहिए.
हालांकि अमरीका ने लीबिया पर आर्थिक पाबंदियों को और कड़ा करते हुए विदेश मंत्री मूसा कूसा और लीबिया की 16 सरकारी कंपनियों की परिसंपत्तियों को सील कर दिया है.
जबकि रूस और चीन ने लीबिया में संघर्ष विराम की अपील का समर्थन किया है. जर्मनी का कहना है कि अब भी लीबिया में कई सवालों का जवाब मिलना बाकी है.
लीबिया में संघर्ष
इस बीच लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के वफ़ादारों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है.
कर्नल गद्दाफ़ी के वफादार सैनिक ज़मीन और हवाई हमलों के ज़रिए अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब हो रहे हैं और पूर्व दिशा में आगे बढ़ते जा रहे हैं.
लड़ाकू विमानों ने अज़दबिया शहर के बाहर भयंकर बमबारी की है और अब कर्नल गद्दाफ़ी के वफ़ादारों के लिए बेनगाज़ी को विद्रोहियों के कब्ज़े से छु़ड़ाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि बड़ी संख्या में लीबिया के नागरिक देश छोड़ रहे हैं और मिस्र में प्रवेश कर रहे हैं.
एजेंसी के अनुसार अब तक माना जा रहा था कि वही लोग लीबिया छोड़ रहे हैं जो काम की तलाश में अपने इलाक़े छोड़ते थे लेकिन अब आम लोग,औरतें और बच्चे भी इलाक़े छोड़ रहे हैं.
उधर पश्चिम में कर्नल गद्दाफ़ी के वफ़ादारों को बहुत सफलता मिली है और वो ट्यूनीशिया की सीमा से लगी ज़ुवारा में दोबारा अपना नियंत्रण स्थापित करने में सफल रहे हैं.

























