फिर गोल्ड मेडल लक्ष्य नहीं : बिंद्रा

लंदन ओलंपिक की तैयारियों के लिए अभिनव पिछले लंबे समय से यूरोप में गुपचुप तरीके से तैयारियों में लगे हैं
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बीजिंग ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा के गोल्ड मेडल ने भारतीय खेलों में नई जान डाली.

बाकी खिलाड़ियों को भी लगने लगा कि वे भी ओलंपिक पदक जीत सकते हैं. लंदन ओलंपिक में भी सभी की निगाहें उन पर रहेंगी. लेकिन अभिनव का लक्ष्य स्वर्ण पदक नहीं है.

10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के इस शूटर ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “यह लक्ष्य तय करना मुश्किल है कि मुझे एक और गोल्ड मेडल हासिल करना है. क्योंकि एक मेडल मैं जीत चुका हूं. गोल्ड मेडल मेरा लक्ष्य नहीं है. मेरे लिए इस समय सबसे अहम अपने प्रर्दशन को सुधारने और उस पर ध्यान देना है. प्रदर्शन ठीक रहेगा तो पदक खुद ही आ जाएगा. आखिरी परिणाम मेरा लक्ष्य नहीं है.”

गुपचुप तैयारी

लंदन ओलंपिक की तैयारियों के लिए अभिनव पिछले लंबे समय से यूरोप में गुपचुप तरीके से तैयारियों में लगे हैं. फरवरी में उन्होंने एशियन चैम्पियनशिप जीत कर सबसे कड़े प्रतिद्वंदी चीनी शूटरों को चेतावनी भरा संकेत भी भेजा है.

अभिनव ने कहा, “मेरे लिए ओलंपिक पहाड़ के शिखर पर चढ़ने जैसा है. मैं वहां पहुंच चुका हूं. यहां से आगे जाने के लिए यकीनी तौर पर मुझे नीचे उतरना पड़ेगा.”

अभिनव ने कहा, “कामयाबी, शोहरत के कोई मायने नहीं है. मेरा लक्ष्य फेमस होना नहीं था. मैं ओलंपिक चैम्पियन होना चाहता था. मैं सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने की इच्छा रखता था. इस सबके साथ जो मुझे मिला, मेरे लिए उसके कोई मायने नहीं हैं. मैं आज और भी बेहतर करना चाहता हूं.”

शूटिंग दीवानगी

अभिनव ने कहा कि उनमें अब भी शूटिंग को लेकर दीवानगी है. बेशक ओलंपिक के बाद उन्होंने कुछ दिन आराम किया. लेकिन यह उनके जीवन और वजूद का हिस्सा है. शूटिंग उनके खून में दौड़ती है. लेकिन उनके लिए अहमियत इस बात की है कि वह अपने लक्ष्य को आगे कैसे बढ़ाते हैं.

अभिनव इस बात को लेकर संतुष्ट हैं कि बीजिंग में उनके स्वर्ण पदक ने बाकी अन्य खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भरा है.

खेल रत्न अभिनव ने कहा, “बीजिंग ओलंपिक में मेरे मेडल से मांइडसेट बदला है. पहले ऐसी सोच थी कि ओलंपिक में मेडल जीतना संभव नहीं है. मैं ऐसे ही माहौल में बड़ा हुआ. बीजिंग के बाद मैंने कई साथी खिलाड़ियों से बात की है. उन्हें लगता है कि अगर मैं मेडल जीत सकता हूं तो वे भी जीत सकते हैं. ”

अभिनव ने कहा कि वह अपनी एकाग्रता को बनाए रखने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करते हैं. वह पिछले करीब 15 सालों से इस पर काम कर रहे हैं. इसमें जिस्मानी फिटनेस के अलावा जहनी फिटनेस पर काम भी शामिल है. उनकी तैयारियों में खेल का हर पहलू शामिल होता है.

कोई रोलमॉडल नहीं

उनके रोलमॉडल के बारे पर पूछे जाने पर अभिनव ने कहा, “मेरा कोई हीरो नहीं है. मैंने हमेशा अपने भीतर से ही मजबूती हासिल करने की कोशिश की है. असल में मेरे मां-बाप ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है. उन्होंने मेरा करियर बनाने में अहम भूमिका निभाई है. दोनों ने मेरे सपने को पूरा करने के लिए निस्वार्थ काम किया है. ”

अभिनव ने कहा कि और ओलंपिक पदक हासिल करने के लिए देश में माहौल बनाना होगा. सभी खेलों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल करना होगा.