मिस्र चुनावों में इस्लामी दलों की भारी जीत

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मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के पद छोड़ने के बाद हुए पहले संसदीय चुनावों में इस्लामी पार्टियों को भारी सफलता मिली है.
तीन चरणों में हुए चुनावों में मुस्लिम ब्रदरहुड के राजनीतिक अंग फ़्रीडम ऐंड जस्टिस पार्टी (एफजेपी) ने सबसे ज़्यादा चालीस फ़ीसदी सीटों पर सफलता हासिल की है.
कट्टरपंथी इस्लामी सलाफ़ी अल-नूर पार्टी दूसरे स्थान पर रही है.
सालाफ़ी दूसरे नंबर पर
उदारवादी न्यू वफ़ाद और धर्म निरपेक्ष इजिप्शियन ब्लॉक गठबंधन उनसे पीछे रहा है.
कुल मिलाकर नतीजों में इस्लामी दलों ने दो तिहाई सीटों पर कब्ज़ा कर लिया है.
द फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी ने घोषणा की है कि वो साद अल-ख़तानी को स्पीकर के लिए नामांकित करेगी.
ख़तानी मुस्लिम ब्रदरहुड के लंबे समय से पदाधिकारी रहे हैं और निर्दलीय सांसद रह चुके हैं.
समाचार ऐजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में ख़तानी ने कहा कि प्राथमिकता क्रांति की मांगों को पूरा करने की है, साथ ही उन लोगों को अधिकारों की है जो इस दौरान मारे गए या घायल हुए.
काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लेन का कहना है कि हांलाकि मुस्लिम ब्रदरहुड सत्ता की दौड़ में सबसे आगे है लेकिन सरकार के बनने का फ़ैसला शासकों को ही करना है.
मिस्र के सैन्य शासकों की तय की गई समयसीमा के मुताबिक जून तक नए राष्ट्रपति को चुना जाना है.
ब्रदरहुड ने तीस साल तक हुस्नी मुबारक के राज का विरोध किया है और ये संस्था पिछले वर्ष तक मिस्र में प्रतिबंधित थी. लेकिन सिंद्धात रूप इसे सहन किया जाता रहा था.
सलाफ़ी सातवीं सदी में हज़रत मोहम्मद और उनके सहयोगियों के समय मे प्रचलित इस्लाम की तर्ज पर मिस्र को चलाना चाहते हैं.
इससे पहले,मिस्र की जनता ने संसद के निचले सदन की 489 सदस्यों के लिए हुए चुनाव में तीन चरणों में मतदान किया था. मतदान की ये प्रक्रिया छ हफ्तों तक चली थी.
देश की चुनाव प्रणाली के तहत दो तिहाई सीटें पार्टी के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित है, बाकी सीटों के लिए सीधे चयन की प्रक्रिया है.

























