कोलकाता में तसलीमा की नई किताब का विरोध

तस्लीमा नसरीन को इससे पहले भी विरोध का सामना करना पड़ा है
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कोलकाता में आयोजित किताब मेले में विवादित लेखिका तसलीमा नसरीन की नई किताब के विमोचन का विरोध हुआ है.

पुस्तक मेले में तसलीमा नसरीन मौज़ूद नहीं थीं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि उनकी पुस्तक छापने वाले प्रकाशक को हॉल से बाहर किताब जारी करने के लिए बाध्य किया गया.

तसलीमा ने इसके लिए कुछ धार्मिक कट्टरपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया जिन्होंने किताब जारी करने का विरोध किया.

ग़ौरतलब है कि तसलीमा को वर्ष 1994 में बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था. उन्हें मुसलमान कट्टरपंथियों ने जान से मारने की धमकियां दी थीं.

बांग्लादेश से वे भारत पहुंची लेकिन यहां भी उनका विरोध हुआ जिसके बाद वर्ष 2008 में वे स्वीडन चली गईं.

हाल ही में भारत में हुए जयपुर साहित्य सम्मेलन में जानेमाने लेखक सलमान रूश्दी सुरक्षा कारणों की वजह से शिरकत नहीं कर पाए थे.

'खुले आकाश के नीचे'

बीते रविवार को दिल्ली में चित्रों की एक प्रदर्शनी के दौरान एक कलाकार के साथ मारपीट की गई थी क्योंकि उन्होंने कुछ नग्न तस्वीरें बनाई थीं.

तसलीमा नसरीन कोलकाता किताब मेले में निर्वासन नामक अपनी जीवनी जारी करना चाहती थीं जिसमें उन्होंने वर्ष 2007-08 में कोलकाता से पलायन करने का ब्योरा दिया है.

'बुकसेलर ऐंड पब्लिशर्स गिल्ड' ने कोलकाता किताब मेले में एक हॉल में तसलीमा की जीवनी को जारी करने की योजना बनाई थी.

तसलीमा नसरीन ने ट्विटर पर लिखा, ''कोलकाता किताब मेला समिति ने मेरी किताब को जारी करने का कार्यक्रम रद्द कर दिया, क्यों? क्योंकि कुछ धार्मिक कट्टरपंथी ऐसा नहीं चाहते थे.''

तसलीमा के मुताबिक़, कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा कारणों के मद्देनज़र आयोजकों से इस आयोजन को रद्द करने के लिए कहा.

बाद में एक अन्य ट्वीट में तसलीमा ने लिखा, ''पीबीएस प्रकाशक ने दोस्तों के साथ मिलकर कोलकाता किताब मेला में खुले आकाश के नीचे मेरी किताब जारी की. वातानुकूलित हॉल में किताब को जारी करने पर प्रतिबंध था.''

तसलीमा नसरीन ने कविताओं, उपन्यासों और लघु कहानियों की शक़्ल में कई किताबें लिखी हैं. ये किताबें बंगाली भाषा में हैं और इनमें से ज़्यादातर निर्वासन के दौरान लिखी गई हैं.

उनकी सबसे विवादास्पद किताब 'लज्जा' है जिस पर बांग्लादेश में प्रतिबंध है. इसी किताब की वजह से मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी जिसके बाद उन्हें बांग्लादेश छोड़कर जाना पड़ा था.

तसलीमा के नवीनतम वृतांत की प्रकाशक शिबानी मुखर्जी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि मूल्यों, सत्य के प्रति चाह और सामाजिक उन्नति को बढ़ावा देने वाली ज़्यादा से ज़्यादा किताबों को प्रकाशित करने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं.