भारत ने विदेश सचिव मथाई को मालदीव भेजा

मथाई वहीद और नशीद दोनों से मिलेगे
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भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई का मालदीव जाना बताता है कि भारत इस छोटे से द्वीप में पिछले दिनों हुई उथलपुथल में अपने लिए बड़ी भूमिका तलाश रहा है.

सत्ता से ह़टाए गए मोहम्मद नशीद का कहना है कि उन्हें एक सशस्त्र विप्लव में हटाया गया है जो कि ग़ैरकानूनी है. उनकी माँग है कि देश में नए चुनाव करवाए जांए.

वर्तमान सरकार का कहना है कि उन्होंने अपनी इच्छा से सत्ता छोड़ी है और उनकी नए चुनाव करवाने की माँग जायज़ नहीं है.

कुछ टीकाकार मानते हैं कि एक क्षेत्रीय शक्ति के तौर पर भारत को वहाँ और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. भारतीय पोत मालदीव की जल सीमा की पहले से ही निगरानी करते आए हैं. उसका राजधानी माले में बाकायदा उच्चायोग है. अमरीका सहित कई अन्य देश श्रीलंका से ही मालदीव के मामलों पर नज़र रखते हैं.

नज़ीर के सत्ता से हटते ही जिस तरह से भारत ने वहीद हसन मानिक की नई सरकार को मान्यता दी है उससे इसकी इस क्षेत्र में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की क्षमता पर सवाल उठने लगे हैं.

पुरानी सरकार में विदेश मंत्री अहमद नसीम को इस बात का गिला है कि भारत ने इतनी जल्दी ही नई सरकार की वैधता पर अपनी राय बना ली है. हांलाकि उन्होंने इस बात का स्वागत किया है कि भारत रंजन मथाई को वहाँ भेज रहा है जो कि उनकी नज़र में एक अनुभवी राजनयिक हैं.

मथाई का वहाँ जाना बताता है कि भारत की समझ में ये आ गया है कि वहाँ की समस्या अपने आप हल होने वाली नही है और उसे वहाँ पर अपनी भूमिका बढ़ानी चाहिए.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि मथाई की यात्रा के क्या परिणाम निकलेंगे लेकिन नशीद के समर्थक इस बात पर दाँव लगा रहे हैं कि कई विदेशी दूतों के लगातार मालदीव आने से मानिक की सरकार पर जल्दी राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए दबाव बढ़ेगा.

17 फ़रवरी को नशीद की रैली

नशीद 17 फ़रवरी को वहाँ एक बड़ी रैली करने वाले हैं जिसका मुख्य उद्देश्य विदेशी ताकतों का ध्यान आकृष्ट करना है. मथाई इस रैली से पहले नशीद से बात कर भारत का पक्ष रखेंगे.

संभावना है कि मथाई नए राष्ट्रपति वहीद से मिल कर उन्हें आगाह करेंगे कि भारत इस रैली से पहले नशीद के समर्थकों के ख़िलाफ़ किसी कार्रवाही या नशीद को गिरफ़्तार करने की किसी कोशिश को पसंद नहीं करेगा.

वहीद नशीद के समर्थकों की जल्दी चुनाव करवाने की माँग ठुकराते रहे हैं. उनका कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 2013 में होंगे.

भारत पहले ही विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी एम गणपति को मालदीव भेज चुका है लेकिन उनकी यात्रा का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है.

अमरीका ने भी अपने दक्षिणी और मध्य एशिया के उप विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लैक को वहाँ भेजा है लेकिन वह भी गतिरोध दूर कर पाने में सफल नहीं हो पाए है.

नशीद के समर्थक अब भी जल्द चुनाव कराने की अपनी माँग को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं. उनका मानना है कि अगर चुनाव होते हैं तो नशीद की सत्ता में वापसी के अच्छे अवसर हैं.